बड़े होने का प्रेशर और अपने शहर को छोड़कर दूसरे शहर में जाकर नई जिंदगी और नौकरी की शुरुआत करना आसान नहीं होता है. रहने के लिए पीजी और खाना का जुगाड़ करना कभी-कभी बहुत मुश्किल हो जाता है. बेंगलुरु में नौकरी करन ेवाले एक कर्मचारी ने अपना साथ हुई एक घटना को शेयर किया है. पोस्ट में कर्मारी ने बताया कि बेंगलुरु में बढ़ते किराए ने उनका वहां पर रहना मुश्किल कर दिया है. उन्होंने लिखा कि वहां पर लगातार किराए बढ़ रहे हैं, जिससे कामकाजी लोग परेशान हैं. खासकर एचएसआर लेआउट जैसे लोकप्रिय इलाकों में किराया काफी ज्यादा हो गया है. हाल ही में एक यूजर ने बताया कि वह एचएसआर लेआउट छोड़ रहा है, क्योंकि वहां 1BHK फ्लैट का किराया 45,000 रुपये प्रति महीना हो गया है. यूजर ने इसे बहुत महंगा बताते हुए कहा कि इतने किराए पर रहना मुश्किल हो गया था और अब वहां से जाना एक सही फैसला लग रहा है.
पोस्ट में किया इन बातों का जिक्र
बता दें कि बेंगलुरु में रहने वाले एक शख्स ने वर्कप्लेस नेटवर्किंग प्लेटफॉर्म ग्रेपवाइन पर अपना अनुभव साझा किया. उन्होंने लिखा कि अलविदा एचएसआर लेआउट! 1BHK के लिए 45,000 रुपये का किराया देना सरासर पागलपन है. इस पोस्ट ने तुरंत लोगों का ध्यान आकर्षित किया क्योंकि उन्होंने बताया कि अपनी आय के हिसाब से किराया बहुत अधिक होने के कारण उन्होंने एचएसआर लेआउट छोड़ने का फैसला किया है.
कर्मचारी का कहना है कि ज्यादा किराया होने की वजह से वहां रहना मुश्किल हो गया है. अपने पोस्ट में बताया कि एक छोटे से 1 BHK के लिए वह हर महीने 45 हजार रुपये देते हैं और वह वहां पर चार साल से रह रहे हैं यानी इस सालों में उन्होंने केवल किराए के लिए 24 लाख रुपये खर्च किए हैं.
बहुत बड़ा बोझ उतर गया
पोस्ट में उन्होंने लिखा कि मुझे यह घोषणा करते हुए बेहद राहत मिल रही है कि काफी सोचने के बाद मैंने एचएसआर छोड़ने का फैसला किया है. ऐसा लग रहा है कि मेरे कंधों से बहुत बड़ा बोझ उतर गया है और इस घटना को शेयर करते हुए मैं बहुत खुश हूं. उन्होंने बताया कि वह इस इलाके में इसलिए शिफ्ट हुए थे क्योंकि उनके की साथी यहां पर रहते थे और ये ऑफिस के पास था. समय बीतने के साथ ही उन्हें इस इलाके में रहने का दबाव महसूस होने लगा. दोस्त ने उन्हें सस्ते विकल्प तलाशने में भी मदद की.
दोस्त ने दी ये सलाह
कर्मचारी ने बताया कि एक सहकर्मी की सलाह पर उन्होंने ब्रुकफील्ड इलाके में घर तलाशना शुरू किया. इसके लिए उन्होंने एक ब्रोकर की मदद ली और अपने बजट के हिसाब से कई फ्लैट देखे. फ्लैट देखने के दौरान उन्हें एहसास हुआ कि एचएसआर लेआउट के बाहर कम किराए में बेहतर विकल्प मिल सकते हैं. उन्होंने बताया कि उन्होंने करीब 15 फ्लैट देखे, लेकिन उनमें से कुछ ही अच्छी स्थिति में थे. आखिरकार उन्होंने एक शांत रिहायशी इलाके में नया फ्लैट चुना, जो ऑफिस से थोड़ी ही दूरी पर था. हालांकि, घर बदलना आसान नहीं था क्योंकि उन्हें कम समय में सामान पैक कर शिफ्टिंग का इंतजाम करना पड़ा.

कर्मचारी ने कहा कि इस अनुभव के बाद उनकी एचएसआर लेआउट को लेकर सोच बदल गई. उनके मुताबिक, इलाका दिखने में अच्छा है,लेकिन वहां रहने का खर्च और मिलने वाली सुविधाएं एक-दूसरे के मुकाबले सही और संतुलित नहीं हैं. उन्होंने बताया कि बढ़ते किराए और अन्य खर्चों की वजह से उनकी बचत पर असर पड़ रहा था. इसी कारण उन्होंने एचएसआर लेआउट छोड़ने का फैसला किया. जाते समय उन्होंने इलाके के भारी ट्रैफिक का भी जिक्र किया और कहा कि इसी वजह से वहां से निकलने का फैसला और आसान हो गया.
मैं बनावटी दिखावे से थक चुका था...
मुझे यह स्वीकार करना होगा कि मैं इस बनावटी दिखावे से पूरी तरह थक चुका हूं. इसने मेरी 24 लाख रुपये की आय को खत्म कर दिया. लास्ट में उन्होंने लिखा कि अलविदा, हाई-स्पीड रेल (HSR) और अलविदा भयानक ट्रैफिक. मेरे इस फैसले को इतना आसान बनाने के लिए.
सोशल मीडिया यूजर्स ने क्या कहा?
पोस्ट के वायरल होने के बाद सोशल मीडिया यूजर्स ने भी अपनी-अपनी प्रतिक्रिया शेयर की है. कुछ यूजर्स जो बेंगलुरु के रहने वाले हैं ने बताया कि वे भी महंगे इलाकों से निकलकर कम कीमत पर अच्छा घर ढूंढ चुके हैं. एक यूजर ने लिखा कि मैंन भी एक साल पहले ऐसा ही किया था. जेपी नगर से येलाहांका में शिफ्ट हो गया था. कई यूजर्स ने कहा कि नौकरी के लिए यह करना पड़ता है.