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69 की उम्र में डॉक्टर बनने का है सपना, आरक्षण के लिए कोर्ट पहुंचे NEET के सबसे उम्रदराज उम्मीदवार    

NEET UG 2026 के सबसे उम्रदराज अभ्यर्थियों में शामिल अशोक बहार ने अब मेडिकल शिक्षा में वरिष्ठ नागरिकों के लिए अलग आरक्षण की मांग को लेकर लखनऊ हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया है. उन्होंने MBBS में एडमिशन में योग्य सीनियर सिटिजन के लिए एक फीसदी आरक्षण या विशेष कोटा देने की मांग करते हुए रिट याचिका दाखिल की है. इस मामले पर हाईकोर्ट में 21 जुलाई को सुनवाई प्रस्तावित है. 

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डॉक्टर बनने के सपने ने पहुंचा दिया कोर्ट.
डॉक्टर बनने के सपने ने पहुंचा दिया कोर्ट.

जब ज्यादातर लोग उम्र के इस पड़ाव पर नई शुरुआत का ख्याल छोड़ देते हैं, तब अशोक बहार ने अपने सपने को जिंदा रखा. NEET UG 2026 में बतौर सबसे उम्रदराज अभ्यर्थियों में शामिल अशोक अब सिर्फ मेडिकल सीट के लिए नहीं, बल्कि उन वरिष्ठ नागरिकों के लिए भी आवाज उठा रहे हैं जो उम्र को अपनी पढ़ाई और सपनों के रास्ते की बाधा नहीं मानते. उन्होंने मेडिकल शिक्षा में योग्य सीनियर सिटिजन्स के लिए आरक्षण या विशेष कोटे की मांग को लेकर लखनऊ हाईकोर्ट का रुख किया है. 

अपनी याचिका में उन्होंने तर्क दिया है कि जब मेडिकल प्रवेश परीक्षा में दिव्यांगों, स्वतंत्रता सेनानियों, पूर्व सैनिकों और खिलाड़ियों को विशेष कोटा या फायदे दिए जाते हैं, तो सीनियर सिटिजंस को इससे क्यों महरूम रखा जा रहा है? उन्होंने अदालत से गुजारिश की है कि सरकार को वरिष्ठ नागरिकों के लिए MBBS दाखिले में 1 फीसदी रिजर्वेशन या स्पेशल कोटा देने के लिए उचित पॉलिसी बनाने का आदेश दिया जाए.

क्या है कोर्ट का रुख?

अशोक बहार के वकील पंकज धीर सिंह राणा ने बताया कि सुप्रीम कोर्ट ने कुछ साल पहले NEET-UG एग्जाम के लिए उम्र की सीमा हटा दी थी. जब देश की सबसे बड़ी अदालत मानती है कि सीनियर सिटिजन को मेडिकल सीट पाने का अधिकार है, तो उन्हें रिजर्वेशन भी दिया जाना चाहिए. अशोक बहार का डॉक्टर बनने का सपना 52 साल पुराना है. उन्होंने पहली बार 1974 में मेडिकल एंट्रेंस दिया था लेकिन सफल नहीं हुए.

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इसके बाद 2023 में दूसरा प्रयास किया, पर सेंटर दूर होने के कारण देरी से पहुंचे और परीक्षा छूट गई. हार न मानते हुए उन्होंने इस साल मई में फिर परीक्षा दी. दरअसल, लखनऊ के एक सम्मानित चिकित्सक रहे उनके पिता की तरह, उनकी मां सावित्री देवीहमेशा चाहती थीं कि अशोक डॉक्टर बनें और मां का 1990 में निधन हो गया. यह अधूरा सपना उनके दिल में जिंदा रहा, जिसे उनकी पत्नी डॉ. मंजू बहार ने फिर से जगाया. दिलचस्प बात यह है कि बहार के परिवार में करीब 20 डॉक्टर हैं, जिनमें से कई विदेशों में प्रैक्टिस कर रहे हैं.

बेहद मजबूत है एजुकेशन बैकग्राउंड

69 साल की उम्र में नीट क्रैक करने का जज्बा रखने वाले अशोक बहार का एकेडमिक और प्रोफेशनल बैकग्राउंड बेहद मजबूत है. इन्होंने लखनऊ यूनिवर्सिटी से बॉटनी, जूलॉजी और केमिस्ट्री में B.Sc, कंप्यूटर एप्लीकेशन में पोस्टग्रेजुएट डिप्लोमा, लॉ की डिग्री और MBA.करियर की बात करे तो अशोक इंडियन ड्रग्स एंड फार्मास्युटिकल्स लिमिटेड में यूपी और उत्तराखंड के मार्केटिंग हेड रहे. वीआरएस लेने के बाद विदेश मंत्रालय में कंसलटेंट के रूप में सेवाएं दीं. हाई कोर्ट के लॉयर भी हैं.

शिक्षा हासिल करने की नहीं होती है कोई उम्र

अशोक बहार का कहना है कि शिक्षा हासिल करने की कोई उम्र नहीं होती. उम्र के अंतिम पड़ाव पर भी जो बुजुर्ग अपने अधूरे सपनों को पूरा करना चाहते हैं, उनके लिए सरकार को विशेष प्रावधान करने चाहिए. अब हर किसी की नजरें 21 जुलाई को हाईकोर्ट में होने वाली सुनवाई पर टिकी है.

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