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कैंसर से गई दादी की जान, तभी पोते ने ठाना डॉक्टर बनूंगा, ऐसे बना NEET टॉपर

री-नीट परीक्षा का रिजल्ट जारी हो गया है. इसके बाद से टॉपर की स्टोरी सामने आ रही है. 720 में से 715 नंबर लाकर पंजाब के आर्यन गुप्ता ने ऑल इंडिया रैंक-1 हासिल किया है. उनकी इस सफलता ने कई छात्रों को प्रोत्साहित किया है. लेकिन इस मेहनत के पीछे एक ऐसी कहानी छुपी है, जो हर किसी को भावुक कर देगी. तीसरी क्लास में डॉक्टर बनने का लिया संकल्प, 16 से 17 घंटे की पढ़ाई, पेपर लीक और दोबारा से नीट का पेपर देने से टॉपर बनने तक का उनका सफर बेहद खास रहा है. 

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दादी के निधन के बाद ठानी डॉक्टर बनने की जिद.
दादी के निधन के बाद ठानी डॉक्टर बनने की जिद.

री-नीट परीक्षा 2026 का रिजल्ट जारी होने के साथ ही पंजाब के आर्यन गुप्ता की सफलता चर्चा का विषय बन गई है. 720 में से 715 अंक हासिल कर ऑल इंडिया रैंक-1 पाने वाले आर्यन का सफर केवल कड़ी मेहनत की कहानी नहीं है बल्कि एक अटूट संकल्प की मिसाल भी है. तीसरी क्लास में डॉक्टर बनने का सपना देखने वाले आर्यन की सफलता के पीछे एक और कहानी है, जो हर कसी को भावुक कर रही है. कैंसर से दादी को खोने के बाद उनके मन में उन्हें खोने के दर्द ने डॉक्टर बनने का संकल्प कभी शांत नहीं होने दिया. रोज 16 से 17 घंटे पढ़ाई की, पेपर लीक और दोबारा परीक्षा जैसी चुनौतियों का सामना करते हुए टॉपर के रूप में अपनी जगह बनाई है. 

दादी की याद ने किया प्रोत्साहित 

आर्यन बताते हैं कि जब वह क्लास 3 में थे, तो उनकी दादी की कैंसर से जूझ रही थी और उस समय उन्होंने परिवार का दर्द बहुत करीब से देखा था. दादी की मौत के बाद उन्होंने तय कर लिया था कि वह बड़े होकर ऐसे मरीजों की मदद करेंगे जो इस गंभीर बीमारी से जूझ रहे हैं. यही वजह है कि उनका सपना केवल डॉक्टर बनना नहीं है बल्कि वह ऑन्कोलॉजिस्ट (कैंसर विशेषज्ञ) बनकर कैंसर मरीजों का इलाज करना चाहते हैं.  

अब NEET में हासिल किए 720 में से 715 अंक

इसी संकल्प के साथ उन्होंने नीट की तैयारी की. लेकिन 3 मई को आयोजित हुई परीक्षा पेपर लीक की वजह से रद्द कर दी गई थी लेकिन री-नीट यूजी 2026 के नतीजे घोषित होने के बाद पंजाब के लुधियाना निवासी आर्यन गुप्ता पूरे देश में सुर्खियों में आ गए हैं. उन्होंने परीक्षा में 720 में से 715 अंक हासिल किए और AIR-1 हासिल किया. जैसे ही रिजल्ट जारी हुआ परिवार में खुशी का माहौल छा गया.

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16-17 घंटे पढ़ाई

NEET जैसी परीक्षा में टॉप करना आसान नहीं होता. इसके लिए आर्यन ने दिन-रात मेहनत की थी. अपनी सफलता के बारे में बताते हुए कहा कि वह रोजाना 16 से 17 घंटे तक पढ़ाई करते थे. कई बार इतना अधिक प्रेशर होता था कि वह रात में सो भी पाते थे. हालांकि, बावजूद इसके उन्होंने मेहनत के साथ अपने हेल्थ का भी ध्यान दिया. वह रात में 7 घंटे की नींद लेते थे और दिन में भी सोते थे. उनका मानना है कि केवल लंबे समय तक पढ़ना ही सफलता की गारंटी नहीं है, बल्कि शरीर और दिमाग दोनों का स्वस्थ रहना भी जरूरी है.

डॉक्टरों के परिवार में हुआ पालन-पोषण

आर्यन का परिवार पूरी तरह मेडिकल फील्ड से जुड़ा हुआ है. उनके पिता डॉ. विश्वविद्ध सिन्हा और मां गायत्री देवी दोनों डॉक्टर हैं. इतना ही नहीं, उनके नाना-नानी, चाचा-चाची और बुआ-फूफा भी डॉक्टर ही हैं. आर्यन की सफलता में उनके बड़े भाई ने भी अहम भूमिका निभाई है.उनके भाई ने NEET UG 2025 में AIR 54 हासिल की थी. आर्यन ने बताया कि उनकी तैयारी के दौरान उनके भाई ने हर कदम पर उनका साथ दिया. 

पहली परीक्षा में 5 सवाल हुए थे गलत 

आर्यन ने बताया कि पहली परीक्षा बहुत आसान थी. लेकिन प्रेशर की वजह से उनके 5 सवाल गलत हो गए थे. लेकिन अगर पेपर लीक नहीं होता और वहीं परीक्षा लास्ट मानी जाती तो, वह टॉपर नहीं बन पाते. 

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