अपनी कड़क आवाज, बेबाक अंदाज और संजीदा अभिनय से दशकों तक हिंदी व मराठी सिनेमा पर राज करने वाले दिग्गज अभिनेता नाना पाटेकर का 75 वर्ष की उम्र में गोवा में कार्डियक अरेस्ट के कारण निधन हो गया है. उनके गुजर जाने के बाद जहां पूरा देश और बॉलीवुड शोक में डूबा हुआ है, वहीं सोशल मीडिया पर उनका एक दशक पुराना वीडियो तेजी से वायरल हो रहा है.
यह वीडियो नवंबर 2016 का है, जब नाना पाटेकर नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी (NIT) अगरतला के 9वें दीक्षांत समारोह में बतौर मुख्य अतिथि पहुंचे थे. उस वक्त देश के युवा इंजीनियर्स को संबोधित करते हुए उन्होंने जो शब्द कहे थे, वे आज उनके जाने के बाद और भी ज्यादा प्रासंगिक और भावुक हो गए हैं.
'डिग्री मिलना अंत नहीं, बड़ी जिम्मेदारियों की शुरुआत है!'
दीक्षांत समारोह में जब छात्र अपनी डिग्री पाकर जश्न मना रहे थे, तब नाना पाटेकर ने मंच से एक अलग ही संदेश दिया थाा. उन्होंने कहा था, ष्इस डिग्री को हासिल करके आपने अपनी औपचारिक शिक्षा तो पूरी कर ली है, लेकिन यह मंजिल नहीं, बल्कि जीवन की असली जिम्मेदारियों की शुरुआत है.'
नाना से युवाओं से अपील की थी कि वे अपने करियर का चुनाव करते समय सिर्फ पैकेज या पैसे न देखें, बल्कि देश और समाज के प्रति अपनी जिम्मेदारी को हमेशा सर्वोपरि रखें. नाना ने ईमानदारी पर जोर देते हुए कहा था कि इंसान को अपनी जिंदगी इस तरह जीनी चाहिए कि वह कभी खुद से आंखें मिलाने में शर्मिंदगी महसूस न करे.
'जनता के टैक्स के पैसों से बने हो, समाज को लौटाना सीखो!'
एनआईटी जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों से निकलने वाले छात्रों को याद दिलाते हुए नाना पाटेकर ने कहा था कि NIT जैसे संस्थानों में पढ़ने वाले छात्रों की पढ़ाई पर देश की जनता के पैसों का बड़ा योगदान होता है. इसलिए पास आउट होने के बाद समाज और देश को वापस लौटाना (Give Back) हर युवा का कर्तव्य है.
उन्होंने युवाओं को संयम और सादगी से जीवन जीने की सलाह दी, ताकि अपनी ऊर्जा और संसाधनों का इस्तेमाल समाज के गरीब व जरूरतमंद तबके की मदद के लिए किया जा सके.
'गगमन' से शुरू हुआ सफर और बिना डिग्री के बनाई पहचान
नाना पाटेकर का खुद का जीवन किसी पारंपरिक यूनिवर्सिटी डिग्री के भरोसे आगे नहीं बढ़ा था. उन्होंने मुंबई के मशहूर सर जे.जे. स्कूल ऑफ आर्ट से पढ़ाई की और फिर थिएटर व सिनेमा का रुख किया.1978 में आई फिल्म 'गगमन' से अपने फिल्मी करियर की शुरुआत करने वाले नाना ने सीरियस ड्रामा, एक्शन से लेकर कॉमेडी तक हर किरदार में अपनी छाप छोड़ी. सिनेमा के साथ-साथ उन्होंने भारतीय सेना और सूखा पीड़ित किसानों के लिए भी ज़मीनी स्तर पर काम किया.
एनआईटी अगरतला के युवाओं से उन्होंने कहा था कि नौकरी और डिग्री पर मत रुको, लगातार सीखते रहो, उम्मीद बनाए रखो और देश की असली समस्याओं को सुलझाने के लिए अपनी सोच व रचनात्मकता का इस्तेमाल करो. आज भले ही नाना पाटेकर हमारे बीच नहीं रहे, लेकिन उनका यह संदेश देश की आने वाली हर पीढ़ी को राह दिखाता रहेगा.