CBSE के स्कूलों में पढ़ रहे कक्षा 7, 8 और 9 के छात्रों और उनके अभिभावकों के लिए एक बड़ी राहत की खबर है। सीबीएसई की 'थ्री-लैंग्वेज पॉलिसी' को लेकर चल रहे असमंजस के बीच सूत्रों के हवाले से खबर है कि जो छात्र वर्तमान में दो विदेशी भाषाओं के कॉम्बिनेशन के साथ पढ़ाई कर रहे हैं, उन्हें कक्षा 10वीं तक इसी व्यवस्था को जारी रखने की अनुमति दी जाएगी।
दरअसल, हाल ही में सीबीएसई ने अपने संबद्ध स्कूलों को जुलाई से नई तीन-भाषा नीति लागू करने का निर्देश दिया था. इसके बाद कई स्कूलों और अभिभावकों ने आशंका जताई थी कि वर्षों से दो विदेशी भाषाएं पढ़ रहे छात्रों को अचानक एक विदेशी भाषा छोड़कर भारतीय भाषा अपनानी पड़ेगी.
इन चिंताओं के बीच केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने स्पष्ट किया कि पहले जारी किए गए सीबीएसई के निर्देशों में कुछ अस्पष्टता थी, जिसे अब दूर कर दिया गया है. उन्होंने कहा कि जो छात्र पहले से दो विदेशी भाषाएं पढ़ रहे हैं, उन्हें कक्षा 10 तक अपना मौजूदा भाषा कॉम्बिनेशन को जारी रखने की अनुमति मिलेगी.
हालांकि, सीबीएसई की ओर से अभी तक इस संबंध में कोई संशोधित आधिकारिक आदेश जारी नहीं किया गया है. बताया जा रहा है कि बोर्ड अपनी गवर्निंग काउंसिल में विचार-विमर्श के बाद जल्द ही संशोधित दिशा-निर्देश जारी करेगा, जिसमें इस व्यवस्था को औपचारिक रूप से स्पष्ट किया जाएगा.
किन छात्रों पर लागू होगा नया नियम?
शिक्षा मंत्री के अनुसार, राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) 2020 के तहत दो भारतीय भाषाएं पढ़ने की अनिवार्यता केवल भविष्य में कक्षा 6 में प्रवेश लेने वाले छात्रों पर लागू होगी. यानी यह नियम पुराने छात्रों पर पूर्व प्रभाव से लागू नहीं किया जाएगा.
इसका मतलब है कि वर्तमान में कक्षा 7, 8 और 9 में पढ़ रहे छात्र अपने मौजूदा भाषा संयोजन के साथ कक्षा 10 तक पढ़ाई जारी रख सकेंगे. वहीं, नए सत्र में कक्षा 6 में प्रवेश लेने वाले छात्रों को तीन भाषाएं पढ़नी होंगी, जिनमें कम से कम दो भारतीय भाषाएं शामिल होंगी.
धर्मेंद्र प्रधान ने बताया कि नई शिक्षा नीति के तहत 22 भारतीय भाषाओं में कक्षा के अनुरूप पाठ्यपुस्तकें उपलब्ध कराई जाएंगी. उन्होंने कहा कि शिक्षकों और संसाधनों की व्यवस्था करना सीबीएसई की जिम्मेदारी है. इसके अलावा, व्यावसायिक (स्किल) शिक्षा को भी अधिक महत्व दिया जाएगा. कक्षा 6 से 8 तक के छात्रों को हर वर्ष 110 घंटे के स्किल मॉड्यूल पूरे करने होंगे, जबकि कक्षा 9 और 10 में एक स्किल विषय अनिवार्य होगा.
हालांकि, सीबीएसई इस संभावना पर भी विचार कर रहा है कि कक्षा 10 तक अनिवार्य स्किल विषय के स्थान पर किसी विदेशी भाषा को विकल्प के रूप में अनुमति दी जाए. फिलहाल इस प्रस्ताव पर विचार-विमर्श जारी है.