बिहार लोक सेवा आयोग (BPSC) की 70वीं परीक्षा और शिक्षक भर्ती (TRE-4) को लेकर राज्य में बवाल मचा हुआ है. एक तरफ पटना के गर्दनीबाग धरना स्थल पर सैकड़ों छात्र सड़कों पर उतरकर विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं, तो दूसरी तरफ BPSC के परीक्षा नियंत्रक राजेश कुमार सिंह के एक विवादित बयान ने इस आग में घी डालने का काम कर दिया है. हालांकि, गलत कहावत और अभद्र टिप्पणी के लिए चौतरफा घिरने के बाद परीक्षा नियंत्रक ने अपने बयान पर माफी मांग ली है
जानिए क्या है पूरा मामला?
पटना के गर्दनीबाग में छात्र लगातार आंदोलन कर रहे हैं. छात्रों की दो मुख्य मांगें हैं, पहली, 70वीं BPSC परीक्षा में कथित पेपर लीक के आरोपों की जांच कर पूरी परीक्षा रद्द की जाए, और दूसरी, TRE-4 का विज्ञापन जारी कर परीक्षा को दो चरणों में कराने के प्रस्ताव का विरोध रोका जाए.
सोमवार को मीडियाकर्मियों ने जब BPSC के परीक्षा नियंत्रक राजेश कुमार सिंह से 70वीं BPSC परीक्षा में धांधली और पेपर लीक के आरोपों को लेकर सवाल किया, तो उन्होंने कहा कि अगर छात्रों के पास अपने आरोपों के पक्ष में कोई ठोस तथ्य हैं, तो वे कोर्ट जाने के लिए स्वतंत्र हैं.
मीडिया इसे काट दे...' और बोल दी अमर्यादित बात
जवाब देने के दौरान ही राजेश कुमार सिंह ने मीडियाकर्मियों से एक अजीब गुजारिश की. उन्होंने कैमरों के सामने कहा कि 'वह जो बात आगे कहने जा रहे हैं, उसे मीडिया काट दे'. इसके तुरंत बाद उन्होंने आंदोलन कर रहे छात्रों के संदर्भ में विवादित कहावत कह डाली- हाथी चले बाजार, कुत्ता भौंके हजार. आंदोलनकारी छात्रों की तुलना 'कुत्तों' से करने वाली इस अमर्यादित टिप्पणी का वीडियो तेजी से वायरल हो गया और छात्रों का गुस्सा भड़क उठा.
चौतरफा घिरने के बाद मांगी माफी
परीक्षा नियंत्रक का यह बयान ऐसे समय पर आया जब अभ्यर्थी कई दिनों से भीषण गर्मी और धूप में गर्दनीबाग में डटे हुए हैं. छात्रों और युवा संगठनों की ओर से तीखी प्रतिक्रिया आने के बाद राजेश कुमार सिंह ने अपनी गलती स्वीकार की और गलत कहावत का इस्तेमाल करने को लेकर सार्वजनिक रूप से माफी मांगी.
गर्दनीबाग में छात्रों की मांगें जारी
माफी मांगे जाने के बावजूद धरना स्थल पर छात्रों का प्रदर्शन रुकने का नाम नहीं ले रहा है. अभ्यर्थियों का साफ कहना है कि परीक्षा में अनियमितताएं हुई हैं, इसलिए 70वीं BPSC परीक्षा को रद्द कर सिरे से दोबारा आयोजित किया जाए. इसके साथ ही छात्र TRE-4 परीक्षा प्रक्रिया में किसी भी तरह के दो-स्तरीय बदलाव का कड़ा विरोध कर रहे हैं.