11 और 13 मई 1998 को पोखरण में भारत ने परमाणु परीक्षण किए थे. ये परीक्षण इसलिए अहम थे क्योंकि इसने पूरी दुनिया के सामने भारत की छवि को बदलकर रख दिया था. उस दिन दुनिया ने समझा कि भारत तेजी से उभरती ताकत है. और ये भी कि कोई सैटेलाइट उसके मंसूबों को भांप नहीं सकती.
क्यों खास है 13 मई
आज का दिन इसलिए खास है क्योंकि 1998 में भारत ने 13 मई को परमाणु परीक्षण का दूसरे राउंड किया. तमाम अंतरराष्ट्रीय दबावों के बावजूद तत्कालीन प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी ने दिखा दिया कि वे किसी से डरने वाले नहीं. हाल ही में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी अटल बिहारी के साहस की सराहना करते हुए कहा है, 'हालांकि परीक्षणों की पहली श्रृंखला के बाद विश्व समुदाय ने भारत पर प्रतिबंध लगाए थे. मगर 13 मई 1998 को अटल जी ने फिर परीक्षण किया. जिससे यह पता चलता है कि वह अलग मिजाज के व्यक्ति हैं. अगर हमारे पास एक कमजोर प्रधानमंत्री होता तो वह उसी दिन डर गया होता. लेकिन अटल जी अलग ही व्यक्ति हैं वह डरे नहीं'.
अमेरिका का था दबाव
राजस्थान के जैसलमेर स्थित पोखरण की जमीन दूसरी बार 13 मई को गवाह बनी कि भारत को कम आंकने वाले दरअसल धोखे में हैं. 11 मई के बाद अंतरराष्ट्रीय बिरादरी ने हमारे देश की काफी निंदा की थी. इसके बाद माना जा रहा था कि भारत अब परमाणु परीक्षण नहीं करेगा. पर एक दिन बाद ही फिर परमाणु परीक्षण किए गए और इसकी पूरी दुनिया गवाह बनी.
स्पाई सैटेलाइट्स से बचकर की गई थी तैयारी
इस दिन जबर्दस्त परमाणु परीक्षण कर भारत ने दुनिया को चौंकाया, सबसे अधिक हैरत तो अमेरिका को थी. इसका कारण था उसके वो स्पाई सैटेलाइट, जो दिन-रात भारत की गतिविधियों पर नजर रख रहे थे. मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, उस समय भारत में घट रही पल-पल की रिपोर्ट अमेरिका के खुफिया विभागों को मिला करती थी.
बता दें कि इससे पहले 18 मई 1974 को पहला परमाणु परीक्षण किया गया था.