ईरान और मध्य-पूर्व के मोर्चे पर अमेरिकी सेना की हालिया हलचल ने पूरी दुनिया को हिला कर रख दिया है. लेकिन एक अमेरिकी सैनिक को युद्ध के मैदान में भेजने से पहले जिस 'भट्टी' में तपाया जाता है, वह किसी आम इंसान के बस की बात नहीं है. आइए जानते हैं क्या है दुनिया की सबसे ताकतवर सेना के 'पावरफुल' होने की असली वजह.
दुनिया की सबसे 'टफ' ट्रेनिंग
अमेरिकी सेना की शुरुआती ट्रेनिंग, जिसे 'बेसिक कॉम्बैट ट्रेनिंग' (BCT) कहा जाता है, करीब 10 हफ्तों की होती है. इसमें मेंटल टॉर्चर और फिजिकल स्ट्रेंथ की ट्रेनिंंग दी जाती है. सैनिकों को 15-20 किलो के वजन के साथ मीलों दौड़ना, कीचड़ और कटीले तारों के बीच से गुजरना और बिना सोए घंटों ऑपरेशन करना सिखाया जाता है.
द क्रूसिबल यानी मरीन कॉर्प्स में 54 घंटे का एक ऐसा टेस्ट होता है जिसमें सैनिकों को बहुत कम नींद और खाने के साथ लगातार युद्ध जैसी परिस्थितियों का सामना करना पड़ता है.
भर्ती के नियम: आसान नहीं है 'वर्दी' पाना
नागरिकता: आवेदक का अमेरिकी नागरिक होना या ग्रीन कार्ड होल्डर (परमानेंट) होना अनिवार्य है.
उम्र: 17 से 35 वर्ष के बीच.
शिक्षा: हाई स्कूल डिप्लोमा या समकक्ष.
ASVAB टेस्ट: यह एक योग्यता परीक्षा है जो तय करती है कि आप सेना में किस पद (मैकेनिक, आईटी, या फ्रंटलाइन सोल्जर) के लिए फिट हैं.
मेडिकल और बैकग्राउंड चेक: ड्रग्स का सेवन या कोई भी पुराना आपराधिक रिकॉर्ड होने पर तुरंत रिजेक्ट कर दिया जाता है.
सैलरी और पर्क
US Army में सैलरी 'रैंक' और 'अनुभव' के आधार पर तय होती है. इसमें शुरुआती सैलरी यानी एक नए सैनिक (प्राइवेट) की बेसिक सैलरी लगभग $24,000 से $30,000 (करीब 20-25 लाख रुपये) सालाना से शुरू होती है.
इसके अलावा अलाउंस: रहने का खर्च (BAH), खाने का खर्च (BAS) और 'हार्डशिप पे' (युद्ध क्षेत्र में तैनाती पर अतिरिक्त पैसा) मिलाकर यह राशि दोगुनी हो जाती है. अगर पर्क की बात करें तो मुफ्त स्वास्थ्य सेवा, टैक्स-फ्री शॉपिंग (Commissary) और सबसे खास है GI बिल, जिसके तहत सेना आपकी आगे की पूरी कॉलेज पढ़ाई का खर्च उठाती है.
क्यों है यह 'नंबर-1'?
बजट का बादशाह: अमेरिका अपने डिफेंस पर करीब $850 बिलियन खर्च करता है, जो उसके बाद आने वाले 9-10 देशों के कुल बजट से भी ज्यादा है. दुनिया के लगभग हर महाद्वीप में अमेरिका के सैन्य ठिकाने हैं, जिससे वह चंद घंटों में कहीं भी हमला कर सकता है.