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64 साल की उम्र में करोड़पति बना इंटर्न, Gen Z के स्टार्टअप में बिना सैलरी कर रहा काम, जानें क्या है वजह?  

ओटिस डिसूजा हॉबी ट्राइब में अब एक तरह से इन-हाउस मेंटर के रोल में नजर आ रहे हैं. वह कभी कर्मचारियों की निजी और पेशेवर परेशानियां सुनते हैं, तो कभी को-फाउंडर जोशुआ सैलिंस को लीडरशिप, टीम के बीच तालमेल और नए स्टार्टअप को आगे बढ़ाने से जुड़ी चुनौतियों पर सलाह देते हैं.

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64 साल की उम्र में इंटर्न बना शख्स.
64 साल की उम्र में इंटर्न बना शख्स.

आमतौर पर लोग जिंदगीभर नौकरी और कारोबार करने के बाद रिटायरमेंट का इंतजार करने लगते हैं. वह सोचते हैं कि एक उम्र के बाद काम की भागदौड़ से छुट्टी मिलेगी और आराम से जिंदगी गुजरेगी. लेकिन मुंबई के 64 साल के ओटिस डिसूजा की कहानी इन धारणाओं से अलग है.

करोड़ों रुपये कमाने और अपना कारोबार बेचने के बाद भी उनका मन घर पर नहीं लगा. अब वह एक Gen Z उद्यमी के स्टार्टअप में बिना किसी सैलरी के इंटर्न बनकर काम कर रहे हैं. दिलचस्प बात यह है कि यहां न तो उनके लिए कोई तय टाइमिंग है और न ही काम का प्रेशर. तो सवाल यह है कि उन्हें क्यों इंटर्नशिप पर रखा गया है. चलिए जानते हैं उनकी कहानी. 

कारोबार बेचकर कमाए थे करीब 25 करोड़ रुपये

बता दें कि ओटिस डिसूजा ने साल 1999 में अपने माता-पिता के घर से Fountainhead Experience नाम की कंपनी शुरू की थी. यह कंपनी एक्सपीरियंस मार्केटिंग और इवेंट मैनेजमेंट के सेक्टर में काम करती थी. कई साल की मेहनत के बाद उन्होंने इसे एक बड़ी कंपनी के रूप में खड़ा किया.

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लेकिन साल 2015 में उन्होंने अपनी कंपनी Dentsu को बेच दी. इस सौदे से उन्हें करीब 25 करोड़ रुपये मिले थे. इसके बाद उनके पास आर्थिक रूप से किसी नौकरी या कारोबार पर निर्भर रहने की मजबूरी नहीं थी. लेकिन रिटायरमेंट के बाद उन्हें काम की कमी महसूस होने लगी. इस दौरान उन्हें लोगों से मिलना-जुलना और काम करना याद आने लगा. घर पर बैठना उन्हें पसंद नहीं आया और उन्होंने कुछ अलग करने का फैसला किया.  

26 साल के युवा के स्टार्टअप में बने इंटर्न

ओटिस डिसूजा की मुलाकात मुंबई के स्टार्टअप Hobby Tribe के को-फाउंडर जोशुआ सैलिन्स से एक परिचित के जरिए हुई. जोशुआ की उम्र उस समय 26 साल थी. दोनों की बातचीत शुरू हुई और जल्द ही उनके बीच अच्छी दोस्ती हो गई. इसके बाद जोशुआ ने ओटिस को अपने स्टार्टअप के ऑफिस आने का न्योता दिया. धीरे-धीरे यह मुलाकात एक अनोखे कामकाजी रिश्ते में बदलती गई. अब ओटिस इस स्टार्टअप में अनौपचारिक तौर पर इंटर्न के रूप में काम कर रहे हैं. 

खास बात यह है कि उनके पास न कोई अपॉइंटमेंट लेटर है, न तय सैलरी और न ही ऑफिस टाइम पर पहुंचने की टेंशन. वह अपनी सुविधा के हिसाब से ऑफिस आते हैं. कभी कर्मचारियों से बातचीत करते हैं, तो कभी सबके लिए कॉफी भी बना देते हैं.

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युवा फाउंडर को देते हैं बिजनेस की सलाह

Hobby Tribe में ओटिस सिर्फ इंटर्न नहीं बल्कि एक तरह से इन-हाउस मेंटर की भूमिका निभा रहे हैं. स्टार्टअप के को-फाउंडर जोशुआ सैलिन्स उनसे टीम संभालने, कर्मचारियों के साथ तालमेल बनाने और कारोबार को आगे बढ़ाने से जुड़े सवालों पर सलाह लेते हैं. जब स्टार्टअप में कर्मचारियों की संख्या 4 से बढ़कर करीब 10 हो गई, तो जोशुआ के सामने टीम को मैनेज करने की चुनौती आने लगी. ऐसे में ओटिस ने उन्हें सलाह दी कि हर काम खुद करने के बजाय जिम्मेदारियां बांटनी चाहिए और कंपनी में ऐसी व्यवस्था बनानी चाहिए, जिससे फाउंडर के मौजूद न होने पर भी काम चलता रहे.

ओटिस सीधे किसी को आदेश देने के बजाय अपने अनुभव और पुरानी गलतियों के किस्से साझा करते हैं. उनका मानना है कि इससे दूसरे लोग खुद सीखकर बेहतर फैसले ले सकते हैं.

रिटायरमेंट के बाद भी काम करने की चाह

जोशुआ ने जब ओटिस का ऑफिस में काम करते हुए वीडियो सोशल मीडिया पर शेयर किया, तो यह कहानी काफी चर्चा में आ गई. इसके बाद कई रिटायर्ड प्रोफेशनल्स और बुजुर्गों ने उनसे संपर्क किया. कुछ लोग कंसल्टिंग का काम करना चाहते थे, तो कुछ ऐसे मौके की तलाश कर रहे थे जहां वे अपने अनुभव का इस्तेमाल कर सकें और लोगों से जुड़े रह सकें.

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ओटिस का मानना है कि उम्र बढ़ने के साथ किसी व्यक्ति का अनुभव और योगदान खत्म नहीं हो जाता. भले ही वह युवा कर्मचारियों की तरह हर काम न कर पाएं, लेकिन जहां जरूरत हो, वहां अपनी समझ और अनुभव से मदद कर सकते हैं.

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