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7 की उम्र में वेबसाइट, 16 में सैटेलाइट और अब 20 की उम्र में रेज किए 4.3 मिलियन डॉलर का फंड, कौन हैं ओंकार सिंह बत्रा? 

जम्मू के ओंकार सिंह बत्रा इस समय अपनी उपलब्धियों को लेकर चर्चा में हैं. उन्होंने केवल 7 साल की उम्र में वेबसाइट बना दिया था और अब उन्होंने 20 साल की उम्र में एक और बड़ा कमाल कर दिया है. उन्होंने इस उम्र में 4.3 मिलियन डॉलर की फंडिंग हासिल की है.

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कौन हैं ओंकार सिंह बत्रा जिन्होंने रेज किए 4.3 मिलियन डॉलर फंड?
कौन हैं ओंकार सिंह बत्रा जिन्होंने रेज किए 4.3 मिलियन डॉलर फंड?

आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के दौर में जहां हर दिन नई चुनौतियां सामने आ रही हैं, वहीं युवा पीढ़ी इन चुनौतियों का समाधान खोजने और कुछ नया बनाने में जुट गया है. आज छोटी उम्र के बच्चे भी कोडिंग सीख रहे हैं, AI मॉडल हमारी रोजमर्रा की जिंदगी का हिस्सा बन रहे हैं और स्कूलों की छोटी-छोटी लैब में रोबोटिक्स पर नए प्रयोग किए जा रहे हैं. वहीं कुछ युवा देश के लिए अपना सैटेलाइट बनाने का सपना लेकर आगे बढ़ रहे हैं. ऐसी  ही एक कहानी सामने आई है जम्मू के रहने वाले ओंकार सिंह बत्रा की. इनकी सफलता ने कई युवाओं को प्रेरित कर दिया है. 7 साल की उम्र में वेबसाइट डिजाइन कर हर किसी को हैरान कर दिया था. इसके बाद 16 साल की उम्र में सैटेलाइट बनाई और 19 की उम्र तक आते-आते वह सिलिकॉन वैली पहुंच गए और एक स्पेस-टेक स्टार्टअप के लिए 4.3 मिलियन डॉलर जुटाए.

क्या करता है उनका स्टार्टअप? 

बता दें कि ओंकार सिंह बत्रा का यह स्टार्टअप सैटेलाइट कम्यूनिकेशन की एक पुरानी परेशानी को सॉल्व करने की कोशिश कर रहा था. उस समय सैटेलाइट को कनेक्टेड रखना, जब वह ग्राउंड स्टेशन की लाइन ऑफ साइट से बाहर चला जाए. आज 20 साल की उम्र में वह स्पेस में सैटेलाइट के लिए एक कंटीन्यूअस कम्युनिकेशन लेयर विकसित कर रहे हैं. 

7 साल में बना दी थी वेबसाइट

बत्रा ने केवल सात साल की उम्र में पहली वेबसाइट बना दी थी. इसके साथ ही उन्होंने 12 साल की उम्र में एक किताब भी लिखी. 13 साल की उम्र में खुद की कंपनी शुरू की और जब वह 16 साल के हुए तो, उन्होंने InQube बनाया, जिसे भारत का पहला ओपन-सोर्स सैटेलाइट कहा जाता है.

20 की उम्र में बन गए CEO

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19 साल की उम्र तक, वह सिलिकॉन वैली चले गए थे और एक स्पेस-टेक स्टार्टअप के लिए 4.3 मिलियन डॉलर जुटाए थे, जब सैटेलाइट ग्राउंड स्टेशनों की पहुंच से बाहर हो जाएं, तब भी उन्हें जुड़े रखने का काम करता था. 

कौन सी लिखी किताब? 

12 साल की उम्र में ओंकार सिंह बत्रा ने व्हेन द टाइम स्टॉप्स नाम से 49 पन्नों की एक किताब लिखी. उनके LinkedIn प्रोफाइल के मुताबिक, इस रचना में उन्होंने अल्बर्ट आइंस्टीन के समय फैलाव के सिद्धांत को चुनौती दी थी. बाद में उन्हें दुनिया के सबसे युवा सैद्धांतिक लेखक के रूप में मान्यता मिली. इसके बाद तकनीक उनके लिए सिर्फ शौक नहीं रही, बल्कि वह इसे अपने काम का हिस्सा बनाने लगे. 2018 में उन्होंने बत्रा टेक्नोलॉजीज की शुरुआत की और इसके बाद 2019 में यूनाइटेड इंडिया पब्लिशिंग की स्थापना की. 

स्पेस क्षेत्र में कैसा रहा सफर? 

जम्मू में स्कूल की पढ़ाई के दौरान ही ओंकार सिंह बत्रा ने पैराडॉक्स सोनिक स्पेस रिसर्च एजेंसी के तहत एक छोटे सैटेलाइट सिस्टम इनक्यूब पर काम शुरू कर दिया था. इसे भारत का पहला ओपन-सोर्स सैटेलाइट बताया गया था. यह करीब एक किलोग्राम वजन वाले 1U क्यूबसैट प्लेटफॉर्म पर आधारित था.  इसका उद्देश्य यह जांचना था कि छोटा सैटेलाइट अंतरिक्ष में काम कर सकता है या नहीं और अंतरिक्ष से तापमान से जुड़ा डेटा इकट्ठा किया जा सकता है. 

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लेकिन इनक्यूब पर काम करते हुए बत्रा को एक बड़ी समस्या का पता चला. पृथ्वी की निचली कक्षा में घूमने वाला सैटेलाइट हर समय ग्राउंड स्टेशन से संपर्क में नहीं रह सकता, जब वह ग्राउंड स्टेशन की पहुंच से बाहर चला जाता है, तो कुछ समय के लिए उसका संचार रुक जाता है. 

दिलचस्प बात यह है कि 2023 में स्कूल की पढ़ाई पूरी करने से पहले ही बत्रा इंजीनियरिंग के छात्रों को पढ़ाने लगे थे. उनका स्कूली जीवन सामान्य छात्रों से काफी अलग रहा. अंतरिक्ष से जुड़ी परियोजनाओं पर काम करने के साथ-साथ वह आईआईटी जम्मू से भी जुड़े रहे. उनकी LinkedIn प्रोफाइल के अनुसार, उन्होंने आईआईटी जम्मू के सैटेलाइट डेवलपमेंट प्रोग्राम में अतिथि प्रोजेक्ट सूत्रधार और समन्वयक के तौर पर काम किया.

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