एक सफल करियर बनाने के लिए कड़ी मेहनत लगती है. लेकिन जरा सोचिए किसी दो करियर पर काम किया और दोनों में ही सफलता हासिल की वो भी 40 की उम्र में. ये सुनने में बहुत हैरान कर देने वाला है लेकिन सच है. पर एक करियर सेटल होने के बाद लोग उसे छोड़ने के बारे में नहीं सोच सकते हैं लेकिन जान्हवी अजीत राव ने इस सोच को बदल दी. टेक इंडस्ट्री में 18 साल बिताने के बाद उन्होंने मेडिकल कॉलेज में एडमिशन लिया. अपनी इंजीनियरिंग करियर को छोड़कर उन्होंने दोबारा से MBBS की पढ़ाई के साथ अपना करियर शुरू किया. अब उनकी ये कहानी सोशल मीडिया पर वायरल हो रही है और लोग उनके इस फैसले की सराहना कर रहे हैं.
टेक से मेडिकल तक का सपर
जान्हवी अजीत राव का जन्म महाराष्ट्र के औरंगाबाद में हुआ था. उन्होंने सैन डिएगो में स्थित यूनिवर्सिटी ऑफ कैलिफोर्निया से बैचलर ऑफ इलेक्ट्रॉनिक्स की डिग्री हासिल की. फिर सैंटा बारबरा (Santa Barbara) यूनिवर्सिटी ऑफ कैलिफोर्निया से मास्टर्स किया. इसके बाद वह बतौर सॉफ्टवेयर इंजीनियर वहां पर काम करने लगी. इसके बाद वह अपने पति के साथ बेंगलुरु में शिफ्ट हो गईं. भारत वापस आने के बाद उन्होंने कई टॉप कंपनियों में काम किया.
2003 में बदली करियर की दिशा
जब जान्हवी का करियर सातवें आसमान पर था, तब उन्हें साल 2003 में Rheumatoid Arthritis नाम की ऑटोइम्यून बीमारी का पता चला. उस दौरान उन्होंने देखा कि डॉक्टर किस तरह मरीजों की जिंदगी बदलते हैं . डॉक्टरोम का भाव जान्हवी को इतना पसंद आया कि उन्होंने इंजीनियरिंग छोड़कर मेडिकल के फील्ड में जाने का विचार किया.
40 साल की उम्र में की मेडिकल की पढ़ाई
साल 2013 में 40 साल की उम्र में जान्हवी ने मेडिकल कॉलेज में एडमिशन लिया. करीब 18 साल किसी और फील्ड में करियर बनाने के बाद उनके लिए ये बिल्कुल आसान नहीं रहा होगा. लेकिन पूरे 8 साल की कड़ी मेहनत के बाद उन्होंने MBBS की डिग्री हासिल की.
अब अमेरिका में कर रही प्रैक्टिस
इसे लेकर सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर उनकी कहानी शेयर की गई है. अब 47 साल की उम्र में जान्हवी न सिर्फ एमडी की पढ़ाई पूरी कर रही हैं, बल्कि यूएसए में प्राइमरी केयर फिजिशियन के रूप में मरीजों का इलाज भी कर रही हैं.