आज के दौर में अक्सर लोग एक बार अच्छी नौकरी मिलने या पढ़ाई पूरी होने के बाद अपनी कम्फर्ट जोन में आ जाते हैं. लेकिन क्या आपने कभी ऐसे शख्स के बारे में सुना है जिसके पास दो-दो मास्टर डिग्री हो, पीएचडी की उपाधि हो, दुनिया की दिग्गज टेक कंपनी इंटेल में बड़ी नौकरी हो, और फिर भी वह 41 साल की उम्र में दोबारा कॉलेज की बेंच पर बैठकर पढ़ाई कर रहा हो?
जी हां, हम बात कर रहे हैं मिहिरकांत उपाध्याय की, जिनकी यह कहानी आज के युवाओं और प्रोफेशनल्स के लिए एक बड़ी मिसाल है. 'बिजनेस इन्साइडर' की रिपोर्ट के मुताबिक, इंटेल में ग्लोबल सप्लाई चेन टेक्निकल प्रोग्राम मैनेजर के तौर पर काम करने वाले 41 वर्षीय मिहिरकांत ने सितंबर 2025 में यूनिवर्सिटी ऑफ वाशिंगटन से दो साल का हाइब्रिड एमबीए कोर्स ज्वॉइन किया है. अपनी फुल-टाइम नौकरी के साथ वे यह पढ़ाई कर रहे हैं.
कंप्यूटर इंजीनियरिंग से लेकर PhD तक का सफर
मिहिरकांत की एजुकेशनल जर्नी बेहद शानदार रही है. उन्होंने साल 2007 में भारतीय विद्यापीठ से कंप्यूटर इंजीनियरिंग में ग्रेजुएशन किया था. इसके बाद उनका रुझान फिजिक्स और नैनोसाइंस की तरफ बढ़ा. साल 2008 में यूनिवर्सिटी ऑफ रोचेस्टर से फिजिक्स में एम.एस. (MS) किया. साल 2010 में यूनिवर्सिटी एट अल्बानी से नैनोसाइंस और इंजीनियरिंग में दूसरी मास्टर डिग्री ली.
इसके बाद साल 2014 में उन्होंने इसी यूनिवर्सिटी से मैटेरियल्स साइंस में अपनी PhD (डॉक्टरेट) पूरी की. उनकी डॉक्टरेट रिसर्च एक्सट्रीम अल्ट्रावायलेट (EUV) लिथोग्राफी में मास्क डिफेक्ट सिमुलेशन पर केंद्रित थी, जो आज के समय में एडवांस्ड सेमीकंडक्टर चिप्स बनाने के लिए बेहद जरूरी तकनीक है.
जब PhD भी कम पड़ने लगी
अप्रैल 2015 में मिहिरकांत ने इंटेल (Intel) में बतौर ड्राई एetch प्रोसेस टेक्नोलॉजी डेवलपमेंट इंजीनियर अपना करियर शुरू किया. पांच साल तक इस भूमिका में रहने के बाद, अगस्त 2022 तक वे प्रमोट होकर ग्लोबल सप्लाई चेन टेक्निकल प्रोग्राम मैनेजमेंट की जिम्मेदारी संभालने लगे.
लेकिन जैसे ही उनका काम सिर्फ रिसर्च और डेवलपमेंट से हटकर मैनेजमेंट और बिजनेस की तरफ बढ़ा, उन्हें महसूस हुआ कि सिर्फ साइंस और इंजीनियरिंग की जानकारी काफी नहीं है. अब उन्हें बिजनेस के फैसले लेने थे, कॉन्ट्रैक्ट्स पर बातचीत करनी थी, एग्जीक्यूटिव लेवल पर कम्युनिकेट करना था और तकनीकी मामलों को आसान बिजनेस भाषा में समझाना था. यहीं से उन्हें लगा कि अपने करियर को आगे बढ़ाने के लिए उन्हें मैनेजमेंट की यानी एमबीए (MBA) की सख्त जरूरत है.
इंटेल कर रहा है पढ़ाई का आधा खर्च
मिहिरकांत यूनिवर्सिटी ऑफ वाशिंगटन से लॉजिस्टिक्स, मैटेरियल्स और सप्लाई चेन मैनेजमेंट में एमबीए कर रहे हैं. उनका यह कोर्स सितंबर 2025 से जून 2027 तक चलेगा, जिसमें हफ्ते में तीन दिन ऑनलाइन क्लास और हर तिमाही में एक हफ्ते की इन-पर्सन क्लासेज होती हैं. राहत की बात यह है कि इंटेल कंपनी इस प्रोग्राम की भारी-भरकम फीस (जो करीब 1,00,000 डॉलर यानी लगभग 95 लाख रुपये तक हो सकती है) का एक हिस्सा खुद उठा रही है.
AI के दौर में क्यों जरूरी है सीखना?
मिहिरकांत के इस फैसले के पीछे आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) का बढ़ता प्रभाव भी एक बड़ी वजह है. उनका मानना है कि जैसे-जैसे एआई रूटीन और एनालिटिकल कामों को अपने हाथ में ले रहा है, इंसानों को ऐसी स्किल्स पर काम करना चाहिए जो एआई के साथ तालमेल बिठा सकें. इंटेल में काम करते हुए उन्होंने देखा कि एआई कस्टम मशीनरी को ठीक करने में संघर्ष करता है, जिसके लिए इंसानी अनुभव और सूझबूझ की जरूरत होती है.
मिहिरकांत उपाध्याय की यह कहानी हमें सिखाती है कि डिग्रियां भले ही आपके लिए दरवाजे खोलती हैं, लेकिन असली सफलता इस बात पर निर्भर करती है कि आप बदलते समय और जिम्मेदारियों के साथ खुद को कितना अपडेट रखते हैं. एआई की इस रेस में रुक जाना यानी पीछे छूट जाना है और मिहिरकांत ने लगातार सीखते रहने का रास्ता चुनकर यह साबित कर दिया है कि सीखने की कोई उम्र नहीं होती!