सरकारी बैंक में नौकरी मिलना लाखों युवाओं का सपना होता है. मेहनत के बाद जब नियुक्ति पत्र हाथ में आता है तो खुशी के साथ मन में कई सवाल भी उठते हैं. पहली पोस्टिंग कहां होगी? घर से कितनी दूर जाना पड़ेगा? परिवार से दूर रहना होगा या कुछ साल बाद अपने शहर लौटने का मौका मिलेगा? नौकरी शुरू होने के साथ ही युवाओं के मन में ट्रांसफर को लेकर भी उम्मीदें और सवाल बनने लगते हैं. आखिर बैंक में कितने साल काम करने के बाद ट्रांसफर मिलता है? क्या हर कर्मचारी को ट्रांसफर का मौका मिलता है और क्या इसके लिए कोई तय नियम है? आइए जानते हैं सरकारी बैंकों में ट्रांसफर को लेकर क्या व्यवस्था है.
कई बैंकों में 3 साल की अवधि अहम
यूनियन बैंक ऑफ इंडिया की अधिकारियों के लिए ट्रांसफर पॉलिसी में सीधे भर्ती किए गए स्केल-I से स्केल-III अधिकारियों के लिए शुरुआती जोन में तीन साल काम करने के बाद जोन से बाहर ट्रांसफर के लिए पात्रता का प्रावधान है. हालांकि, तीन साल का समय पूरा होना का मतलब यह बिल्कुल नहीं होता है कि कर्मचारी का ट्रांसफर उसी दिन अपने आप हो जाएगा. तीन साल की अवधि पूरी होने के बाद कर्मचारी ट्रांसफर प्रक्रिया के लिए पात्र हो सकता है. अंतिम फैसला बैंक की ट्रांसफर पॉलिसी, रिक्तियों और प्रशासनिक जरूरतों के आधार पर लिया जाता है.
केनरा बैंक में भी 3 साल का प्रावधान
केनरा बैंक की अधिकारियों के लिए जारी ट्रांसफर पॉलिसी में भी तीन साल की सेवा को महत्वपूर्ण माना गया है. स्केल-I, II और III अधिकारियों के लिए इंटर-सर्किल ट्रांसफर की प्रक्रिया में सर्किल में तीन साल की सेवा पूरी करने वाले अधिकारियों से संबंधित प्रावधान दिए गए हैं. इसका मतलब यह है कि बैंकिंग नौकरी में ट्रांसफर की कोई एक निश्चित अवधि सभी कर्मचारियों पर लागू नहीं होती. अलग-अलग बैंकों की नीतियों में पात्रता और ट्रांसफर की प्रक्रिया अलग हो सकती है.
RRB में अधिकारियों और कर्मचारियों के लिए अलग नियम
Regional Rural Banks यानी RRBs में ट्रांसफर को लेकर केंद्र सरकार के दिशानिर्देश अलग हैं. संशोधित ट्रांसफर पॉलिसी के तहत RRB में अधिकारियों के लिए तीन साल और Office Assistants तथा Attendants के लिए पांच साल की अवधि को ध्यान में रखा गया है. इन दिशानिर्देशों में यह भी साफ किया गया है कि ट्रांसफर प्रशासनिक जरूरतों के अधीन होंगे यानी निर्धारित अवधि पूरी होने के बाद भी ट्रांसफर का फैसला संबंधित नियमों और बैंक की जरूरत के अनुसार किया जाता है.
हर सरकारी बैंक में एक जैसा नियम नहीं
सरकारी बैंकों में ट्रांसफर की व्यवस्था को समझने के लिए यह बात महत्वपूर्ण है कि तीन साल को सभी सरकारी बैंक कर्मचारियों के लिए अनिवार्य ट्रांसफर की अवधि नहीं माना जा सकता. कहीं यह ट्रांसफर के लिए पात्रता से जुड़ा प्रावधान हो सकता है तो कहीं अलग अवधि या अलग शर्तें लागू हो सकती हैं. इसलिए बैंक की नौकरी ज्वाइन करने वाले उम्मीदवारों को अपने बैंक की सबसे नई ट्रांसफर पॉलिसी जरूर देखनी चाहिए. ट्रांसफर का फैसला कर्मचारी के पद, सेवा अवधि, जोन या सर्किल, रिक्तियों और बैंक की प्रशासनिक जरूरतों जैसे चीजों को ध्यान में रखकर लिया जाता है.
क्या तीन साल बाद घर के पास पोस्टिंग मिल जाती है?
तीन साल की सेवा पूरी होने का यह मतलब भी नहीं है कि कर्मचारी को अपनी पसंद की जगह या गृह जिले में पोस्टिंग मिलना तय है. ट्रांसफर के लिए पात्रता और मनचाही जगह पर पोस्टिंग, दोनों अलग-अलग बातें हैं. बैंक की उपलब्ध रिक्तियों और लागू ट्रांसफर नीति के आधार पर ही पोस्टिंग तय की जाती है. इसलिए सरकारी बैंक में नौकरी की तैयारी कर रहे उम्मीदवारों के लिए ट्रांसफर पॉलिसी को समझना उतना ही जरूरी है जितना सैलरी, प्रमोशन और अन्य सेवा शर्तों को समझना.