क्या कॉर्पोरेट इंडिया में 45 की उम्र पार करते ही नौकरी की गारंटी खत्म हो जाती है? सितंबर 2026 में Oracle और Adidas जैसी बहुराष्ट्रीय कंपनियों में हुई बड़ी छंटनी ने इंडिया के कॉर्पोरेट सेक्टर के मिड-करियर और सीनियर प्रोफेशनल्स के बीच एक अनजाना खौफ पैदा कर दिया है.
वर्क-एक्सपीरियंस और सीनियोरिटी कभी जॉब सिक्योरिटी की ढाल हुआ करती थी, आज वही भारी भरकम सैलरी पैकेजेस और पुराना स्किल-सेट कंपनियों में रीस्ट्रक्चरिंग के नाम पर पहला शिकार बन रहे हैं. आखिर कॉर्पोरेट इंडिया में यह स्थिति क्यों बन रही है, डेटा क्या कहता है, और इस मिड-करियर संकट से बचने के लिए प्रोफेशनल्स को क्या चेंज लाने होंगे? समझिए
क्यों निशाने पर हैं 40 से ज्यादा उम्र के प्रोफेशनल्स?
टेक-इंडस्ट्री की वैश्विक छंटनी को ट्रैक करने वाले प्लेटफॉर्म Layoffs.fyi और बिजनेस इनसाइडर की रिपोर्ट्स इस खतरे की स्पष्ट तस्वीर पेश करती हैं. सिर्फ सितंबर 2026 तक दुनिया भर में 1,28,000 से अधिक टेक कर्मचारियों की नौकरी जा चुकी है, जो 2025 के कुल आंकड़े को भी पार कर चुका है.
कॉर्पोरेट रिसर्च के अनुसार, 2019 में जहां कुल छंटनी में मिड-मैनेजमेंट की हिस्सेदारी 20% थी, वहीं 2025-26 तक बढ़कर यह 32% से अधिक हो चुकी है. कंपनियों की प्राथमिकता अब 'फ्लैटर ऑर्गेनाइजेशन' बनाने की है, जिससे बीच की मिडिल लेयर्स हटाई जा रही हैं. एआई के बाद ये ट्रेंड खौफनाक तरीके से सामने आया है.
40 से अधिक उम्र वालों की छंटनी
हाल ही में Oracle के क्लाउड इंफ्रास्ट्रक्चर यूनिट से निकाले गए 546 कर्मचारियों के डेटा विश्लेषण से सामने आया कि इनमें से बहुसंख्यक कर्मचारी 40 वर्ष से अधिक उम्र के थे, और लगभग 16% मिड एज कर्मचारी थे.
क्यों बदल रहा है जॉब मार्केट?
इसके पीछे सबसे बड़ी वजह AI और ऑटोमेशन का आक्रामक इस्तेमाल बताया जा रहा है. कंपनियां अब कोडिंग, टेस्टिंग, प्रोजेक्ट ट्रैकिंग और रिपोर्टिंग जैसे कामों के लिए अनुभवी प्रोफेशनल्स से ज्यादा जनरेटिव एआई (GenAI) और एजेंटिक एआई टूल्स का सहारा ले रही हैं. पहले जो काम 10 लोगों की टीम करती थी, अब वह काम एआई टूल्स के साथ 3 से 4 लोग मिलकर पूरा कर पा रहे हैं.
दूसरा कारण ये है कि संस्थानों में 15 से 20 साल के अनुभव वाले 45+ उम्र के प्रोफेशनल्स की सैलरी ज्यादा होती है. यदि वे खुद को एआई और आधुनिक वर्कफ्लो के अनुसार अपडेट नहीं कर पाते, तो कंपनियां कॉस्ट-कटिंग के नाम पर उनके पदों को खत्म कर रही हैं.
वैसे भी अब सिर्फ यह मायने नहीं रखता कि आपने बीते 15 वर्षों में क्या किया है, बल्कि यह मायने रखता है कि आप AI के माहौल में कितना तेजी से आउटपुट दे सकते हैं. अब जब इंसान की तुलना एआई से होगी तो जाहिर है कि उसमें इंसान को खुद में एआई से अलग क्षमताएं विकसित करनी ही होंगी.
45 की उम्र में सेफ रहने के लिए क्या करें?
यदि आप 35 से 45 वर्ष की आयु वर्ग में हैं, तो इस संकट से बचने और अपने करियर को 'लेऑफ-प्रूफ' बनाने के लिए कुछ बदलाव बहुत जरूरी हैं.
इसमें पहला बदलाव ये लाना होगा कि आप अपने डोमेन के साथ 'AI टूल्स' में महारत हासिल करे. केवल सामान्य मैनेजमेंट पर निर्भर रहने के बजाय MLOps, AI इन्फ्रास्ट्रक्चर मैनेजमेंट, क्लाउड आर्किटेक्चर और डाटा एनालिटिक्स जैसे आधुनिक टूल्स और सर्टिफिकेशन्स पर काम करें. आप एआई से मुकाबला करने के बजाय यह सीखें कि अपनी टीम की उत्पादकता बढ़ाने के लिए एआई टूल्स का उपयोग कैसे करें.
'सिंगल इनकम' के भरोसे रहने की भूल न करें
अपने 15-20 साल के अनुभव को किसी एक कंपनी तक सीमित न रखकर कंसल्टेंसी या फ्रीलांस एडवायजरी में बदलें. गिग-इकोनॉमी या एडवाइजरी रोल से आय का दूसरा जरिया बनाना शुरू करें. 40 की उम्र में प्रवेश करते ही कम से कम 6 से 12 महीने का इमरजेंसी फंड तैयार रखें. बच्चों की पढ़ाई, होम लोन की ईएमआई (EMI) और नियमित खर्चों को ध्यान में रखते हुए आक्रामक बचत और विविधीकृत निवेश करें ताकि जबरन रिटायरमेंट की स्थिति में वित्तीय दबाव न आए.