क्या आप भी वहीं कर्मचारी हैं जिसको देखते ही काम याद आ जाता है तो, ये भरोसा आपको एक ताकत जैसा लगता है लेकिन अंकुर वारिकू का कहना कुछ और ही है. उनका कहना है कि यही भरोसा कर्मचारियों के लिए कई बार नुकसान भी साबित हो सकती है. इसके बाद से आपको केवल काम ही मिलता है न कि तरक्की.
उद्यमी और करियर सलाहकार अंकुर वारिकू ने लिंक्डइन पर एक पोस्ट में ऑफिस से जुड़ी कुछ ऐसी बातें शेयर की हैं, जिसे कर्मचारी अच्छा तो समझते लेकिन ये आपके करियर की ग्रोथ को स्लो कर सकती है. उन्होंने ऐसी पांच बातें गिनाईं, जो कई बार अच्छे कर्मचारियों के लिए परेशानी बन जाती है.
इनमें अच्छा काम करने वालों पर ज्यादा काम डालना, बेहतर प्रदर्शन करने वालों को कम फीडबैक मिलना, नए और जोखिम वाले आइडिया का विरोध, ऑफिस की पॉलिटिक्स और अपनी मांग खुलकर रखने वालों को ज्यादा महत्व मिलना शामिल है. कहीं आप भी तो इस तरह की परेशानी या बिहेवियर का सामना नहीं कर रहे हैं.
करते हैं अच्छा काम तो काम ही मिलता है
ऑफिस में एक ऐसा कर्मचारी करीब हर टीम में होता है, जिसके पास हर कोई एक काम के साथ ही जाते हैं कि और कहते हैं यह काम जरा देख लेना. एक काम के बाद दूसरा और दूसरे बाद तीसरा काम कर्मचारी के पास पहुंचने लगता है. वजह केवल एक होती है और वह ये कि उसके मैनेजर को भरोसा होता है कि वह ये काम कर लेगा. लेकिन इसपर अंकुर वारिकू का कहना है कि अगर आप अपने काम में अच्छे हैं तो आपके पास लगातार ज्यादा काम आता रहेगा यानी कई बार आपकी क्षमता ही आपके ऊपर अतिरिक्त जिम्मेदारियां डालने की वजह बन जाती है.
हालांकि, एचआर विशेषज्ञों का कहना है कि समस्या भरोसेमंद होने में नहीं है. असली दिक्कत तब होती है जब कर्मचारी की मेहनत को जिम्मेदारी मान लिया जाता है.
फीडबैक भी है जरूरी
अंकुर ने दूसरी परेशानी फीडबैक से जुड़ी बताया. उन्होंने अपने अनुभव का जिक्र करते हुए बताया कि जब उन्होंने बॉस से फीडबैक मांगा तो जवाब मिला- आप अच्छा कर रहे हैं. वैसे ये जवाब सुनने में अच्छा लगता है, लेकिन इससे कर्मचारी को यह पता नहीं चलता कि वह आगे क्या बेहतर कर सकता है.
यानी सिर्फ यह कहना कि काम अच्छा है काफी नहीं होता है. कर्मचारी को यह भी पता होना चाहिए कि उसकी ताकत क्या है, कहां सुधार की जरूरत है और अगला स्तर हासिल करने के लिए उसे क्या करना चाहिए?
केवल मेहनत नहीं ... काम दिखाना भी है जरूरी
ऑफिस में चुपचाप अच्छा काम करते रहना और अपने काम का असर दिखाना दो अलग चीजें हैं. लेकिन वारिकू के मुताबिक, कई संगठन ऐसे आइडिया को आसानी से स्वीकार नहीं करते जिनमें जोखिम ज्यादा हो. वहीं, जो कर्मचारी अपनी जरूरतों और मांगों को खुलकर सामने रखते हैं, वे कई बार ज्यादा नजर आते हैं. एचआर और रिक्रूटमेंट कंपनी InCruiter के सह-संस्थापक और सीईओ अनिल अग्रवाल ने भी कहा कि भरोसेमंद होना करियर के लिए नुकसान नहीं है, लेकिन भरोसेमंद होने के साथ अपने काम को सामने रखना भी जरूरी है. उनके मुताबिक, कर्मचारी को अपने काम का रिकॉर्ड रखना चाहिए, अपने योगदान को आंकड़ों के साथ दिखाना चाहिए और जिस चीज के वह हकदार हैं, उसके लिए बात करनी चाहिए.
ज्यादा काम मिल रहा है तो हमेशा खुश होने की जरूरत नहीं
कई कर्मचारियों को लगता है कि बॉस अगर उन्हें बार-बार काम दे रहा है तो इसका मतलब है कि वह उन पर भरोसा करता है. हालांकि, यह बात सही भी हो सकती है लेकिन सिर्फ ज्यादा जिम्मेदारी मिलना हमेशा करियर ग्रोथ का संकेत नहीं होता. अगर ज्यादा काम के साथ सैलरी, पद, प्रमोशन, पहचान या नए अवसर नहीं मिल रहे हैं तो कर्मचारी को अपनी स्थिति पर बात करनी चाहिए. एचआर विशेषज्ञ सृष्टि नरजरी के मुताबिक, अच्छा प्रदर्शन करने वाले कर्मचारियों को कई बार पहचान के बजाय ज्यादा जिम्मेदारी मिलती रहती है. ऐसे में कर्मचारी को कम भरोसेमंद बनने की जरूरत नहीं है, बल्कि अपने योगदान को सामने रखना और अपने लिए बात करना जरूरी है.