आजकल जॉब मार्केट बदल रहा है. नौकरी करने का पुराने तरीका तेजी से बदल रहा है और एआई अपने पैर पसार रहा है. ऐसे में कई युवा अब अपने करियर की शुरुआत एआई के साथ करना चाहते हैं. एआई स्टार्टअप में इंटर्नशिप पाना कई छात्रों और युवा पेशेवरों का सपना होता है. लेकिन एक संस्थापक के मुताबिक, आज कंपनियों के सामने सबसे बड़ी चुनौती सिर्फ ज्यादा आवेदन पाना नहीं बल्कि ऐसे उम्मीदवार चुनना है जो पूरी भर्ती प्रक्रिया को गंभीरता से पूरा करें. हाइपरफॉर्मर AI के सह-संस्थापक रमेश रविशंकर ने लिंक्डइन पर अपनी कंपनी की इंटर्नशिप से जुड़े आंकड़े शेयर किए हैं. उन्होंने बताया कि शुरुआत में बड़ी संख्या में आवेदन आए, लेकिन जैसे-जैसे चयन प्रक्रिया आगे बढ़ी उम्मीदवारों की संख्या तेजी से कम होती गई.
1,290 मिले थे आवेदन
बता दें कि कंपनी को शुरुआत में 1,290 इंटर्नशिप के आवेदन मिले थे. लेकिन रमेश रविशंकर के मुताबिक, 1,290 आवेदनों में से सिर्फ 83 उम्मीदवारों ने ऑनलाइन टेस्ट दिया. इनमें 23 उम्मीदवार टेस्ट पास कर सके, 10 इंटरव्यू तक पहुंचे, लेकिन अब तक कोई भी इंटरव्यू पास नहीं कर पाया है. उन्होंने आगे बताया कि इसके बाद भी कई उम्मीदवार बीच में ही बाहर हो गए. कुछ लोग टेस्ट पास करने के बाद इंटरव्यू में नहीं पहुंचे, कुछ ने दूसरी जगह जाना पड़ने की जानकारी मिलने पर आवेदन वापस ले लिया, जबकि कुछ ने कंपनी के मैसेज का जवाब देना ही बंद कर दिया.
नौकरी सबको चाहिए लेकिन काम कम लोग करना चाहते हैं
उन्होंने आगे कहा कि यह केवल भर्ती प्रक्रिया में उम्मीदवारों की संख्या कम होने का मामला नहीं है बल्कि युवाओं की गंभीरता और मेहनत से जुड़ा मुद्दा भी है. उन्होंने कहा कि आज कई लोग एआई स्टार्टअप में काम करने की इच्छा तो रखते हैं, लेकिन अपनी क्षमता साबित करने के लिए जरूरी मेहनत करने से पीछे हट जाते हैं. उनके अनुसार सिर्फ आवेदन करना या अपने प्रोफाइल में AI/ML एक्सपर्ट लिखाना आसान होता है लेकिन इसके लिए मेहनत कोई नहीं करना चाहता है.
रविशंकर ने कहा कि शुरुआत में बहुत लोग आगे आते हैं, लेकिन जब असली काम और जिम्मेदारी निभाने का समय आता है तो ज्यादातर लोग पीछे हट जाते हैं.
कंपनी कैसे उम्मीदवार की कर रही है तलाश?
इतना ही नहीं रविशंकर ने यह सवाल भी उठाया है कि क्या आज के समय में करियर संबंधी चर्चाओं में सीखने के बजाय उपाधियों को ज्यादा महत्व दिया जाता है. उन्होंने लिखा कि आज के समय में कई युवाओं को काम शुरू करने से पहले ही बड़ा सोचने और लीडर बनने की बात सिखाई जाती है, जबकि असली जरूरत मेहनती और जिम्मेदार कर्मचारी बनने की होती है.
उन्होंने बताया कि उनकी कंपनी सिर्फ रिज्यूमे देखकर लोगों को नौकरी नहीं देती, बल्कि उम्मीदवार की सोच, सीखने की क्षमता और मेहनत करने की इच्छा को महत्व देती है. उनके मुताबिक, किसी की स्किल सिखाई जा सकती है लेकिन किसी काम के प्रति जुनून और जिम्मेदारी की भावना पैदा करना मुश्किल है.
उन्होंने कहा कि जो 83 उम्मीदवार चयन प्रक्रिया में आगे बढ़े, उन्होंने बाकी आवेदकों की तुलना में ज्यादा गंभीरता और रुचि दिखाई. आखिर में उन्होंने दूसरे नियोक्ताओं से पूछा कि वे भर्ती में कौन-से ऐसे कदम उठाते हैं, जिससे सही और मेहनती उम्मीदवारों की पहचान हो सके.