भारत की रक्षा क्षमता को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि सामने आई है. रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन यानी DRDO द्वारा विकसित नाग एमके-2 एंटी टैंक गाइडेड मिसाइल अब भारतीय सेना में शामिल होने के लिए पूरी तरह तैयार है. पोखरण फील्ड रेंज में सफल फील्ड इवैल्यूएशन ट्रायल के बाद इस मिसाइल सिस्टम को ऑपरेशनल घोषित कर दिया गया है.
यह तीसरी पीढ़ी की फायर-एंड-फॉरगेट मिसाइल है जो आधुनिक बख्तरबंद वाहनों खासकर विस्फोटक रिएक्टिव आर्मर वाले टैंकों को नष्ट कर सकती है. स्वदेशी तकनीक पर आधारित होने के कारण यह आत्मनिर्भर भारत अभियान का महत्वपूर्ण हिस्सा बन गई है. सेना की मैकेनाइज्ड यूनिट्स और सीमा क्षेत्रों में इसकी तैनाती से दुश्मन के टैंक खतरे को काफी हद तक कम किया जा सकेगा.
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नाग एमके-2 की ताकत
नाग एमके-2 मूल नाग मिसाइल का एडवांस वर्जन है. इसकी लंबाई लगभग 1.83 मीटर और व्यास 150 मिलीमीटर है. कुल वजन करीब 42 किलोग्राम होता है. इसमें टेंडम हीट वॉरहेड लगा है जिसका वजन करीब 8 किलोग्राम है. यह वॉरहेड विस्फोटक रिएक्टिव आर्मर यानी ईआरए और रोल होमोजिनियस आर्मर को मिलाकर 900 मिलीमीटर से ज्यादा की पैठ बनाने में सक्षम है.

गाइडेंस सिस्टम इमेजिंग इन्फ्रारेड यानी आईआईआर सीकर पर आधारित है जो पैसिव होमिंग तकनीक का इस्तेमाल करता है. इससे मिसाइल दिन-रात और हर मौसम में लक्ष्य को लॉक कर सकती है. रेंज में सुधार किया गया है. न्यूनतम रेंज लगभग 500 मीटर और अधिकतम रेंज 7 से 10 किलोमीटर तक बताई जाती है. गति 220 से 230 मीटर प्रति सेकंड है. जेट वेन कंट्रोल सिस्टम की मदद से इसकी मैन्यूवरेबिलिटी बेहतर हुई है.
टॉप अटैक क्षमता इसकी सबसे बड़ी खासियत है. मिसाइल लक्ष्य के ऊपर चढ़कर कमजोर ऊपरी हिस्से पर हमला करती है जहां टैंक का कवच सबसे पतला होता है. फायर-एंड-फॉरगेट होने के कारण ऑपरेटर मिसाइल छोड़ने के बाद सुरक्षित जगह पर जा सकता है. यह सिस्टम नामिका एमके-2 वाहन पर लगाया जाता है जो बीएमपी-2 पर आधारित है. जोरावर लाइट टैंक पर भी इसका सफल परीक्षण हो चुका है.
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भारतीय सेना को होने वाले फायदे
नाग एमके-2 की शामिल होने से भारतीय सेना की एंटी टैंक क्षमता में उल्लेखनीय वृद्धि होगी. पहले सेना पुरानी वायर गाइडेड मिसाइलों और कुछ आयातित सिस्टम पर निर्भर थी. अब स्वदेशी मिसाइल के कारण आयात निर्भरता घटेगी और रखरखाव आसान होगा. सीमा क्षेत्रों खासकर चीन और पाकिस्तान सीमा पर आधुनिक टैंकों के खिलाफ प्रभावी जवाब तैयार हो जाएगा. फायर-एंड-फॉरगेट तकनीक से सैनिक सुरक्षित रहकर हमला कर सकेंगे.

नामिका वाहन की मदद से मैकेनाइज्ड फॉर्मेशंस तेजी से मूव कर सकेंगी और कई मिसाइल एक साथ ले जा सकेंगी. उत्पादन भारत डायनामिक्स लिमिटेड करेगा जिससे घरेलू उद्योग को बढ़ावा मिलेगा. रक्षा अधिग्रहण परिषद ने हजारों मिसाइल और नामिका वाहनों की खरीद की मंजूरी प्रक्रिया आगे बढ़ाई है.
इससे सेना की स्ट्राइक क्षमता लंबे समय तक बनी रहेगी. ऊंचाई वाले इलाकों और रेगिस्तानी क्षेत्रों दोनों में इसका इस्तेमाल संभव है. कुल मिलाकर यह मिसाइल भारतीय सेना को आधुनिक युद्ध की जरूरतों के अनुरूप बनाती है और आत्मनिर्भरता की दिशा में मजबूत कदम साबित होती है.
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नाग मिसाइल परिवार डीआरडीओ के एकीकृत गाइडेड मिसाइल विकास कार्यक्रम का हिस्सा रहा है. एमके-2 में यूजर फीडबैक के आधार पर कई सुधार किए गए. सफल परीक्षणों के बाद अब उत्पादन और इंडक्शन का रास्ता साफ है. भविष्य में इसे और प्लेटफॉर्म पर लगाने तथा रेंज बढ़ाने की संभावनाएं हैं.
यह प्रणाली न सिर्फ टैंक बल्कि बंकर जैसे टारगेट्स के खिलाफ भी प्रभावी साबित हो सकती है. भारतीय सेना की युद्धक क्षमता को नई ऊंचाई देने वाला यह सिस्टम देश की सुरक्षा के लिए महत्वपूर्ण उपलब्धि है.