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सुसाइड ड्रोन दिव्यास्त्र का ट्रायल सफल, जोधपुर में सेना ने देखा प्रदर्शन

भारतीय कंपनी होवरिट ने जोधपुर में दिव्यास्त्र Mk-1 लॉइटरिंग मुनिशन का सफल प्रदर्शन किया. मोबाइल प्लेटफॉर्म से लॉन्च कर इस ड्रोन ने 500 किमी रेंज और 5 घंटे उड़ान क्षमता के साथ अपनी बैटलफील्ड तैयारी साबित की है.

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ये है दिव्यास्त्र लॉइटरिंग मूनिशन जो घात लगाकर दुश्मन पर हमला करता है. (Photo: ITG)
ये है दिव्यास्त्र लॉइटरिंग मूनिशन जो घात लगाकर दुश्मन पर हमला करता है. (Photo: ITG)

भारतीय रक्षा क्षेत्र में एक बड़ी उपलब्धि हासिल हुई है. होवरिट कंपनी ने राजस्थान के जोधपुर में अपनी स्वदेशी टैक्टिकल लॉइटरिंग मुनिशन दिव्यास्त्र Mk-1 का सफल ऑपरेशनल डेमोन्स्ट्रेशन किया. इस प्रदर्शन में भारतीय सेना के वरिष्ठ अधिकारियों की मौजूदगी में ड्रोन को वाहन-माउंटेड मोबाइल लॉन्चर से कई बार सफलतापूर्वक लॉन्च किया गया. यह सफलता भारत की स्वदेशी रक्षा तकनीक की मजबूती को दिखाती है.

जोधपुर में हुए इस परीक्षण में दिव्यास्त्र Mk-1 को मोबाइल प्लेटफॉर्म से तेजी से लॉन्च किया गया. कई बार लॉन्चिंग के दौरान ड्रोन ने अपनी बैटलफील्ड मोबिलिटी, तेज तैनाती और परिचालन तैयारी को साबित किया. सेना के अधिकारी मौके पर मौजूद थे और पूरे प्रदर्शन को करीब से देखा. 

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यह परीक्षण सामान्य युद्ध परिस्थितियों में किया गया, जिससे पता चला कि ड्रोन वास्तविक लड़ाई के मैदान में भी प्रभावी ढंग से काम कर सकता है. खासतौर पर खुफिया जानकारी इकट्ठा करने (ISR), निगरानी और लक्ष्य को सटीक निशाना बनाने में यह बेहद उपयोगी साबित हुआ.

दिव्यास्त्र Mk-1 क्या है?

दिव्यास्त्र Mk-1 एक स्वदेशी टैक्टिकल यूएवी (Unmanned Aerial Vehicle) है. इसे खुफिया जानकारी इकट्ठा करने, निगरानी, टोह लेने और सटीक हमला करने के लिए बनाया गया है. यह लॉइटरिंग मुनिशन श्रेणी का ड्रोन है, यानी यह लक्ष्य के ऊपर घूम-घूमकर मौका देखकर हमला कर सकता है. 

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इसकी रेंज 500 किलोमीटर तक है. यह लगातार 5 घंटे तक हवा में रह सकता है. इतनी लंबी उड़ान क्षमता इसे लंबे समय तक निगरानी अभियान चलाने के लिए उपयुक्त बनाती है. ड्रोन को EO/IR पेलोड, कम्युनिकेशन रिले सिस्टम और मिशन के अनुसार वॉरहेड लगाकर इस्तेमाल किया जा सकता है.

मोबाइल लॉन्चर की खासियत

दिव्यास्त्र Mk-1 की सबसे बड़ी ताकत इसका मोबाइल लॉन्चर सिस्टम है. इसे किसी ट्रक या वाहन पर लगाकर कहीं भी ले जाया जा सकता है. युद्ध के मैदान में स्थिति बदलती रहती है, ऐसे में जहां जरूरत हो, वहां से ड्रोन लॉन्च करना बहुत महत्वपूर्ण है. 

इस प्रदर्शन में कई बार लॉन्चिंग से साबित हुआ कि ड्रोन को तैयार करने और उड़ाने में बहुत कम समय लगता है. इससे भारतीय सेना को दुश्मन की गतिविधियों पर नजर रखने और जरूरत पड़ने पर तुरंत जवाब देने में बड़ी मदद मिलेगी. भारतीय सेना के लिए दिव्यास्त्र Mk-1 एक गेम चेंजर साबित हो सकता है.

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सीमा पर तनाव की स्थिति में ऐसी टेक्नोलॉजी से सेना को रियल टाइम जानकारी मिलती है. ड्रोन दुश्मन के ठिकानों की निगरानी कर सकता है. लक्ष्य की पुष्टि कर सकता है. जरूरत पड़ने पर सटीक हमला भी कर सकता है. 

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यह सिस्टम खासकर पहाड़ी इलाकों, रेगिस्तानी क्षेत्रों और घने जंगलों में बहुत उपयोगी रहेगा. मोबाइल प्लेटफॉर्म की वजह से इसे आसानी से छिपाकर रखा जा सकता है. जरूरत पर इस्तेमाल किया जा सकता है.

स्वदेशी रक्षा इकोसिस्टम को बढ़ावा

यह सफलता आत्मनिर्भर भारत अभियान के तहत एक बड़ी उपलब्धि है. होवरिट कंपनी द्वारा विकसित दिव्यास्त्र Mk-1 ज्यादातर स्वदेशी पार्ट्स और टेक्नोलॉजी पर आधारित है. इससे विदेशी कंपनियों पर निर्भरता कम होगी और रक्षा क्षेत्र में निजी कंपनियों की भागीदारी बढ़ेगी. 

सरकार और भारतीय सेना स्वदेशी हथियारों और ड्रोन्स को बढ़ावा दे रही है. दिव्यास्त्र Mk-1 का सफल परीक्षण इसी दिशा में एक मजबूत कदम है. आने वाले समय में और उन्नत वर्जन भी विकसित किए जा सकते हैं.

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  • रेंज: 500 किलोमीटर तक  
  • एंड्योरेंस: 5 घंटे तक लगातार उड़ान  
  • लॉन्च प्लेटफॉर्म: वाहन-माउंटेड मोबाइल लॉन्चर  
  • मिशन: ISR, टारगेट एक्विजिशन, प्रिसीजन स्ट्राइक  
  • पेलोड: EO/IR कैमरा, कम्युनिकेशन रिले, वॉरहेड

ये विशेषताएं दिव्यास्त्र को बहुमुखी बनाती हैं. एक ही प्लेटफॉर्म को अलग-अलग मिशनों के लिए इस्तेमाल किया जा सकता है.

इस सफल प्रदर्शन के बाद उम्मीद है कि भारतीय सेना जल्द ही दिव्यास्त्र Mk-1 को अपनी यूनिट्स में शामिल करेगी. आगे और ज्यादा उन्नत वर्जन जैसे Mk-2 या स्वार्म ड्रोन क्षमता वाले सिस्टम भी विकसित किए जा सकते हैं. आधुनिक युद्ध में ड्रोन्स और लॉइटरिंग मुनिशन की भूमिका बहुत बढ़ गई है. भारत अब इस क्षेत्र में तेजी से आगे बढ़ रहा है.

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