भारत सरकार ब्रह्मपुत्र नदी के नीचे विश्वस्तरीय अंडरवाटर रोड-रेल सुरंग बनाने की तैयारी में है. यह सुरंग असम में गोहपुर (उत्तर तट) को नुमलिगढ़ (दक्षिण तट) से जोड़ेगी. अनुमानित लागत ₹18600 से 19000 करोड़ है. यह भारत की पहली ऐसी सुरंग होगी जिसमें सड़क और रेल दोनों होंगी. केंद्रीय कैबिनेट जल्द ही इस प्रोजेक्ट को मंजूरी देने वाली है.
सुरंग की मुख्य विशेषताएं
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आर्थिक फायदे
रणनीतिक और रक्षा महत्व
असम भारत की पूर्वी सीमा पर है – चीन (अरुणाचल), बांग्लादेश और म्यांमार से लगा हुआ. यहां तेज गति से सेना, हथियार और सामान पहुंचाना बहुत जरूरी है.
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पूर्व बॉर्डर रोड्स ऑर्गनाइजेशन के डायरेक्टर जनरल लेफ्टिनेंट जनरल राजीव चौधरी (सेवानिवृत्त) कहते हैं कि ब्रह्मपुत्र के नीचे सुरंग बनाकर भारत सिर्फ दुनिया की सबसे लंबी अंडर-रिवर रेल-रोड सुरंग नहीं बना रहा, बल्कि पूर्वोत्तर को राष्ट्रीय मुख्यधारा से जोड़ने वाली रणनीतिक जीवनरेखा बना रहा है. यह भूगोल को चुनौती से अवसर में बदलने का प्रतीक है.
यह सुरंग पूर्वोत्तर को एकीकृत करने की बड़ी योजना का हिस्सा है. इसमें हाईवे, रेलवे, वाटरवेज और अन्य वैकल्पिक रास्ते शामिल हैं. पूर्वोत्तर लंबे समय से कठिन भूगोल की वजह से पीछे रहा है. अब बेहतर कनेक्टिविटी से- उद्योग आएंगे. पर्यटन फलेगा-फूलेगा. युवाओं को रोजगार मिलेगा. रक्षा और विकास दोनों मजबूत होंगे.
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ब्रह्मपुत्र अंडरवाटर सुरंग सिर्फ इंजीनियरिंग का चमत्कार नहीं, बल्कि पूर्वोत्तर को भारत की मुख्यधारा से जोड़ने और सुरक्षा मजबूत करने का बड़ा कदम है. आम लोगों के लिए तेज और सस्ता सफर, व्यापारियों के लिए बेहतर व्यापार और देश के लिए मजबूत रक्षा – यह सुरंग तीनों स्तर पर गेम-चेंजर साबित होगी.