तमिलनाडु का 2019 का चर्चित रामलिंगम मर्डर केस फिर चर्चा में है. नेशनल इन्वेस्टिगेशन एजेंसी (NIA) ने प्रतिबंधित पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया (PFI) के चार पूर्व सदस्यों पर आरोप तय किए हैं. उनपर रामलिंगम मर्डर केस के आरोपियों को लगभग छह साल तक पनाह देने का आरोप है.
चेन्नई में स्पेशल NIA कोर्ट में के. मोहिदीन, मोहम्मद इमरान, तमीम अंसारी और अस्मत के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की गई. इन पर आरोप है कि इन्होंने जानबूझकर उन हमलावरों और साजिशकर्ताओं को पनाह दी जो तंजावुर जिले में रामलिंगम की हत्या में शामिल थे. NIA का कहना है कि यह हत्या सांप्रदायिक अशांति और दहशत फैलाने की एक बड़ी साजिश का हिस्सा थी.
केंद्रीय एजेंसी ने बताया कि आरोपियों पर भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 61(2) के तहत आपराधिक साजिश रचने और BNS की धारा 249 के तहत कानून लागू करने वाली एजेंसियों से बचने में अपराधियों की मदद करने का आरोप लगाया गया है. साथ ही, उन पर गैर-कानूनी गतिविधि (रोकथाम) अधिनियम (UAPA) की संबंधित धाराओं के तहत भी आरोप लगाए गए हैं.
PMK (पाट्टाली मक्कल कच्ची पार्टी) के पदाधिकारी रामलिंगम की हत्या फरवरी 2019 में हुई थी. आरोप है कि PFI सदस्यों के साथ उनकी बहस हुई थी, जब उन्होंने उन्हें जबरन धर्म परिवर्तन करने से रोकने की कोशिश की थी.
NIA ने कहा कि जांच से पता चला है कि इन चार आरोपियों ने दो घोषित अपराधियों - मोहम्मद बुरहानुद्दीन और मोहम्मद नबील हसन - को लगभग छह साल तक पनाह दी थी, जबकि उन्हें हत्या में इन अपराधियों की भूमिका के बारे में पता था.
एजेंसी ने पहले इस मामले में 18 आरोपियों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की थी, जिनमें छह फरार घोषित अपराधी शामिल थे. बाद में NIA ने इनमें से चार घोषित अपराधियों को गिरफ्तार कर लिया.
आतंकवाद-रोधी एजेंसी ने दो अन्य लोगों (मोहम्मद अली जिन्ना और इम्थातुल्ला) को भी गिरफ्तार किया था, जिन्होंने कथित तौर पर अपराधियों को पनाह दी थी. उनके खिलाफ क्रमशः मई 2025 और फरवरी 2026 में चार्जशीट दाखिल की गई थी.
NIA ने कहा कि इस नई चार्जशीट के साथ उसने उस नेटवर्क का और खुलासा किया है जिसने रामलिंगम मर्डर केस में घोषित अपराधियों को पनाह दी थी. साथ ही, एजेंसी ने कहा कि बड़ी साजिश की जांच अभी भी जारी है.