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यूएसएस लिंकन के अलावा दो और ताकतवर समुद्री हथियार ईरान की ओर रवाना किया अमेरिका ने

अमेरिका ने ईरान के बढ़ते तनाव के बीच USS अब्राहम लिंकन न्यूक्लियर एयरक्राफ्ट कैरियर को साउथ चाइना सी से मिडिल ईस्ट की ओर मोड़ दिया है. नॉरफोक पनडुब्बी और सैन डिएगो LPD-22 एम्फीबियस ट्रांसपोर्ट डॉक से जुड़े शक्तिशाली नौसैनिक हथियार भी तैनात किए जा रहे हैं. ये कदम ईरान में विरोध प्रदर्शनों और क्षेत्रीय खतरे के खिलाफ डिटरेंस के लिए हैं.

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बाएँ से- USS सैन डिएगो युद्धपोत और USS नॉरफोक पनडुब्बी का मिसाइल लॉन्च सिस्टम. (Photo: Getty)
बाएँ से- USS सैन डिएगो युद्धपोत और USS नॉरफोक पनडुब्बी का मिसाइल लॉन्च सिस्टम. (Photo: Getty)

अमेरिका ने ईरान की ओर न सिर्फ यूएसएस अब्राहम लिंकन भेजा है, बल्कि दो और शक्तिशाली जहाज भी रवाना किए हैं. ये हैं यूएसएस नॉरफोक  पनडुब्बी) और यूएसएस सैन डिएगो (LPD-22, सैन एंटोनियो-क्लास एम्फीबियस ट्रांसपोर्ट डॉक). ये तीनों अमेरिका-ईरान के बीच मिडिल-ईस्ट में तैनात की जा रही हैं. जहां ईरान में सरकार विरोधी प्रदर्शन हो रहे हैं और अमेरिका अपनी सैन्य ताकत बढ़ा रहा है.

आइए समझते हैं कि ये तीनों जहाज क्या हैं, इनकी ताकत क्या है और ये क्यों महत्वपूर्ण हैं...

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1. यूएसएस अब्राहम लिंकन (USS Abraham Lincoln - CVN-72)

यह अमेरिकी नौसेना का एक न्यूक्लियर पावर्ड एयरक्राफ्ट कैरियर (परमाणु ऊर्जा से चलने वाला विमानवाहक पोत) है. यह निमित्ज़-क्लास का जहाज है, जो दुनिया के सबसे बड़े और ताकतवर युद्धपोतों में से एक है.

US Iran tensions

  • इसमें 75 से ज्यादा लड़ाकू विमान (जैसे F/A-18, F-35C) ले जाने की क्षमता है.
  • परमाणु रिएक्टर की वजह से यह महीनों तक बिना ईंधन भरे समुद्र में रह सकता है.
  • इसका पूरा कैरियर स्ट्राइक ग्रुप (CSG) कई डेस्ट्रॉयर, क्रूजर और पनडुब्बियों के साथ आता है, जो मिसाइलों से हमला कर सकता है.

यह कैलिफोर्निया के सैन डिएगो से नवंबर 2025 में निकला था. पहले यह साउथ चाइना सी में था, लेकिन अब इसे मिडिल ईस्ट (ईरान के पास) की ओर मोड़ दिया गया है. यह तनाव बढ़ने पर हवाई हमले, निगरानी और डिफेंस के लिए इस्तेमाल हो सकता है.

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2. यूएसएस नॉरफोक (USS Norfolk - SSN-714 या SSN-815)

यह अमेरिकी नौसेना की वर्जीनिया-क्लास की न्यूक्लियर अटैक सबमरीन (परमाणु पनडुब्बी) है. नॉरफोक नाम वर्जीनिया राज्य के नॉरफोक शहर से लिया गया है, जहां अमेरिका की सबसे बड़ी नौसेना बेस है.

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  • यह पूरी तरह छिपकर चल सकती है, दुश्मन को पता नहीं चलता.
  • टॉरपीडो और क्रूज मिसाइल (जैसे टोमाहॉक) से हमला कर सकती है, जो सैकड़ों किलोमीटर दूर के टारगेट को निशाना बना सकती हैं.
  • दुश्मन के जहाजों, पनडुब्बियों और जमीन पर मौजूद ठिकानों को चुपके से नष्ट कर सकती है.
  • यह खुफिया जानकारी जुटाने और दुश्मन की निगरानी में भी माहिर है.

कई रिपोर्ट्स में कैरियर ग्रुप के साथ ऐसी पनडुब्बियां शामिल होती हैं. यह ईरान के पास के पानी में चुपके से तैनात होकर बहुत बड़ा खतरा पैदा कर सकती है. 

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3. यूएसएस सैन डिएगो (USS San Diego - LPD-22)

यह सैन एंटोनियो-क्लास एम्फीबियस ट्रांसपोर्ट डॉक (अम्फीबियस जहाज) है. यह सैन डिएगो शहर के नाम पर है, जो अमेरिका की पैसिफिक फ्लीट की मुख्य बेस है.

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  • यह सैनिकों, हेलीकॉप्टर, लैंडिंग क्राफ्ट और वाहनों को ले जा सकता है.
  • इसमें MV-22 ऑस्प्रे (टिल्ट्रोटर), CH-53 हेलीकॉप्टर और LCAC (हॉवरक्राफ्ट) उतारने-चढ़ाने की सुविधा है.
  • समुद्र से जमीन पर सैनिक उतारने (Amphibious Assault) के लिए इस्तेमाल होता है.
  • इसमें मेडिकल सुविधा, कमांड सेंटर और सैकड़ों मरीन सैनिक रखने की जगह है.

अगर जरूरत पड़ी तो यह मिडिल ईस्ट में अमेरिकी मरीन को उतार सकता है. राहत कार्य कर सकता है या स्पेशल ऑपरेशन सपोर्ट दे सकता है. यह युद्ध के अलावा मानवीय मदद या तैनाती के लिए भी उपयोगी है.

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क्यों भेजा जा रहा है ये सब?

ईरान में हाल ही में सरकार विरोधी बड़े प्रदर्शन हुए हैं, जिन पर सख्त कार्रवाई हुई. अमेरिका (ट्रंप प्रशासन के तहत) ईरान पर दबाव बढ़ा रहा है. अपनी सेना को मजबूत कर रहा है. यूएसएस अब्राहम लिंकन अकेला नहीं है- इसके साथ डिस्ट्रॉयर, क्रूजर और पनडुब्बियां हैं. नॉरफोक जैसी पनडुब्बी चुपके से खतरा पैदा करती है, जबकि सैन डिएगो जमीन पर ऑपरेशन के लिए तैयार रहता है.

ये कदम डिटरेंस के लिए हैं- यानी ईरान को कोई गलत कदम उठाने से रोकना. अमेरिका नहीं चाहता कि स्थिति और बिगड़े लेकिन तैयार भी रहना चाहता है. 

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