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UAE राजदूत ने दाऊद इब्राहिम के खिलाफ कार्रवाई को बताया 'कोरी अफवाह'

संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) के राजदूत अहमद अल बन्ना ने दुबई में अंडरवर्ल्ड डॉन दाऊद इब्राहिम के ठिकानों पर छापेमारी संबंधी मीडिया रिपोर्ट्स का खंडन किया है. उन्होंने उन तमाम मीडिया रिपोर्ट्स को खारिज करते हुए कहा कि दाऊद की 15 हजार करोड़ रुपये की संपत्ति को जब्त किए जाने की खबरें पूरी तरह से बेबुनियाद हैं.

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अंडरवर्ल्ड डॉन दाऊद इब्राहिम
अंडरवर्ल्ड डॉन दाऊद इब्राहिम

संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) के राजदूत अहमद अल बन्ना ने दुबई में अंडरवर्ल्ड डॉन दाऊद इब्राहिम के ठिकानों पर छापेमारी संबंधी मीडिया रिपोर्ट्स का खंडन किया है. उन्होंने उन तमाम मीडिया रिपोर्ट्स को खारिज करते हुए कहा कि दाऊद की 15 हजार करोड़ रुपये की संपत्ति को जब्त किए जाने की खबरें पूरी तरह से बेबुनियाद हैं.

कुछ हफ्तों पहले सोशल मीडिया में पीएम मोदी को बधाई देते हुए कई ट्वीट्स वायरल हुए थे. इन ट्वीट्स में दाऊद के खिलाफ दुबई में हुई कार्रवाई को पीएम मोदी को इसका श्रेय देते हुए इसे पीएम की कूटनीति का मास्टरस्ट्रोक बताया जा रहा था. साथ ही दाऊद की तकरीबन 15 हजार करोड़ रुपये की संपत्ति सीज करवाने के लिए पीएम मोदी को धन्यवाद दिया जा रहा था.

वहीं बीजेपी की आधिकारिक सोशल मीडिया सेल से भी इससे संबंधित कई फैक्ट्स लगातार जारी किए गए थे. कथित फैक्ट्स के मुताबिक, प्रधानमंत्री ने 2015 में संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) की अपनी यात्रा के दौरान की एक सूची यूएई अधिकारियों को सौंपी थी और दाऊद के खिलाफ कार्रवाई की मांग की थी.

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हमारे सहयोगी न्यूज चैनल इंडिया टुडे से एक्सक्लूसिव बातचीत में संयुक्त अरब अमीरात के राजदूत अहमद अल बन्ना ने सोशल मीडिया पर चल रही इन सभी खबरों का खंडन किया. उन्होंने कहा, किसी भी व्यक्ति के खिलाफ कार्रवाई करने से पहले उनके देश में कानूनी प्रक्रियाओं का मुख्य रुप से पालन किया जाता है.

इंडिया टुडे चैनल की डिप्टी एडिटर स्मिता शर्मा और विदेशी राजदूत अहमद अल बन्ना के बीच हुई बातचीत के कुछ अंशः

स्मिता शर्माः हाल के वर्षों में हमने देखा है कि भारत और संयुक्त अरब अमीरात के बीच हुई प्रत्यर्पण संधि के मुताबिक कुछ लोगों को निर्वासित किया गया है. दाऊद इब्राहिम के बारे में खबरें थीं कि भारत की ओर से एनएसए अजीत डोभाल ने यूएई को दाऊद के खिलाफ डोजियर सौंपा है? क्या आप इस खबर की पुष्टि करते हैं?

विदेशी राजदूत अहमद अल बन्नाः मैं जानता हूं कि वहां (यूएई) पर अंतर्राष्ट्रीय नियम-कानून हैं. दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय समझौते हुए हैं और इन समझौतों को दोनों देश व्यवहारिकता और आपसी समझ द्वारा ही निर्णायक बनाते हैं. अंतर्राष्ट्रीय ढांचों के तहत साइन किए गए समझौते कानूनी और न्यायिक व्यवस्था के अंतर्गत आते हैं. यह सच है कि दोनों देशों के एनएसए के बीच कई बार मीटिंग हुई थी लेकिन मेरे पास ऐसी कोई जानकारी नहीं है, जिसके मुताबिक, दाऊद के खिलाफ यूएई में उसके ठिकानों पर छापेमारी की गई हो.

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स्मिता शर्माः वहां (यूएई) की भी रिपोर्ट्स है कि दाऊद के ठिकानों पर छापेमारी की गई है. हम नहीं जानते कि क्या यह सच है, झूठ है. आप इस बात की पुष्टि करना चाहेंगे?

विदेशी राजदूत अहमद अल बन्नाः यह पहली बार है कि मैंने इसके बारे में सुना है. मैं इस बारे में कुछ नहीं जानता. जैसा कि मैंने बताया संयुक्त अरब अमीरात एक ऐसा देश है, जहां नियम हैं, कायदे-कानून हैं और संविधान हैं. अगर देश में कानूनी कार्यवाही न्यायिक कार्यवाही से जुड़ी है तो मैं मानता हूं कि उसे ऐसे ही छोड़ दिया जाए. मेरा मानना है कि कानूनी और न्यायिक कार्यवाही के बगैर देश में किसी पर भी कार्रवाई नहीं की जा सकती.

स्मिता शर्माः के खिलाफ भारत की ओर से सौंपे गए सबूतों में अगर आपको जरा भी दम नजर आता है, तो क्या यूएई दाऊद के खिलाफ कार्रवाई करेगा?

विदेशी राजदूत अहमद अल बन्नाः जैसा कि मैं पहले ही कह चुका हूं कि दोनों देशों के बीच समझौते हुए हैं, तो उनके तहत ही किसी भी व्यक्ति विशेष पर कार्रवाई की जा सकती है. समझौतों के तहत ही दोनों देश आपस में बातचीत करेंगे और फिर सबूतों के आधार पर ही संयुक्त रुप से कार्रवाई की जाएगी.

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