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पटियाला हाउस कोर्ट ने टुंडा को आरोपों से बरी किया

पटियाला हाउस कोर्ट ने 90 के दशक में देश के कई स्थानों पर हुए बम धमाकों से संबंधित लश्कर-ए-तैयबा के बम विशेषज्ञ अब्दुल करीम टुंडा को उस पर लगे आरोपों से बरी कर दिया.

टुंडा के खिलाफ चार मामलों में आरोप पत्र दायर किया गया था टुंडा के खिलाफ चार मामलों में आरोप पत्र दायर किया गया था

दिल्ली की पटियाला हाउस कोर्ट ने 90 के दशक में देश के कई स्थानों पर हुए बम धमाकों से संबंधित लश्कर-ए-तैयबा के बम विशेषज्ञ अब्दुल करीम टुंडा को उस पर लगे आरोपों से बरी कर दिया.

पटियाला हाउस कोर्ट ने शनिवार को अब्दुल करीम टुंडा के मामले में सुनवाई करते उसे उन आरोपों से बरी कर दिया, जिनमें उस पर बम धमाकों से संबंधित होने के आरोप थे.

टुंडा के अधिवक्ता एम.एस. खान के मुताबिक अदालत के समक्ष चार मामलों में अब्दुल करीम टुंडा के खिलाफ आरोप पत्र दाखिल किए गए थे. जिसके मुताबिक उसके कब्जे से उस वक्त विस्फोटक भी बरामद हुआ था.

अधिवक्ता ने बताया कि उन्होंने आरोपों के खिलाफ अदालत से अपील की थी. तथ्य भी कोर्ट के समक्ष रखे थे. जिसे स्वीकार करते हुए अदालत ने अब्दुल करीम को बरी कर दिया है.

इससे पहले पिछले साल नवंबर में टुंडा को हरियाणा के सोनीपत में वर्ष 1996 में हुए दो सिलसिलेवार बम धमाकों के मामले में सोनीपत की जिला अदालत में पेश किया गया था. वहां उसके खिलाफ चार लोगों ने गवाही भी दी.

गौरतलब है कि अब्दुल करीम टुंडा पर सोनीपत में 28 दिसंबर, 1996 को बम विस्फोट करने का आरोप है. उस दिन शाम के समय पहला धमाका बस स्टैंड के पास स्थित तराना सिनेमा के पास हुआ था जबकि दूसरा धमाका दस मिनट बाद गीता भवन चौक पर गुलशन मिष्ठान भंडार के पास हुआ था. धमाकों में करीब एक दर्जन लोग घायल हुए थे.

पुलिस ने इस संबंध में गाजियाबाद निवासी अब्दुल करीम टुंडा और उसके दो साथियों अशोक नगर पिलखुआ निवासी शकील अहमद और अनार वाली गली तेलीवाड़ा, दिल्ली निवासी मोहम्मद आमिर खान उर्फ कामरान को नामजद किया था. पुलिस ने शकील और कामरान को वर्ष 1998 में गिरफ्तार कर लिया था, लेकिन टुंडा घटना के बाद से लंबे वक्त तक फरार रहा था.

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