आईएसआईएस के आतंक को देखते हुए फ्रांस और रूस जैसे विरोधी भी एक साथ आ गए हैं. रूस और अमेरिका से भी ऐसी ही उम्मीद लगाई जा रही है. जिसे खुद अमेरिकी राष्ट्रपति ओबाम ने जगाया है. लेकिन अमेरिका की एक शर्त इस एकजुटता की राह में रोड़ा बनी हुई है.
कूटनीति है दूरी की वजह
आईएसआईएस के खिलाफ जंग में कूटनीति की चाल एक बार फिर रूस और अमेरिका को दूर कर रही है. अमेरिकी राष्ट्रपति की की उम्मीद पर सवालिया निशान लगा दिए हैं. टर्की अमेरिका का दोस्त है. इसीलिए रूसी वॉर प्लेन को मार गिराये जाने पर ओबामा ने कहा कि अपनी सुरक्षा करना टर्की का हक है. तो पुतिन ने इशारों इशारों में टर्की और अमेरिका को आतंकियों का मददगार बता दिया.
पुतिन ने मांगा था सहयोग
हालांकि बगदादी के खौफ का खात्मा करने के लिए रूस की रणनीतिक साझेदारी अमेरिका को भी समझ आती है. इसीलिए पिछले दिनों ईस्ट एशिया समिट में ओबामा ने रूसी राष्ट्रपति पुतिन से मुलाकात की थी. और इस दौरान पुतिन से आईएसआईएस के खिलाफ लड़ाई में सहयोग मांगा था. 
रूस ने की फ्रांस की मदद
बातचीत के बावजूद अमेरिका और रूस का ऐसा रुख देखकर लगता नहीं कि खुलकर साथ आ पाएंगे. हालांकि कोल्ड वॉर के 30 साल लंबे दौर से बाहर निकलकर रूस ने फ्रांस की मदद की है. पेरिस में आईएसआईएस के हमले के बाद फ्रांस ने रूस से मदद मांगी थी. और रूस ने बगदादी के लड़ाकों पर मिसाइलें बरसाना शुरु कर दिया है.
क्या अमेरिका मंथन करेगा
रूस को यह उम्मीद भी है कि पेरिस हमले और अब टर्की मिलिट्री की हरकत के बाद शायद अमेरिका अपने रुख पर दोबारा मंथन करेगा. मौजूदा हालात में रूस यह भी समझता है कि दुनियाभर में फैले आईएसआईएस के आंतक को मिटाने के लिए सीरिया के राष्ट्रपति पर फैसला होना जरूरी है. वरना असद के साथ होने या न होने का पाला दुनिया के बीच खिंचा ही रह जाएगा. 
आईएसआईएस को मिलेगा फायदा
रूस और अमेरिका के रिश्तों में इस तल्खी का फायदा हर हाल में आईएसआईएस के आतंकियों को मिलता रहेगा. जब दुनिया की ये दोनों बड़ी ताकतें एक होकर इस आतंकी संगठन पर हमला नहीं करेंगी, तब तक इसका खात्मा आसान दिखाई नहीं देता. गंभीर हालात को समझते हुए ही भी आईएसआईएस के खिलाफ रूस और अमेरिका को साथ आने की सलाह दी है.
रूस और अमेरिका के बीच शर्त हैं बशर अल असद
सारी दुनिया को अपने आतंक से लहुलुहान करने वाले बगदादी के खिलाफ हाथ बढ़ाने की ओबामा की पेशकश शर्तों में बंधी है. और रूस के हाथ मिलाने की शर्त भी. इस शर्त का अहम किरदार हैं सारिया के राष्ट्रपति बशर अल असद. ओबामा का कहना है कि रूस असद को बचाए रखने की जिद छोड़ दे. तो पुतिन का कहना है कि अमेरिका आईएसआईएस के खात्मे पर गंभीर हो और असद की गद्दी की ओर देखना बंद करे.
