Manvendra Singh Murder Case: लखनऊ में अपने पिता मानवेंद्र सिंह को बेरहमी से मौत के घाट उतारने वाला अक्षत पुलिस के सामने ऐसे खुलासे कर रहा है, जो बेहद चौंकाने वाले हैं. उसने पिता की लाश के टुकड़े करने के लिए एक चाकू ऑनलाइन मंगवाया था. उसे लगा था कि काम बन जाएगा. लेकिन ऐसा हो न सका. तब वो खुद बाजार गया और वहां से लकड़ी काटने वाली तेजधार आरी खरीद कर लाया था. जिससे अक्षत ने लाश के टुकड़े किए थे. इस मामले में अभी एक सवाल सबको परेशान कर रहा है कि आखिर उसने कत्ल के बाद लाश के साथ ऐसी बेहरमी क्यों की थी?
मानवेंद्र सिंह हत्याकांड को लेकर कई तरह के खुलासे पहले ही हो चुके हैं. लेकिन कई लोगों के मन में यह सवाल उठता रहा कि आखिर अक्षत ने लाश के टुकड़े कैसे किए? उसने पेशेवर तरीके से लाश के हाथ-पांव, सिर सब धड़ से कैसे अलग किए थे? मतलब ये कि उसे कैसे पता था कि लाश के टुकड़े कहां से और कैसे किए जाने हैं. ये बात समझने से पहले अक्षत की बुआ यानी मानवेंद्र सिंह की छोटी बहन ने वारदात की रात के बारे में जो कहानी सुनाई, उसे जानना भी ज़रूरी है.
अक्षत की बुआ ने बताया है कि 19 फरवरी की रात करीब 12.30 से 1 के दरम्यान मानवेंद्र एक शादी से घर लौटे थे. इसके बाद रात 1 बजकर 34 मिनट तक वो ऑनलाइन थे. लखनऊ पुलिस का भी कहना है कि बाप बेटे के बीच बहस या झगड़ा एक बजे के बाद हुआ लेकिन पुलिस ये पता लगाने की कोशिश कर रही है कि जब झगड़े के बाद रात दो बजे के आसपास मानवेंद्र सो चुके थे. तब अगले दो ढाई घंटे तक अक्षत क्यों जागता रहा.
अगर गुस्से में था तो उसी वक्त गोली मार सकता था. या तो हो सकता है वो अपने पिता की गहरी नींद में जाने का इंतजार कर रहा हो. अक्षत की बुआ का ये भी कहना है कि अक्षत को डॉक्टर बनाने को लेकर बाप बेटे में अक्सर झगड़ा हुआ करता था. डॉक्टरी की पढ़ाई कराने की जिद को लेकर रिश्तेदारों ने मानवेंद्र को कई बार समझाया भी. बाद में मानवेंद्र इस बात पर राजी भी हो गए कि वो जो करना चाहे उसे करने देंगे. अक्षत बीबीए कर बिजनेस करना चाहता था.
अक्षत की बुआ ने ये भी बताया कि उनकी भाभी यानि अक्षत की मां की 9 मई 2018 को मौत हो गई थी. उनकी मौत अस्पताल में ब्रेन की सर्जरी के दौरान हुई थी. तब से मानवेंद्र दोनों बच्चों की देखभाल खुद ही करते थे.
लखनऊ पुलिस के मुताबिक, अक्षत ने अपना जुर्म कुबूल कर लिया है. उसने पूछताछ के दौरान बताया कि उसके हाथों उसके पिता का कत्ल गुस्से में हो गया था. लेकिन कत्ल हो जाने के बाद उसे पकड़े जाने का डर सताने लगा. तब उसने खामोशी से लाश को ठिकाने लगाने के बारे में सोचा था. पर लाश वजनी थी, वो अकेला उठा नहीं सकता था. इसी के बाद उसके दिमाग में एक खौफनाक आइडिया आया, जो उसे एक वेब सीरीज देखकर मिला था. वो रातभर लाश के पास ही घूमता रहा.
20 फरवरी की सुबह होते ही अक्षत ने ऑनलाइन एक चाकू मंगाया. वो चाकू छोटे साइज का था. कोशिश करने के बाद भी जिससे लाश के टुकड़े नहीं हो पाए. इस बात से अक्षत परेशान हो गया. इसके बाद वो खुद बाजार गया और लकड़ी काटने वाली एक तेजधार आरी खरीद कर लाया. लखनऊ पुलिस के मुताबिक, अक्षत ने उसी आरी से अपने पिता की लाश के कुल चार टुकड़े किए. जिनमें से दोनों हाथ और पैर वो कार में रखकर ठिकाने लगा चुका था. पुलिस ने ये भी साफ कर दिया कि इस बात के कोई सबूत नहीं मिले कि उसने लाश के टुकड़ों को जलाने की कोशिश की थी.
बल्कि उसने धड़ और सिर को नीले ड्रम में रख दिया था ताकि मौका मिलने पर बाद में वो उन्हें भी ठिकाने लगा सके. लेकिन 21 फरवरी की शाम तक मानवेंद्र की गुमशुदगी की खबर पड़ोसियों और रिश्तेदारों तक पहुंच गई. लोगों का घर में आना शुरु हो गया. लिहाजा, अक्षत को लाश के बाकी टुकड़े ड्रम से निकाल कर बाहर ले जाने का मौका ही नहीं मिला. और वो नीला ड्रम ग्राउंड फ्लोर के उस गेस्ट रूम में ही रहा.
इस केस की एफआईआर में मानवेंद्र के कत्ल की वजह का जिक्र है. उस FIR के मुताबिक, मानवेंद्र अपने बेटे अक्षत को नीट क्लियर कर MBBS की पढ़ाई करने के लिए कहते थे. इसी बात पर झगड़ा होता था. उस रात भी यही हुआ और अक्षत ने अपने बाप को गोली मार दी.
अब बात उस सवाल कि जो आम लोगों के साथ-साथ पुलिस के लिए भी पहेली बन रहा है कि अक्षत को कैसे पता था कि लाश के टुकड़े कहां से और कैसे किए जाते हैं. तो इस मामले पर लखनऊ पुलिस ने जवाब दिया है. पुलिस के मुताबिक, कातिल बेटे अक्षत को ये आइडिया और लाश के टुकड़े करने का तरीका कुछ वेब सीरीज देखकर मिला था.
जब अक्षत पुलिस की हिरासत में अक्षत से कत्ल की वजह पूछी गई तो उसने कहा- 'गलती से हो गया'. चलिए मान लीजिए गुस्से में, गलती से राइफल से गोली चल गई. ऐसी गलतियां इससे पहले भी कई बार ग़ुस्से में हो चुकी हैं. लेकिन गोली मारने के बाद उसने अपने पिता की लाश का जो हश्र किया, वो किसी भी इंसान के दिल को दहला सकता है.
(लखनऊ से अंकित मिश्रा के साथ समर्थ श्रीवास्तव का इनपुट)