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IPC Section 85: अपनी मर्जी के खिलाफ नशे में किए गए कार्य से संबंधित है धारा 85

आईपीसी (IPC) की धारा 85 (Section 85) में ऐसे व्यक्ति के कार्य को बताया गया है, जो अपनी इच्छा के विरुद्ध नशे में चूर होने के कारण कोई फैसला लेने में असमर्थ है. आइए जानते हैं कि आईपीसी की धारा 85 इस बारे में क्या जानकारी देती है?

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स्टोरी हाइलाइट्स
  • नशे में चूर व्यक्ति के कार्य से जुड़ी है IPC धारा 85
  • अंग्रेजी शासनकाल में लागू हुई थी आईपीसी

Indian Penal Code: भारतीय दंड संहिता में अदालत (Court), पुलिस (Police) और अन्य कानूनी एजेंसियों (Legal agencies) की कार्य प्रणाली से जुड़े कानूनी प्रावधान (Legal provision) दर्ज हैं. ऐसे ही आईपीसी (IPC) की धारा 85 (Section 85) में ऐसे व्यक्ति के कार्य को बताया गया है, जो अपनी इच्छा के विरुद्ध नशे में चूर होने के कारण कोई फैसला लेने में असमर्थ है. आइए जानते हैं कि आईपीसी की धारा 85 इस बारे में क्या जानकारी देती है?

आईपीसी की धारा 85 (Indian Penal Code Section 85)
भारतीय दंड संहिता, 1860 की धारा 85 (Section 85) में अपनी मर्जी के खिलाफ हुए नशे के कारण (Because of intoxication) फैसला लेने में असमर्थ (Incapable) व्यक्ति के काम के बारे मे बताया गया है. IPC की धारा 85 के अनुसार, कोई बात अपराध (Offence) नहीं है, जो ऐसे व्यक्ति द्वारा की जाती है, जो उसे करते समय मत्तता (Drunkenness) के कारण उस कार्य की प्रकृति (Nature of the act), या यह कि जो कुछ वह कर रहा है वह दोषपूर्ण या विधि के प्रतिकूल (Defective or contrary to law) है, जानने में असमर्थ है, परन्तु यह तब जब कि वह चीज, जिससे उसकी मत्तता हुई थी, उसके अपने ज्ञान के बिना या इच्छा के बिना या इच्छा के विरुद्ध (Without will or against will) दी गई थी, और गुण का उसे ज्ञान नहीं था.

इसे भी पढ़ें--- IPC Section 84: विकृतचित व्यक्ति के बारे में प्रावधान करती है आईपीसी की धारा 84 

क्या होती है आईपीसी (IPC)
भारतीय दंड संहिता (Indian Penal Code) IPC भारत में यहां के किसी भी नागरिक (Citizen) द्वारा किये गये कुछ अपराधों (certain offenses) की परिभाषा (Definition) और दंड (Punishment) का प्रावधान (Provision) करती है. आपको बता दें कि यह भारत की सेना (Indian Army) पर लागू नहीं होती है. पहले आईपीसी (IPC) जम्मू एवं कश्मीर में भी लागू नहीं होती थी. लेकिन धारा 370 हटने के बाद वहां भी आईपीसी लागू हो गई. इससे पहले वहां रणबीर दंड संहिता (RPC) लागू होती थी.

अंग्रेजों ने लागू की थी IPC
ब्रिटिश कालीन भारत (British India) के पहले कानून आयोग (law commission) की सिफारिश (Recommendation) पर आईपीसी (IPC) 1860 में अस्तित्व में आई. और इसके बाद इसे भारतीय दंड संहिता (Indian Penal Code) के तौर पर 1862 में लागू किया गया था. मौजूदा दंड संहिता को हम सभी भारतीय दंड संहिता 1860 के नाम से जानते हैं. इसका खाका लॉर्ड मेकाले (Lord Macaulay) ने तैयार किया था. बाद में समय-समय पर इसमें कई तरह के बदलाव किए जाते रहे हैं.

 

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