केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी को धमकी देने के मामले में नागपुर की विशेष अदालत ने 16 मई को जिन दो आरोपियों जयेश पुजारी उर्फ कांथा और अफसर पाशा को दोषी ठहराते हुए पांच साल की कठोर कैद की सजा सुनाई थी. उन दोनों ने साल 2023 में कर्नाटक की जेल से बैठकर गडकरी को धमकी भरे कॉल किए थे. इस मामले ने जेल के अंदर से चल रहे आपराधिक नेटवर्क और आतंकी कनेक्शन को लेकर सुरक्षा एजेंसियों की चिंता बढ़ा दी है.
अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश अनिल कुमार के. शर्मा की अदालत ने दोनों आरोपियों को IPC की धारा 385, 387, 506(2), 507 और 34 के तहत दोषी ठहराया था. इसके अलावा UAPA की धारा 10, 13(1) और 18 के तहत भी उन्हें सजा दी गई है. हालांकि अदालत ने दोनों को UAPA की धारा 20 यानी आतंकी संगठन का सक्रिय सदस्य होने के आरोप से बरी कर दिया था.
दोषियों को अलग-अलग धाराओं में दो से पांच साल तक की सजा सुनाई गई थी और सभी सजाएं साथ-साथ चलेंगी. अदालत ने आरोपियों पर जुर्माना भी लगाया था. इस फैसले को सुरक्षा एजेंसियों के लिए बड़ी सफलता माना जा रहा है, क्योंकि जांच में कई गंभीर डिजिटल और वित्तीय सबूत सामने आए थे.
जांच के मुताबिक पहला धमकी भरा फोन 14 जनवरी 2023 को नागपुर स्थित गडकरी के जनसंपर्क कार्यालय में आया था. कॉल करने वालों ने खुद को दाऊद इब्राहिम गैंग से जुड़ा बताते हुए 100 करोड़ रुपये की मांग की थी. उस समय दोनों आरोपी कर्नाटक के बेलगावी स्थित हिंदालगा सेंट्रल जेल में बंद थे.
इसके बाद 21 मार्च 2023 को दूसरा कॉल आया था, जिसमें 10 करोड़ रुपये नहीं देने पर मंत्री की हत्या और बम धमाका करने की धमकी दी गई थी. इन धमकियों के बाद नागपुर के धंतोली पुलिस थाने में दो अलग-अलग मामले दर्ज किए गए थे. पुलिस जांच में पता चला कि आरोपी जेल के अंदर अवैध रूप से मोबाइल फोन और सिम कार्ड का इस्तेमाल कर रहे थे.
पुलिस ने कॉल डिटेल रिकॉर्ड, इलेक्ट्रॉनिक सबूत, बैंक ट्रांजैक्शन, जेल रिकॉर्ड और गवाहों के बयानों के आधार पर पूरी साजिश का खुलासा किया था. जांच में यह भी सामने आया कि जेल के भीतर से गैरकानूनी आर्थिक लेनदेन किए जा रहे थे. इस मामले में अफसर पाशा का आतंकी बैकग्राउंड जांच एजेंसियों के लिए सबसे बड़ी चिंता बना गया था.
मामले का तीसरा आरोपी मोहम्मद शाकिर अभी फरार है और उसके खिलाफ CrPC की धारा 299 के तहत चार्जशीट दाखिल की जा चुकी है. खास बात यह रही कि अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश अनिल कुमार के. शर्मा की अदालत ने इस हाई-प्रोफाइल मामले की सुनवाई महज 55 दिनों में पूरी कर ली थी, जिसमें कुल 67 गवाहों के बयान दर्ज किए गए थे.