बॉम्बे हाई कोर्ट ने चर्चित क्रूज़ ड्रग केस और उससे जुड़े रिश्वत कांड के मामले में आरोपी समीर वानखेड़े को बड़ा झटका दिया है. हाई कोर्ट ने विवादित अधिकारी समीर वानखेड़े को राहत देने से साफ इनकार कर दिया. इस मामले में वानखेड़े कोर्ट में कुछ अहम दस्तावेज पेश करना चाहते थे, लेकिन अदालत ने उन्हें इसकी इजाजत नहीं दी. इस फैसले से एक बार फिर ये पूरा मामला सुर्खियों में आ गया है.
दरअसल, यह पूरा मामला ग्लोबल सुपर स्टार शाहरुख खान के बेटे आर्यन खान से जुड़ा है. साल 2021 में हुए कॉर्डेलिया क्रूज़ ड्रग केस में आर्यन खान की गिरफ्तारी के बाद यह मामला देशभर में चर्चा का विषय बन गया था. इसी केस के दौरान समीर वानखेड़े पर 25 करोड़ रुपये की रिश्वत मांगने का आरोप लगा था, जिसकी जांच अब केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) कर रही है.
हाई कोर्ट में वानखेड़े की ओर से पेश हुए वकील आबाद पोंडा ने कहा कि वे आर्यन खान का अरेस्ट मेमो रिकॉर्ड में लाना चाहते हैं. यह दस्तावेज उस समय तैयार किया गया था, जब 2021 में आर्यन को गिरफ्तार किया गया था. अरेस्ट मेमो एक कानूनी दस्तावेज होता है, जो गिरफ्तारी के दौरान तैयार किया जाता है और इसमें पूरी प्रक्रिया का विवरण होता है.
इस केस में आर्यन खान पर NDPS एक्ट की धारा 27 के तहत कार्रवाई की गई थी. इस धारा के तहत कम मात्रा में नशीले पदार्थ के सेवन पर सजा का प्रावधान है. इसमें छह महीने तक की जेल, 10 हजार रुपये तक का जुर्माना या दोनों सजा हो सकती है. हालांकि, बाद में इस केस में कई नए मोड़ भी आए.
वानखेड़े की ओर से पेश किए जाने वाले दूसरे दस्तावेज उनके और नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (NCB) के वरिष्ठ अधिकारियों के बीच हुई व्हाट्सएप चैट से जुड़े थे. वकील का कहना था कि इन चैट्स से यह साबित होगा कि वानखेड़े ने जो भी कार्रवाई की, वह अपने वरिष्ठ अधिकारियों के निर्देश पर की थी. लेकिन अदालत इस दलील से संतुष्ट नहीं हुई.
मुख्य न्यायाधीश श्री चंद्रशेखर और न्यायमूर्ति सुमन श्याम की पीठ ने साफ कहा कि इस तरह के दस्तावेजों को इस स्तर पर स्वीकार नहीं किया जा सकता. उन्होंने स्पष्ट कहा कि अरेस्ट मेमो के आधार पर FIR को खारिज नहीं किया जा सकता. कोर्ट ने वानखेड़े को सलाह दी कि वे ट्रायल कोर्ट में अपनी दलीलें रखें. हाईकोर्ट ने यह भी कहा कि इस तरह के दस्तावेजों की व्याख्या हो सकती है, इसलिए इन्हें निर्विवाद सबूत नहीं माना जा सकता. खासकर व्हाट्सएप चैट्स को अदालत ने पूरी तरह खारिज कर दिया.
पोंडा ने यह भी दलील दी कि दो साल बीत जाने के बावजूद CBI ने अभी तक चार्जशीट दाखिल नहीं की है. ऐसे में उनके पास कोई ऐसा मंच नहीं है, जहां वे अपनी बात रख सकें. इस पर अदालत ने कहा कि प्रक्रिया के तहत ही आगे बढ़ना होगा और नियमों से बाहर जाकर कोई राहत नहीं दी जा सकती. कोर्ट ने यह भी कहा कि वानखेड़े की याचिका में पहले ही कई बार संशोधन किए जा चुके हैं. ऐसे में अब नए दस्तावेज जोड़ने की अनुमति देना उचित नहीं होगा.
अदालत ने साफ किया कि FIR को चुनौती देने के लिए उसी के दायरे में रहना जरूरी है. पीठ ने लंबित मामलों पर भी चिंता जताई. अदालत ने कहा कि मामलों का सालों तक लंबित रहना समाज के लिए अच्छा संकेत नहीं है. इससे आम लोगों को न्याय मिलने में देरी होती है. कोर्ट ने संकेत दिया कि इस मामले की जल्द सुनवाई की जाएगी.
गौरतलब है कि 2021 में NCB की टीम ने कॉर्डेलिया क्रूज़ पर छापा मारा था. इस दौरान कुछ लोगों के पास से ड्रग्स मिलने का दावा किया गया था. आर्यन खान के पास से कोई ड्रग्स नहीं मिला था, लेकिन उनके फोन में पुराने चैट्स के आधार पर उन्हें भी केस में शामिल किया गया.
इस पूरे मामले में वानखेड़े और चार अन्य लोगों पर आरोप है कि उन्होंने शाहरुख खान से 25 करोड़ रुपये की रिश्वत मांगने की कोशिश की थी, ताकि उनके बेटे को इस केस में फंसाया न जाए. हालांकि, वानखेड़े लगातार इन आरोपों से इनकार करते रहे हैं. अब कोर्ट के इस फैसले के बाद यह साफ हो गया है कि उन्हें अपनी लड़ाई ट्रायल कोर्ट में ही लड़नी होगी.