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सिया, सोनम, मुस्कान... मंगेतर और पत्नियों के खूनी इरादों ने बर्बाद कर दिए परिवार! सजा भुगतते हैं मां-बाप

सिया ने केतन का मर्डर करके सिर्फ एक जान नहीं ली, बल्कि तीन परिवारों की जिंदगी बर्बाद कर दी. केतन के माता-पिता बेटे को खोने का दर्द झेल रहे हैं, जबकि सिया और चेतन के माता-पिता अपने बच्चों के गुनाह का कलंक साथ लेकर हर दिन जीने को मजबूर हैं. जानिए इस दर्दनाक कहानी का दूसरा पहलू.

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सिया की करतूत का खामियाजा उसके माता-पिता भुगतेंगे (फोटो-ITG)
सिया की करतूत का खामियाजा उसके माता-पिता भुगतेंगे (फोटो-ITG)

Ketan Agarwal murder case: ना जाने कितने ही बच्चों के मां-बाप रोते ही रह जाएंगे. उन बच्चों के मां-बाप तो रोएंगे ही रोएंगे जिनका बच्चा उनसे छीन लिया गया. लेकिन वो मां-बाप भी कम नहीं रोएंगे जिनके बच्चों ने दूसरों के बच्चों को छीन लिया. दोनों ही तरह के मां-बाप के लिए दर्द बेशक जुदा-जुदा हो पर दोनों की ही टीस एक जैसी है. केतन से लेकर राजा रघुवंशी और साहिल तक के मां-बाप आज भी अपने बच्चे को खोकर उसी दर्द और ग़म में जी रहे हैं. 

लेकिन यक़ीन मानिए सिया से लेकर सोनम और मुस्कान के मां-बाप भी हर रोज़ घुट-घुट कर जीनो को मजबूर हैं. ये हर रोज़ जीते हैं, हर रोज़ मरते हैं. गुनाह इनके बच्चों ने किए. सज़ा बेकसूर मां-बाप भुगत रहे हैं. ऊपर जितने भी नाम लिए उनमें से हर गुनहगार को क़ानून सज़ा दे देगा. लेकिन ऐसे क़ातिल बच्चों के बेकसूर मां-बाप का क्या गुनाह जिसकी सज़ा वो हर रोज़ काटते हैं.

सिया के पापा प्रवीण गोयल पुणे के एक अस्पताल में भर्ती हैं. जिस दिन और जिस पल जैसे ही इन्हें पता चला कि इनकी बेटी सिया को अपने मंगेतर केतन के क़त्ल के इल्ज़ाम में पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है, ये उसी वक्त बेहोश हो गए थे. इन्हें फ़ौरन अस्पताल ले जाया गया. एक दिन पहले ही अस्पताल के आईसीयू से जनरल वॉर्ड में शिफ्ट हुए हैं. प्रवीण गोयल की पत्नी और सिया की मां पूजा गोयल अस्पताल में पति की देखभाल कर रही हैं. 

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ज़ाहिर है ये दोनों इस वक़्त आज़ाद हैं. क्योंकि केतन का क़त्ल इन्होंने नहीं किया. इनकी बेटी सिया ने किया, जो अब पुलिस कस्टडी में है. दिल पर हाथ रखकर बताइएगा कि सिया के मां-बाप की आगे की पूरी ज़िंदगी क्या 18 जून से पहले वाली ज़िंदगी की तरह होगी? क्या दोनों अपने शहर, अपनी बस्ती, अपने दफ़्तर, अपनी दुकान, या अपने घर में, दोस्तों, रिश्तेदारों, पड़ोसियों यानि पूरे समाज के सामने कभी सिर उठा कर जी पाएंगे. बिल्कुल नहीं. 

हमारा समाज ही ऐसा है. अब ये दोनों जब तक जिएंगे बेकसूर होने के बावजूद बेटी के क़ातिल होने का एक पूरा बोझ अपने सिर पर लेकर जिएंगे. जिएंगे क्या हर रोज़ मरेंगे. इनका कोई कसूर नहीं है. पर सबसे बड़ा कुसूर है. कुसूर सिया के मां-बाप होने का. वरना भला एक मां या एक बाप कैसे अपनी बेटी के लिए मौत मांगने की बात करता.

बेशक मौत केतन की हुई है लेकिन पहाड़ एक साथ तीन घरों पर टूटा है. केतन के घर इसलिए मातम पसरा है क्योंकि घर का साढ़े 25 साल का चिराग बेवक्त बुझा दिया गया. सिया के घर और मां-बाप इसलिए सदमें में हैं कि जिस बेटी ने कभी अपने पापा से झूठ तक नहीं बोला पुलिस ने उसी सिया के हाथों पर उसी के मंगेतर केतन का ख़ून देख लिया. सिया के साथ केतन का क़त्ल करने वाले आरोपी नंबर दो चेतन के पिता और चाचा इस बात पर हैरान है और ख़ुद को कोस रहे हैं कि चेतन और सिया के रिश्ते की कहानी पहले कभी वो सुन क्यों नहीं पाए. ना चेतन ने कभी अपने घर सिया का सच बताया. ना सिया ने कभी अपने घर चेतन का सच बताया. और केतन के घर वाले कभी इन दोनों का सच जान पाए. जब ये सच सामने आया तो एक साथ तीन परिवारों को ऐसा मार गया कि अब उनके लिए हर लम्हा गुज़ारना ऐसा हो गया है, जैसे एक लम्हें में पूरी उम्र बीती जा रही हो.

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एक सच हमेशा याद रखिएगा कभी कोई मां-बाप अपने बच्चे को किसी की जान लेना नहीं सिखाते. पर एक सच ये भी है कि घर के बाहर बच्चे क्या करते हैं ज़्यादातर मां-बाप को ये मालूम ही नहीं होता. दुनिया के कौन से ऐसे मां-बाप होंगे जिनका बेटा या बेटी घर के बाहर ग़लत रास्ते पर जा रहे हों और उसे जानने के बाद भी उन्हें ना रोकें.

शायद सोनम के मां-बाप को भी सोनम की असलियत पता नहीं थी. मुस्कान के मां-बाप भी उसकी मुस्कान के पीछे की हक़ीकत नहीं जान पाए होंगे. सिया के मां-बाप को भी सिया पर शक कैसे होता? जब सिया की शादी तय हुई तब सबसे ज़्यादा ख़ुश तो वही थी. केतन से रिश्ता तय करने से पहले मां-बाप ने सिया से पूछा भी था.

सिया घर के बाहर जो कुछ कर रही थी ज़ाहिर है उसके घरवालों को शायद पता नहीं था. फिर केतन के घरवाले भी सिया पर शक कैसे करते क्योंकि अग्रवाल और गोयल परिवार के बीच 35 साल पुरानी दोस्ती थी. एक तरह से पारिवारिक रिश्ता था. इन बूढ़ी आंखों और लड़खड़ाती ज़ुबान को अब भी समझ नहीं आ रहा है कि भला 35 साल पुराने रिश्तों की कोई कैसे चौकसी कर सकता है. यानि कैसे शक कर सकता है. कैसे निगेहबानी कर सकता है.

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जब केतन और सिया का रिश्ता तय हो चुका था. फरवरी में सगाई हो चुकी थी. तब अग्रवाल और गोयल परिवार और भी क़रीब आ चुके थे. सिया के पापा को भी ऐसा लगा जैसे केतन की शक्ल में उन्हें एक और बेटा मिल गया है. उधर, सिया भी गाहे-बगाहे केतन के घर जाने लगी थी. रिश्ते और मज़बूत हो रहे थे. केतन और सिया के रिश्ते ने एक साथ दोनों घरों को खुशियों से भर दिया था. 

मग़र ये दोनों ही घर इस बात से अनजान थे कि इसे पुणे शहर में एक और घर में भी सिया की एक अलग कहानी लिखी जा रही है. वो घर चेतन का था. चेतन जिसे आप सिया का दोस्त या प्रेमी कुछ भी कह सकते हैं. लेकिन अफसोस चेतन के मां-बाप भी चेतन और सिया की कहानी से अनजान थे. यहां तक की जिस 18 जून को केतन का क़त्ल हुआ उस दिन चेतन सुबह अपनी मां को ये कहकर घर से निकला था कि वो एक मीटिंग में जा रहा है और 2, 3 बजे तक लौट आएगा.

यानि इस पूरी कहानी से साफ है कि ऐसी हर कहानी की तरह इस कहानी में भी सिया और चेतन के रिश्ते को लेकर केतन और केतन के घरवालों के साथ साथ खुद चेतन और सिया के मां-बाप भी शायद अनजान थे. सिया के माता-पिता का कहना है कि अपना बर्थडे केतन के साथ मनाने के लिए जिस तरह सिया शॉपिंग कर रही थी. अपने कपड़े ख़ुद से ऑलट्रेशन कराने में दो-दो घंटे लगा रही थी. उससे शक की कोई गुंजाइश बची कहां थी?

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इत्तेफ़ाक देखिए जिस दिन बकौल पुलिस सिया ने चेतन के साथ मिलकर केतन को खाई में धक्का दिया था, उसके अगले ही दिन यानि 19 जून को सिया 20 साल की हुई थी. 20वां बर्थडे था उसका. केतन के पिता को अब भी यक़ीन नहीं हो रहा कि 20 साल की एक लड़की के दिमाग़ में इतना सब कुछ कहां से आ सकता है. यही सवाल ख़ुद सिया के पापा भी ख़ुद से पूछ रहे हैं. उन्हें अब भी लगता है कि सिया ऐसा कर ही नहीं सकती. क्योंकि उन्होंने कभी ऐसा संस्कार उसे दिया ही नहीं.

अपने जवान बेटे को खोने वाले केतन के पिता का सबसे बड़ा दर्द ये है कि अगर सिया को शादी नहीं करनी थी, या शादी किसी और से करनी थी तो वो बस एक बार बता देती. वो ख़ुद ही शादी कैंसिल कर देते. बेटे की जान तो बच जाती. और तो और केतन के पिता ने तो यहां तक कहा कि अगर सिया को चेतन से शादी करनी ही थी तो भाग कर कर लेती. तब भी उनके बेटे की जान बच जाती.

जानते हैं दुनिया के सबसे मुश्किल सवालों में से एक कौन सा सवाल होता है. किसी मां-बाप से सीधे ये पूछना कि आपकी बेटी ने अपने ही मंगेतर का क़त्ल किया है तो आप क्या कहेंगे. सिया की मां ने जो कहा सो कहा. सिया के पापा ने जो कहा इससे ज़्यादा एक बाप कुछ नहीं कह सकता.

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क़ानूनी शिनाख़्त के नियम क़ायदे किनारे रख दें तो पुलिस हिरासत में मौजूद सिया और चेतन ने अपना चेहरा ढका हुआ था. जेल जाने के बाद दोनों के चेहरे से नकाब भी हट जाएंगे. कुछ बरस दोनों जेल में रहेंगे. और क्या पता फिर आज़ाद भी हो जाएं. पर इन दोनों ने जो ज़ख़्म एक साथ इन तीन परिवारों को दिए हैं, ये मां-बाप उस दर्द से ताउम्र कभी आज़ाद नहीं हो पाएंगे. 

एक तरफ़ अग्रवाल परिवार को अपने लाडले केतन की जुदाई मारेगी, तो दूसरी तरफ बेटी का कलंक गोयल परिवार को शायद फिर कभी सिर उठाने का मौका भी ना दे. चेतन के घर की कहानी भी कुछ अलग नहीं होगी. यानि चाहे जान किसी की जाए, जान कोई भी ले, रोना मां-बाप को ही होता है. चाहे वो क़ातिल के मां-बाप हो या मक़तूल के.

(पुणे से श्रीकृष्ण पांचाल के साथ ओमकार वाबले का इनपुट)

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