मुंबई के जुहू इलाके में रोहित शेट्टी के घर पर हुई फायरिंग के मामले में जैसे-जैसे जांच आगे बढ़ रही है, पूरी साजिश का खुलासा होता जा रहा है. पुलिस जांच में सामने आया है कि इस वारदात में गिरफ्तार सभी आरोपी फरार मोस्ट वांटेड गैंगस्टर शुभम लोनकर के निर्देश पर काम कर रहे थे. पुलिस के मुताबिक, वही इस फायरिंग केस का मास्टरमाइंड है.
इस हाई-प्रोफाइल केस की जांच कर रहे पुलिस अधिकारी कदम ने बताया कि लॉरेंस बिश्नोई गैंग से जुड़ा शुभम लोनकर पहले से ही कई बड़े मामलों में मोस्ट वांटेड है. वह एनसीपी नेता बाबा सिद्दीकी की हत्या और अभिनेता सलमान खान के घर पर हुई फायरिंग के मामले में भी वांटेड है. उन्होंने बताया कि वो इन दोनों मामलों में भी साजिशकर्ता की भूमिका में रहा है.
शुभम लोनकर मूल रूप से पुणे का रहने वाला है. वो पिछले छह साल से लॉरेंस बिश्नोई गैंग का सक्रिय सदस्य है. बताया जा रहा है कि राजस्थान में एक इवेंट के लिए वो राजस्थान गया था. इसी समय वो लॉरेंस के गुर्गों के संपर्क में आया था. इसके बाद सोशल मीडिया के जरिए उसकी गोल्डी बराड़ और अनमोल बिश्नोई से बातचीत कराई गई थी. इसके बाद से वो उनके लिए काम करने लगा.
पुलिस जांच में यह भी सामने आया है कि आरोपियों ने आपसी संपर्क के लिए सिग्नल ऐप का इस्तेमाल किया था. लेकिन इस वारदात के बाद ऐप को डिलीट कर दिया गया. अब पुलिस डिलीट किए गए डेटा को रिकवर करने की कोशिश कर रही है, ताकि साजिश से जुड़े अहम डिजिटल सबूत जुटाए जा सकें. गुरुवार को सभी आरोपियों को कोर्ट में पेश किया गया.

इस दौरान जांच अधिकारी ने बताया कि यह पूरी घटना पहले से प्लान की गई थी. आरोपियों ने पहले गाड़ी खरीदी और फिर फायरिंग से ठीक पहले हथियारों का इंतजाम किया गया. आरोपी आसाराम फासले उर्फ बाबू पर फायरिंग में इस्तेमाल किए गए हथियार सप्लाई करने का आरोप है.
इस केस में गिरफ्तार आरोपी आदित्य ज्ञानेश्वर गायकी, सिद्धार्थ दीपक येनपूरे, समर्थ शिवशरण पोमाजी और स्वप्निल बंदू सकट ने पूरी साजिश में साथ दिया था. पुलिस का कहना है कि इन आरोपियों ने फरार शूटर को लॉजिस्टिकल सपोर्ट दिया था. शूटर की तलाश अब भी जारी है. जांच के दौरान आरोपी स्वप्निल सकट से अवैध हथियार बरामद किए गए हैं, जिनमें एक पिस्टल, तीन मैगजीन और एक एयरगन शामिल है.

इस मामले की सुनवाई के दौरान कोर्ट ने कहा कि आरोप गंभीर प्रकृति के हैं और एक संगठित आपराधिक साजिश की आशंका है. कोर्ट ने कहा कि केस डायरी से जांच में प्रगति साफ दिखाई देती है और साजिश के पूरे नेटवर्क को समझने के लिए आरोपियों की संयुक्त पूछताछ जरूरी है.
इसी आधार पर कोर्ट ने सभी आरोपियों को 11 फरवरी तक पुलिस हिरासत में भेज दिया. इससे पहले एडिशनल पब्लिक प्रॉसिक्यूटर ने भी दलील दी थी कि आरोपियों को आमने-सामने बैठाकर पूछताछ जरूरी है. वहीं बचाव पक्ष की ओर से पेश वकीलों ने दावा किया कि आरोपी कम उम्र के हैं. उन्हें मौके से गिरफ्तार नहीं किया गया. केवल शक के आधार पर गिरफ्तारी हुई है.