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न गवाह, न चश्मदीद, ऊपर से सिया-चेतन के झूठ... कैसे सुलझेंगे केतन मर्डर केस के अनसुलझे सवाल?

केतन अग्रवाल मर्डर केस में पुणे पुलिस के सामने सबसे बड़ी चुनौती बिना चश्मदीद गवाह और ठोस सबूत के सिया और चेतन के खिलाफ हत्या का आरोप साबित करना है. इस केस की कानूनी पेचीदगियां और जांच की कमजोर कड़ियों को जानने के लिए पढ़ें पूरी कहानी.

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इस मामले की जांच में पुलिस के सामने कई सवाल है (फोटो-ITG)
इस मामले की जांच में पुलिस के सामने कई सवाल है (फोटो-ITG)

राजा रघुवंशी मर्डर केस में तो कानून की एक छोटी सी गलती से सोनम आजाद हो गई. मगर क्या सिया को पुणे पुलिस केतन के कत्ल के इलजाम में सजा दिला पाएगी? ये सवाल इसलिए है क्योंकि केतन मर्डर केस में पलिस के पास सिवए सिया और चेतन के बयान के ऐसा एक भी पुख्ता सबूत या गवाह नहीं है जो ये साबित कर सके कि केतन को सिया या चेतन ने धक्का देकर खाई में गिराया था. सिया और चेतन को छोड़िए पुलिस के लिए फिलहाल य़ही साबित करना मुश्किल है कि केतन खुद फिसल कर अनजाने में खाई में जा गिरा था या उसे धक्कर गिराया गया था.

इस केस को कानूनी नुक्ता-नज़र से समझने के लिए जरूरी है पहले ये समझा जाए कि पुणे पुलिस के पास अभी क्या क्या है और पुलिस किन-किन सबूतों को सामने रख कर मामले की जांच कर रही है. तो फिलहाल पुलिस के पास सिया और चेतन हैं. जिनसे पूछताछ की जा रही है. इन दोनों के अलावा क्राइम सीन का रिएक्रिशन, सीसीटीवी में कैद बिना चेहरे के हुडी में चेतन, चेतन-सिया के कॉल डिटेल, डीलीटेड मैसेज, मोबाइल डेटा और केतन चेतन और सिया के घर वालों के बयान हैं. पर जो सबसे अहम चीज मिसिंग है वो है चश्मदीद. 

यानी कोई ऐसा गवाह जिसने 18 जून की सुबह केतन को खाई में धक्का देते सिया या चेतन को देखा हो. वारदात के 12 दिन बाद भी ऐसा कोई भी गवाह अब तक सामने नहीं आया है. ना ही किसी के सामने आने की उम्मीद है. जिस जगह से केतन को धक्का दिया गया वहां कोई सीसीटीवी कैमरा भी नहीं था. अब बिना चश्दीद के पुलिस क्या क्या करेगी या कर सकती है? ऐसे केस में अमूमन हर पुलिस सरकम्सटैंशल एविडेंस यानी परिस्थिजन्य सबूतों को ही अपना आखिरी हथियार बनाती है. यानी हालात के हिसाब से बाकी सबूतों की कड़ियों को जोड़ कर एक पूरी कहानी तैयार करना. 

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शर्त ये है कि इस कहानी में कहीं झोल नहीं होनी चाहिए. कहानी का सिरा शुरू से आखिर तक एक-दूसरे से जुड़ा होना चाहिए. ऐसे कई केस पहले हुए हैं, जिनमें बिना गवाह या ठोस सबूत के सिर्फ सरकम्सटैंशल एविडेंस यानी परिस्थिजन्य सबूतों के आधार पर ही मुजरिमों को सजा दी गई है. पर उन केसों में कहानी और कत्ल का मकसद बेहद मजबूत था. पर आरुषि जैसे केस भी हुए हैं, जिनमें कोई चश्मदीद नहीं था बस कहानी ही कहानी थी. मगर उस कहानी की कड़ियां पुलिस या सीबीआई आपस में जोड़ने में नाकाम रहीं जिसकी वजह से आरुषि का कातिल आज भी आज़ाद है.

केतन के केस में पुलिस जिस एंगल से अपनी जांच को आगे बढ़ा रही है, उसमें सबसे जरूरी मोटिव यानी कत्ल का मकसद पहले दिन से ही एक ही है. और वो ये है कि सिया केतन से नहीं चेतन से प्यार करती थी और चेतन से ही शादी करना चाहती थी. लेकिन घर वालों ने उसकी मर्जी के खिलाफ केतन से उसका रिश्ता तय कर दोनों की सगाई भी कर दी. 

सिया और चेतन की कॉल ड़िटेल, मैसेज, दोनों के मिलने-जुलने और कई लोगों के बयान को पकड़ा कर पुणे पुलिस बड़ी आसानी चेतन और सिया के रिश्ते साबित कर देगी. शायद खुद सिया और चेतन भी अपने रिश्ते की बात कबूत कर लें. मगर चेतन और सिया प्यार करते थे और सिया चेतन से शादी नहीं करना चाहती थी बस इस बात पर उसने केतन को मार डाला इसे पुणे पुलिस कैसे साबित करेगी? 

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18 जून की सुबह यानी हादसे वाले दिन सिया केतन के साथ थी जब केतन खाई में गिरा सिर्फ इस बात पर सिया को केतन का कातिल नहीं ठहराया जा सका. वो ये कह कर बच सकती है कि वो तो 18 जून को लोहगढ़ किला जाना ही नहीं चाहती थी बल्कि उसे खुद केतन जिद करके अपने साथ ले गया. सिया की मां तो इस बात के सबूत अभी से मीडिया को दिखा रही हैं. अब अगर कोर्ट में ये साबित हो गया कि केतन की वजह से ही सिया उस दिन पहाड़ पर गई थी तो सिया की केतन को खाई में गिरा कर मारने वाली साजिश की थ्योरी तो वैसे ही फेल जाएगी.

पुणे पुलिस के रीक्रिएशन या डमी ट्रायल से भी ना कुछ फायदा होने वाला ना नए सबूत मिलने वाले हैं. पहाड़ी से धक्का देने की वजह से केतन गिरा या फिसलने की वजह से गिरा, दोनों सूरत में बॉडी कहां और कितनी दूर गिरी ये सौ फीसदी कोई भी रीक्रिएशन सच नहीं बता सकती. एक ही आदमी को अगर आप एक लही जगह से पांच बार धक्का देकर गिराएं या पांच बार फिसल कर वो गिरे तो जरूरी नहीं हर बार एक ही जगह पर जाकर वो गिरेगा.

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किले पर 18 जून को चेतन की मौजूदगी साबित हो भी जाए तो भी पुणे पुलिस के लिए ये साबित करना टेढ़ी खीर साबित होगी कि वो केतन को मारने के इरादे से ही वहां आया था. खुद केतन के पिता ने ये बात कही है कि सिया 19 जून को अपने बर्थडे से एक दिन पहले 18 जून को ये कह कर केतन को अपने साथ किले पर ले गई थी कि वो अपने दोस्तों के साथ पार्टी करना चाहती है. सिया और चेतन बड़ी आसानी से कह सकते हैं कि केतन को मालूम था कि चेतन भी वहां आएगा. क्योंकि चेतन ना सिर्फ सिया का बल्कि सिया के भाई साहिल का भी दोस्त है.

यानी सिर्फ चेतन और सिया की दोस्ती या केतन से शादी ना करने की सिया की कोशिश को केतन के कत्ल का मोटिव ठहरा कर दोनों को सजा दिलाना इतना आसान नहीं होगा. इसके लिए केतन के कत्ल की प्लानिंग की तमाम कड़ियों को भी जोड़ना पड़ेगा. शायद पुणे पुलिस को इस बात का अहसास है. इसीलिए पुणे पुलिस खास कर सिया का लाई डिटेक्टर टेस्ट करान चाहती है. यानी उसे झूठ पकड़ने वाली मशीन के सामने बिठाना चाहती है. हालांकि इसके लिए पुलिस को ना सिर्फ अदालत की इजाजत लेनी होगी बल्कि खुद सिया की भी इजाजत जरूरी है.

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मान लीजिए लाई डिटेक्टर टेस्ट हो भी गया को अदालत में उस टेस्ट रिपोर्ट की कोई मान्यता नहीं है. ठीक वैसे ही जैसे अभी सिया या चेतन पुलिस कस्टडी में जो बी बयान दे दें, चाहे अपना जुर्म ही कबूल कर लें, मगर ये कोर्ट में मान्य नहीं होगा. अलबत्ता लाई डिटेक्टर टेस्ट से कुछ नए सबूत पुलिस जरूर निकाल सकती है. यानी ये केस पुणे पुलिस के लिए इतना आसान नहीं होने वाला. खास कर बिना चश्मदीद और कत्ल के मकसद को बिना मजबूत कड़ियों के साथ जोड़े. वर्ना केतन की कहानी सिर्फ पुलिस और मीडिया की कहानी बन कर ही रह जाएगी.

इधर, केस के बाहर इस केस से जुड़ी एक और नई जानकारी सामने आई है. पता चला है कि सिया और केतन की शादी के बाद सिया के भाई साहिल और केतन की बहन की शादी की भी बात चल रही थी. दोनों घर वाले इस बारे में बात भी कर रहे थे. इसलिए 6 जून को जब प्री वेडिंग शूट के लिए केतन और सिया बाली जा रहे थे, तब साहिल और केतन की बहन भी साथ जा रही थीं. सिया के भाई की शादी को लेकर केतन के घर वालों से बात का इशारा खुद सिया के पिता ने भी दिया था.

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हालांकि, अभी पुणे पुलिस के पास इस केस में चार्जशीट दाखिल करने के लिए अच्छा खासा वक्त है. लेकिन इस बीच सिया की वजह से लौहागढ़ किला अचानक फेमस हो गया है. 23 जून यानी जब पहली बार केतन के कत्ल का खुलासा हुआ उसके बाद से वहां आने वाले लोगों की तादाद अचानक बढ़ गई है. ज्यादातर लोग खास उस जगह को देखने आ रहे हैं जहां से केतन को खाई में धक्का दिया गया था. लोगों ने अपने आप इस जगह का नाम भी रख दिया है- सिया प्वाइंट.

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