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ISI की साजिश या फर्जी एनकाउंटर? गुरदासपुर डबल मर्डर के बाद 19 साल के रंजीत की मौत पर उठे सवाल

गुरदासपुर के आदियां गांव में दो पुलिसकर्मियों की हत्या के बाद ISI की साजिश की कहानी और 19 वर्षीय रंजीत के एनकाउंटर पर सवाल उठ रहे हैं. रंजीत की मौत को गांववाले फर्जी मुठभेड़ करार दे रहे हैं. गांव वालों ने इस मामले में CBI जांच की मांग की है. पढ़ें पूरी इनसाइड स्टोरी.

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रंजीत की मौत के बाद गांववालों का गुस्सा बढ़ता जा रहा है (फोटो-ITG)
रंजीत की मौत के बाद गांववालों का गुस्सा बढ़ता जा रहा है (फोटो-ITG)

Ranjit Encounter Case Punjab: पंजाब के गुरदासपुर के आदियां गांव में मौजूद एक साधारण सी दिखने वाली पुलिस चौकी इन दिनों पूरे राज्य में चर्चा का केंद्र बनी हुई है. पाकिस्तान की सरहद से महज कुछ दूर इस चौकी पर तैनात दो पुलिसकर्मियों की गोली मारकर हत्या कर दी गई. पंजाब पुलिस ने इस डबल मर्डर के पीछे पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी ISI का हाथ बताते हुए तीन स्थानीय युवकों को आरोपी बनाया. लेकिन 72 घंटे के भीतर केस सुलझाने और 19 साल के रंजीत के एनकाउंटर में मारे जाने के बाद अब इस पूरी कहानी पर सवाल उठ रहे हैं. गांव वाले इसे फर्जी एनकाउंटर बताते हुए CBI जांच की मांग कर रहे हैं.

गुरदासपुर के आदियां गांव की पुलिस चौकी से पाकिस्तान बॉर्डर की दूरी लगभग 1 किलोमीटर है. चौकी के नाम पर बस चार दीवार खड़ी कर दी गई हैं और ऊपर एक छत डाल दी गई. दीवारों पर प्लास्टर तक नहीं है. सरसरी क्या गहरी नजर से भी कोई देखे, तो सोच नहीं सकता कि वो कोई पुलिस चौकी है. पर ये वही चौकी है, जिसे पंजाब पुलिस और सरहद पर तैनात बीएसएफ मिल कर चलाते हैं. उस चौकी में अलग-अलग शिफ्ट में बीएसएफ और पंजाब पुलिस के पांच जवान ड्यूटी पर होते हैं. इनमें से 3 पंजाब पुलिस के और दो बीएसएफ के. चौक इंचार्ज पंजाब पुलिस का एएसआई यानी असिस्टेंट सब इंस्पेक्टर होता है. साथ में होम गार्ड के जवान रहते हैं. 

अब जरा सोचिए कि इस चौकी के एक एएसआई या होमगार्ड को मार या मरवा कर पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी आईएसआई पूरे पंजाब में कैसे अराजकता फैला सकती है? तो फिर पंजाब पुलिस दो पुलिस वालों की मौत को लेकर आईएसआई पर इल्जाम क्यों लगा रही है?

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चलिए फिर भी मान लेते हैं कि इस चौकी के दो पुलिस वालों को मारने के पीछे आईएसआई का ही हाथ है. तो क्या आईएसआई दो पुलिस वालों के कत्ल के लिए तीन लोकल लड़कों को महज 1-1 हजार यानी कुल तीन हजार रुपये पेशगी के तौर पर देगी? दो पुलिसवालों की सुपारी की ये रकम हम नहीं गिनवा रहे, बल्कि ये तो पंजाब पुलिस खुद रिकॉर्ड पर कह रही है.

खैर, यहां तक तो आईएसआई की कहानी रही. बाकी बातें आगे. उससे पहले जरा ये जान लीजिए कि चौकी के दो पुलिस वालों के कत्ल के महज 72 घंटे के अंदर इस केस को सुलझा कर पंजाब पुलिस ने खुद कैसे अपनी पीठ थपथपाई. कई टीमें काम पर लगी और बड़ी गहराई से जांच की बात कही गई.

पंजाब पुलिस की कहानी के मुताबिक, जब दो पुलिस वालों के कत्ल के मामले की जांच शुरू हुई, तो उनके सामने आरोपी कातिल के तौर पर तीन नाम आए. एक रंजीत, दूसरा दिलावर और तीसरा इंद्रजीत. ये तीनों लड़के लोकल थे. यानी आदियां और आस-पास के रहने वाले. बकौल पंजाब पुलिस चौकी में दो पुलिस वालों की हत्या के बाद पुलिस ने 24 फरवरी की शाम इनमें से दो रंजीत और दिलावर को गांव से उठा लिया.

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पंजाब पुलिस ने उठाया था दो लड़कों को, लेकिन रात के तीन बजे पता नहीं क्यों और किस मकसद से इन दो में से एक रंजीत को किसी जगह ले जा रहे थे. सबूत या हथियार की बरामदगी के लिए और उसी रात 3 बजे अचानक पंजाब पुलिस में शायद यूपी पुलिस की आत्मा आ जाती है. यूपी पुलिस की आत्मा आते ही अचानक पंजाब पुलिस की भी गाड़ी पलट जाती है. 

तब तक रंजीत पुलिस की गाड़ी में हथकड़ियों में जकड़ा हुआ था और कहने की जरूरत नहीं है कि गिरफ्तारी के बाद किसी मुल्जिम के पास कोई हथियार तो हो नहीं सकता. तो यहां होता ये है कि बकौल पंजाब पुलिस गाड़ी पलटते ही रंजीत मौके से भाग निकलता है.

किसी फिल्मी स्क्रिप्ट की तरह अब पंजाब पुलिस की आगे की कहानी सुनिए. रंजीत के भागते ही अचानक आस-पास की सारी पुलिस टीम को एक जगह इकट्ठा किया जाता है. चूंकि थोड़ी देर पहले तक रंजीत उनके पास था, तो उन्हें पता था कि उसने क्या और किस रंग के कपड़े पहने हुए हैं, क्या हुलिया है. लिहाजा, उसके बारे में आस-पास की पुलिस को भी सूचना दे दी जाती है.

पंजाब पुलिस की फिल्मी कहानी आगे बढ़ती है. पंजाब पुलिस के शिकंजे से जो रंजीत 3 घंटे पहले भागा था. 3 घंटे बाद वही नादान अब एक मोटरसाइकिल पर सवार था. मोटरसाइकिल सड़क पर दौड़ा रहा था और खुद ही उस तरफ से गुजर रहा था, जहां पुलिस पहले से खड़ी थी. आगे की कहानी वही बोरिंग. पुलिस ने उसे रुकने के लिए कहा, उसने गोली चला दी, जवाब में पुलिस ने गोली चलाई और रंजीत मारा गया. मौके से बंदूक, गोली, खोखे, बाइक सब बरामद हो गए.

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चलिए पंजाब पुलिस की इस मासूमियत से थोड़ा बाहर निकल कर कुछ काम की बात करते हैं. खुद पंजाब पुलिस ये कह रही है कि पुलिस चौकी के दो पुलिस वालों का कत्ल पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी आईएसआई ने करवाया. और ये दोनों कत्ल उसने रंजीत, दिलावर और इंद्रजीत से कराए. यानी इस तरह तो ये तीनों आईएसआई एजेंट हो गए. 

अब ऐसी सूरत में आईएसआई एजेंट जैसे खूंखार क्रिमिनल को एक जिप्सी में दो चार पुलिस वाले रात के तीन बजे कहां और क्यों लेकर जा रहे थे? अगर ये इतना ही खूंखार क्रिमिनल था, तो कम से कम पुलिस की गाड़ियों में तीन-पांच गाड़ियां तो होतीं, कम से कम दस-बीस पुलिस वाले तो साथ होते.

जिस रंजीत को पंजाब पुलिस ने एनकाउंटर में मार डाला, उसकी उम्र 19 साल है। पंजाब पुलिस के दावे के उलट रंजीत के खिलाफ कोई पुराना क्रिमिनल केस किसी भी थाने में रजिस्टर्ड नहीं है. इसीलिए गांव वाले इसे सीधे-सीधे एक मर्डर बताते हुए सीबीआई जांच की मांग कर रहे हैं.

पंजाब पुलिस के इस दावे के मुताबिक, दो पुलिस वालों के कत्ल के लिए इन तीन लड़कों को 20 हजार देने की बात कही गई थी और पेशगी 3 हजार रुपये दिए भी जा चुके थे. गांव वालों का कहना है कि पूरा इलाका पाकिस्तानी सरहद से लगता है. सरहद के उस पार भी पंजाब पुलिस के जासूस हैं. कोई भी उस पार से इन लड़कों के एकाउंट में पैसे डाल कर इन्हें फंसाने का काम कर सकता है.

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सिर्फ आदियां गांव ही नहीं, बल्कि पूरे पंजाब में इस एनकाउंटर को लेकर सवाल उठ रहे हैं. सवाल इस पर उठ रहे हैं कि दो पुलिस वालों के कत्ल की सही वजह सामने लाने की बजाय पंजाब पुलिस अपनी पीठ थपथपाने के लिए बेगुनाहों पर इल्जाम धर रही है. लोग पंजाब पुलिस के फर्जी एनकाउंटर पर भी सवाल उठा रहे हैं. उनका कहना है कि अगर पंजाब पुलिस को यही करना है तो पंजाब में सभी अदालतों को बंद कर देना चाहिए.

कमाल ये भी है कि तीन में से दो आरोपियों यानी रंजीत और दिलावर को 24 फरवरी को जब पुलिस ने गिरफ्तार किया, तो उससे पहले आस-पास के सभी सीसीटीवी कैमरों को हटा दिया गया. यहां तक कि उनके डीवीआर भी पुलिस अपने साथ ले गई. इतना ही नहीं गांव वालों का ये भी दावा है कि शनिवार और रविवार की रात जब पुलिस चौकी में दो पुलिस वालों के कत्ल हुए, तब रंजीत और दिलावर, दिलावर के घर में ही थे. वहां ये लोग पार्टी कर रहे थे. दिलावर के घर में इन दोनों की मौजूदगी के भी अनगिनत गवाह हैं.

इन सारे सवालों से सबसे बड़ा और संगीन सवाल ये है कि जो रंजीत सुबह 3 बजे तक पंजाब पुलिस की कस्टडी में था, फिर गाड़ी पलटने के बाद भागा, वही रंजीत अगले 3 घंटे से भी कम वक्त में रात के आखिरी पहर बाइक और बंदूक कहां से ले आया? इसका जवाब फिलहाल पंजाब पुलिस के पास है ही नहीं. पंजाब पुलिस के पास तो इस सवाल का भी जवाब नहीं है कि चौकी के जिन दो पुलिस वालों की गोली मार कर हत्या की गई थी, वो गोली और तथाकथित एनकाउंटर के दौरान रंजीत की तरफ से चलाई गई गोली क्या एक ही हथियार के थे?

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जाहिर है अगर पंजाब पुलिस इस केस में आईएसआई का नाम ना घसीटती तो शायद इतने सवाल ना खड़े होते. पर ये तो सच है कि दो पुलिस वालों की हत्या हुई है. तो फिर सवाल ये है कि उनका हत्या कौन है और उसने कत्ल क्यों किया? क्या ये किसी गैंग का हाथ है या फिर किसी ड्रग सिंडिकेट का? जिस तक पंजाब पुलिस या तो पहुंच नहीं पाई या पहुंचने के बाद भी पर्दादारी कर रही है.

(गुरुदासपुर के आदियां गांव से अमन भारद्वाज का इनपुट) 

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