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कोरोना: गरीब देशों से फिलहाल न करें कर्ज वसूली, वर्ल्ड बैंक के प्रेसिडेंट ने जी-20 देशों से की अपील

गौरतलब है कि दुनिया के कोरोना वायरस से इस वक्त दुनिया की लगभग एक अरब आबादी लॉक डाउन जैसी स्थिति में रहने को मजबूर हो गई है. ऐसे में विश्व बैंक के प्रेसिडेंट डेविड मालपास ने जी—20 देशों से अपील की है कि कोरोना के कहर को देखते हुए वे दुनिया के सबसे गरीब देशों को दिए कर्ज की वसूली फिलहाल रोक दें.

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विश्व बैंक के प्रेसिडेंट डेविड मालपास ने की अपील
विश्व बैंक के प्रेसिडेंट डेविड मालपास ने की अपील

  • दुनिया की इकोनॉमी पर कहर बनकर टूटा है कोरोना
  • करीब 35 देशों में लॉकडाउन के हालात बन गए हैं
  • ऐसे में विश्व बैंक ने जी—20 देशों से की है अपील
  • विश्व बैंक ने कहा कि गरीब देशों से वे कर्ज वसूली फिलहाल रोक दें

विश्व बैंक के प्रेसिडेंट डेविड मालपास ने जी—20 देशों से अपील की है कि कोरोना के कहर को देखते हुए वे दुनिया के सबसे गरीब देशों को दिए कर्ज की वसूली फिलहाल रोक दें.

मालपास ने कहा कि दुनिया में कोरोना के प्रकोप को देखते हुए जी 20 देशों को सबसे गरीब देशों के साथ सभी आधिकारिक कर्ज समझौतों के तहत वसूली को कुछ समय के लिए लंबित कर देना चाहिए.

गौरतलब है कि दुनिया के कोरोना वायरस से इस वक्त दुनिया की लगभग एक अरब आबादी लॉक डाउन जैसी स्थिति में रहने को मजबूर हो गई है. पूरे विश्व में 16000 से ज्यादा लोगों की मौत कोरोना वायरस से हो गई है.

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दुनिया में कोरोना वायरस से संक्रमित लोगों की संख्या 3.81 लाख को पार कर चुकी है. 35 देशों में लॉकडाउन की स्थिति है. कोरोना वायरस से इटली में स्थिति सबसे खराब है, यहां पर करीब 5 हजार लोगों की इस बीमारी से मौत हो चुकी है.

गौरतलब है कि ग्रुप 20 देश भी इस आकलन में लगे हैं कोरोना के कहर से आने वाली आर्थिक चुनौतियों से कैसे निपटा जाए. इसके लिए जी—20 देशों के वित्त मंत्री एक टेलीकॉन्फ्रेंस करने वाले हैं.

कोरोना की वजह से दुनिया भर के शेयर बाजार भी ढह गए हैं और इससे वैश्विक मंदी की आशंका गहरा गई है. इस साल जी—20 देशों की अध्यक्षता सउदी अरब कर रहा है. उसने कहा है कि इस सप्ताह इसके नेताओं की एक असाधारण वर्चुअल बैठक होगी, जिसमें इस बारे में समन्वित प्रयास किया जाएगा कि लोगों और दुनिया की अर्थव्यवस्था को बचाने के लिए किस तरह की नीतियां अपनाई जाएं.

गौरतलब है कि जी—20 एक अंतरराष्ट्रीय मंच है जिसमें 19 देशों और यूरोपीय संघ की सरकारें तथा वहां के केंद्रीय बैंकों के गवर्नर शामिल होते हैं. दुनिया में वित्तीय स्थिरता कायम रखने के लिए नीतिगत चर्चाओं के लिए इसकी स्थापना 1999 में हुई थी.

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