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दुनिया में कोरोना का अटैक जारी... क्या भारत में पड़ेगी चौथी डोज की जरूरत? विशेषज्ञ ने दिया ये जवाब

विदेश में कोरोना का प्रकोप अभी कम नहीं हुआ है. वहीं भारत में कोरोना को लेकर एहतियातन वैक्सीन की चौथी खुराक लेने पर चर्चा तेज हो गई है. इस बीच ICMR में महामारी विज्ञान और संचारी रोगों के पूर्व प्रमुख डॉ. रमन गंगाखेडकर ने कहा कि अभी भारत में चौथी डोज की जरूरत नहीं है. अगर कोई नए वेरिएंट का अटैक होता है, तब इसके इस्तेमाल पर विचार किया जा सकता है. 

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भारत में कोरोना से हालात चिंताजनक नहीं (सांकेतिक फोटो)
भारत में कोरोना से हालात चिंताजनक नहीं (सांकेतिक फोटो)

दुनिया में अब भी कोरोना अटैक की खबरें आ रही हैं. इस बीच ये सवाल उठने लगा है कि क्या भारत में कोरोना की चौथी खुराक की जरूरत पड़ेगी. इस सवाल पर इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च (ICMR) में महामारी विज्ञान और संचारी रोगों के पूर्व प्रमुख डॉ. रमन गंगाखेडकर ने कोरोना वायरस और उसके वेरिएंट के बारे में मौजूदा सबूतों को देखते हुए कहा कि फिलहाल भारत में कोरोना वैक्सीन की चौथी खुराक लेने की जरूरत नहीं हैं.

उन्होंने कहा- "मौजूदा साक्ष्य (वायरस के वेरिएंट) को देखते हुए, यह इतना बड़ा नहीं है कि COVID-19 वैक्सीन की चौथी खुराक की कोई जरूरत है. इसके कई कारण हैं. उन्होंने कहा कि अगर किसी व्यक्ति ने एंटी-कोविड-19 वैक्सीन की तीसरी खुराक ली है, तो इसका मतलब है कि उसकी टी-सेल प्रतिरक्षा प्रतिक्रिया को तीन बार प्रशिक्षित किया गया है.

उन्होंने कहा, "मुख्य वायरस (कोविड का) इतना नहीं बदला है कि एक नए टीके की जरूरत होगी, इसलिए कोशिश करें और हमारे टी-सेल प्रतिरक्षा प्रतिक्रिया पर भरोसा रखें." हालांकि उन्होंने कहा कि बुजुर्गों और पुरानी बीमारियों से पीड़ित लोगों को मास्क पहनने जैसी सावधानियां बरतनी जारी रखनी चाहिए.

वह बोले कि चौथी खुराक के लिए अभी भी सोचना चाहिए क्योंकि अगर कोई नया संस्करण आता है, तो वह SARS-COV2 परिवार से नहीं होगा. यह पूरी तरह से नया वेरिएंट हो सकता है और जब यह आएगा, तो हम इसके बारे में सोचेंगे क्योंकि हमारी जीनोमिक निगरानी अभी भी चल रही है. अब चिंतित होने की जरूरत नहीं है.

देश की पहली नेजल वैक्सीन 26 जनवरी को होगी लॉन्च

पहली भारतीय इंट्रानेजल कोविड वैक्सीन 26 जनवरी को लॉन्च किया जाएगा. कंपनी के अध्यक्ष और प्रबंध निदेशक कृष्णा एला ने शनिवार को कहा कि स्वदेशी वैक्सीन निर्माता भारत बायोटेक 26 जनवरी को भारत में अपनी तरह की पहली इंट्रानेजल कोविड-19 वैक्सीन लॉन्च करेगी. भोपाल में इंडिया इंटरनेशनल साइंस फेस्टिवल में छात्रों के साथ बातचीत करते हुए, एला ने यह भी जानकारी दी कि मवेशियों में ढेलेदार त्वचा रोग के लिए घरेलू टीका, लंपी-प्रोवाइंड, अगले महीने लॉन्च होने की संभावना है.

दुनियाभर में कोरोना वायरस के बढ़ते मामलों के बीच केंद्र सरकार ने 23 दिसंबर 2022 को भारत बायोटेक की नेजल वैक्सीन (Nasal vaccine) को मंजूरी दी थी. यह वैक्सीन बूस्टर डोज के तौर पर लग सकेगी. नेजल वैक्सीन शुरुआत में प्राइवेट अस्पतालों में लग सकेगी. इस वैक्सीन को सरकार ने भारत के कोविड 19 वैक्सीनेशन प्रोग्राम में भी शामिल किया है. इससे पहले भारत के औषधि महानियंत्रक DCGI ने भारत बायोटेक की इंट्रा नेजल कोविड वैक्सीन (Intranasal Covid vaccine) को आपातकालीन इस्तेमाल की मंजूरी दे दी थी. 

सीधे म्युकोसा में इम्युन रिस्पॉन्स करती है पैदा

कोरोना समेत ज्यादातर वायरस म्युकोसा के जरिए शरीर में जाते हैं. म्युकोसा नाक, फेफड़ों, पाचन तंत्र में पाया जाने वाला चिपचिपा पदार्थ होता है. नेजल वैक्सीन सीधे म्युकोसा में ही इम्युन रिस्पॉन्स पैदा करती है, जबकि मस्कुलर वैक्सीन ऐसा नहीं कर पाती. इंडिया टुडे को दिए इंटरव्यू में एम्स के पूर्व डायरेक्टर डॉ. रणदीप गुलेरिया ने भी बताया था कि नेजल वैक्सीन बेहतर है क्योंकि इन्हें लगाना ज्यादा आसान है और ये म्यूकोसा में ही इम्युनिटी बना देता है, जिससे संक्रमण से शुरुआत में ही बचा जा सकता है.

18 साल से ज्यादा की उम्र के लोग ले सकते हैं डोज

ये वैक्सीन अभी 18 साल या उससे ज्यादा उम्र के लोगों को ही लगाई जाएगी. 12 से 17 साल के बच्चों का भी वैक्सीनेशन चल रहा है, लेकिन वो इसे नहीं लगवा सकते. दूसरी बात ये कि इसे बूस्टर डोज के तौर पर लगाया जाएगा. यानी, जो लोग दो डोज लगवा चुके हैं, वही ये वैक्सीन लगवा सकते हैं. हालांकि, इसे प्राइमरी वैक्सीन की मंजूरी भी मिली है. यानी, अगर कोई भी वैक्सीन नहीं ली है तो भी इसे लगवा सकते हैं. हालांकि, भारत में लगभग पूरी आबादी का वैक्सीनेशन हो चुका है. लेकिन अभी भी बहुत बड़ी आबादी ने बूस्टर डोज नहीं ली है. कोविन पोर्टल के मुताबिक, देश में 95.11 करोड़ से ज्यादा लोग दो डोज ले चुके हैं. पर 22 करोड़ लोगों ने ही बूस्टर डोज लगवाई है.

 

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