scorecardresearch
 

Stocks or Gold-Silver: सोना-चांदी लें या नहीं? जो है उसे बेच दें... जानिए अब कहां होगी कमाई?

Gold Silver Inside Story: सोने-चांदी के प्रति पिछले कुछ महीनों में निवेशक ज्यादा आकर्षित हुए हैं, क्योंकि मोटा रिटर्न बना है. लेकिन बाजार एक दायरे में कारोबार कर रहा है. अब कुछ निवेशक कंफ्यूज हैं कि कौन-सा विकल्प अपनाया जाए, जो पोर्टफोलियो के लिए बेहतर होगा?

Advertisement
X
कुछ महीनों में सोने-चांदी ने निवेशकों को मालामाल किया है. (Photo: ITG)
कुछ महीनों में सोने-चांदी ने निवेशकों को मालामाल किया है. (Photo: ITG)

शेयर बाजार पिछले करीब डेढ़ साल से एक दायरे में कारोबार कर रहा है, अब अचानक अमेरिकी से डील के बाद तेजी देखने मिली है, जबकि सोने-चांदी की कीमतें भी लगातार बढ़ती जा रही हैं, करीब 4 दिन की गिरावट के बाद फिर सोने-चांदी की कीमतें बढ़ने लगी हैं. ऐसे में अब निवेशक के पास क्या विकल्प है? सोना-चांदी अपने ऑल टाइम हाई से करीब 25 फीसदी नीचे है. 

भारत की अमेरिका से भी ट्रेड डील (Trade Deal) हो गई, जिसका इंतजार करीब 9 महीनों से किया जा रहा था, इस डील की घोषणा होने के बाद मंगलवार का दिन शेयर बाजार के लिए बेहद मंगलमय रहा. सेंसेक्स-निफ्टी में करीब 8 महीने बाद एक दिन में सबसे बड़ी तेजी दर्ज की गई. सेंसेक्स 2072 अंक चढ़कर 83,739 पर, जबकि निफ्टी 639 अंक चढ़कर 25,727 पर बंद हुआ था.

दो विकल्प... कहां बनेगा पैसा?

दरअसल, शेयर बाजार पिछले करीब डेढ़ साल से एक दायरे में कारोबार कर रहा है, जुलाई- 2024 में निफ्टी करीब 25000 अंक के आसपास था, इंडेक्स अभी भी इसी के आसपास बना हुआ. क्योंकि लगातार ऐसी खबरें आ रही थीं, जिससे बाजार पर दबाव बना हुआ था. खासकर पिछले एक साल से बाजार पर ग्लोबल सेंटीमेंट हावी हो गया था. पहले तो रूस-यूक्रेन में युद्ध से बाजार संकट में आया, फिर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भारत पर अप्रैल-2025 में 25 फीसदी टैरिफ थोप दिया, उसके बाद रूसी तेल खरीदने को लेकर 25 फीसदी अतिरिक्त टैरिफ लगा दिया गया. जिससे बाजार ऊपर से फिसल गया और फिर संभल नहीं पा रहा था. लेकिन अब दोनों देशों के बीच डील हो गई तो बाजार का सेंटीमेंट भी सुधर गया है. 

Advertisement

वहीं सोना-चांदी निवेशकों के लिए एक बेहतर निवेश का ठिकाना रहा है. पिछले कुछ वर्षों में सोने-चांदी में जोरदार तेजी देखी गई है. सोना पिछले एक साल में डबल हो गया, जबकि इस दौरान चांदी की कीमत करीब तिगुनी हो गई. खासकर चांदी को लेकर निवेशकों में खासा क्रेज है. चंद दिन तक गिरावट के बाद फिर सोने-चांदी में तेजी देखी जा रही है. इस बीच तमाम ऐसे लोग हैं, जो शेयर बाजार से पैसे निकाल कर सोने-चांदी में लगा रहे थे. क्योंकि जब बाजार नहीं चल रहा था, तब सोना-चांदी निवेशकों को मालामाल कर रहा था. लेकिन अब बाजार भी चलने लगा है, इकोनॉमी के मोर्चे पर भारत तेजी से आगे बढ़ रहा है, देश की जीडीपी ग्रोथ 7 फीसदी से ऊपर बनी हुई है. 

शेयर बाजार को लेकर कई गुड न्यूज

अब अमेरिका से डील के बाद बाजार में आगे भी तेजी रहने का अनुमान लगाया जा रहा है. क्योंकि पिछले कुछ महीनों में कई अच्छी खबरें आईं, लेकिन बाजार एक दायरे में सिमटा रहा, जैसे कि RBI ने कई बार ब्याज दरों में कटौती की, जीएसटी में रिफॉर्म, EU के साथ FTA साइन. इतना सब होने के बावजूद सबकी निगाहें अमेरिका के साथ डील पर टिकी थीं, अब उसपर भी मोहर लग गई है, जो कि बाजार के लिए एक ट्रिगर पॉंइट माना जा रहा है.

Advertisement

हड़बड़ी में नुकसान का डर

मौजूदा समय में ये बड़ा सवाल है कि निवेशकों को क्या करना चाहिए? फिलहाल, बाजार निवेश के लिए बेहतर विकल्प है या फिर सोना-चांदी? एक्सपर्ट्स के मुताबिक सोने-चांदी में जोरदार तेजी देखी जा चुकी है. हो सकता है कि मौजूदा भाव से भी थोड़ा उछाल देखने को मिल जाए. क्योंकि सोने चांदी की तरफ निवेशकों का झुकाव बढ़ा है, इसलिए अगर 5-10 साल के लिए सोने-चांदी में निवेश करना चाहते हैं, तो SIP फॉर्मेट से अगले 6 महीने तक निवेश करें. नियम ये कहता है कि अगर आप 1 लाख रुपये सोने-चांदी में लगाना चाहते हैं, तो उसे 4-6 टुकड़ों में अगले 6 महीने तक निवेश करें. यानी हर महीने 2 हजार रुपये का सोना चांदी खरीदें. एकमुश्त 1 लाख रुपये लगाने से बचें. इससे मोटा मुनाफा तो नहीं होगा, लेकिन बड़ा नुकसान भी नहीं होगा. 

वहीं शेयर बाजार (Share Market) में भी यही फॉर्मूला लागू होता है, बाजार में एकमुश्त निवेश से बचें, थोड़ा-थोड़ा करके हर गिरावट में निवेश करें. क्योंकि ग्लोबल चुनौतियां खत्म नहीं हुई हैं, अमेरिका और ईरान के बीच तनाव बरकरार है. अगर बाजार में नया निवेश करना चाहते हैं तो फिर फंडामेंटली मजबूत कंपनियों के साथ जाएं, स्मॉलकैप में बहुत ज्यादा निवेश से बचें. इसके अलावा हर निवेशक के लिए ये बेहतर रहेगा, कि वो अपने पोर्टफोलियो को डायवर्सीफाई रखें. अपने पोर्टफोलियो में 10-20 फीसदी तक ही सोना-चांदी रखें, ताकि जोखिम कम हो. क्योंकि सोने-चांदी के भाव एक-एक दिन में 10 फीसदी ऊपर-नीचे हो रहे हैं.   

Advertisement

(नोट: शेयर बाजार में निवेश से पहले वित्तीय सलाहकार की मदद करें)

---- समाप्त ----
Live TV

Advertisement
Advertisement