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Gold Silver Price: गिरावट थमी, क्या अब लंबी रेस के लिए तैयार है सोना-चांदी? जानिए टारगेट

Gold Silver Updates News: लगातार महंगाई, सरकारी कर्ज को लेकर चिंता, भू-राजनीतिक तनाव और केंद्रीय बैंकों की सोने में खरीदारी लंबी अवधि में कीमतों को सहारा दे सकती है.

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सोने-चांदी की कीमतों में सुधार के संकेत. (Photo: ITG)
सोने-चांदी की कीमतों में सुधार के संकेत. (Photo: ITG)

मोतीलाल ओसवाल की नई रिपोर्ट में सोने और चांदी को लेकर लंबी अवधि का आउटलुक सकारात्मक बताया गया है. रिपोर्ट के मुताबिक गिरावट पर खरीदारी का मौका मिल सकता है. जानिए सोने के लिए ग्लोबल और घरेलू बाजार में क्या हैं टारगेट.

साल 2026 में सोने और चांदी की कीमतों में जबरदस्त उतार-चढ़ाव देखने को मिला है. रिकॉर्ड तेजी के बाद दोनों कीमती धातुओं में बड़ी गिरावट आई. लेकिन अब फिर से रिकवरी के संकेत मिल रहे हैं. ऐसे माहौल में निवेशकों के मन में सवाल है कि क्या सोने की चमक फिर लौटेगी या कीमतों में और गिरावट आ सकती है. मोतीलाल ओसवाल फाइनेंशियल सर्विसेज यानी MOFSL की नई प्रेशियस मेटल्स रिपोर्ट के मुताबिक, निकट भविष्य में उतार-चढ़ाव जारी रह सकता है, लेकिन लंबी अवधि में सोने और चांदी का आउटलुक सकारात्मक बना हुआ है. रिपोर्ट का शीर्षक है Gold’s Rally: Deferred, Not Derailed’, यानी सोने की तेजी खत्म नहीं हुई, बल्कि फिलहाल टली है.

रिकॉर्ड ऊंचाई के बाद सोने में बड़ी गिरावट
रिपोर्ट के मुताबिक, जनवरी 2026 में अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोना करीब 5,600 डॉलर प्रति औंस के रिकॉर्ड स्तर तक पहुंच गया था. इसके बाद कीमतों में तेज गिरावट आई और सोना 4,000 डॉलर प्रति औंस के नीचे चला गया. हालांकि, इसके बाद दामों में दोबारा सुधार देखने को मिला. चांदी में भी इसी तरह का उतार-चढ़ाव रहा. चांदी 100 डॉलर प्रति औंस के पार पहुंचने के बाद बड़ी गिरावट से गुजरी. डॉलर और रुपये की विनिमय दर में बदलाव का असर भारतीय बाजार में सोने और चांदी की कीमतों पर भी पड़ा. MOFSL के मुताबिक, 2026 में सोने और चांदी की चाल पिछले साल के मुकाबले ज्यादा उतार-चढ़ाव भरी रही है. अमेरिकी ब्याज दरों, महंगाई, बॉन्ड यील्ड और भू-राजनीतिक घटनाओं ने कीमतों को प्रभावित किया है.

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10 साल में सोने की कीमत पांच गुना
भारत में दिवाली और धनतेरस पर सोना खरीदने की परंपरा लंबे समय से रही है. रिपोर्ट के मुताबिक, पिछले एक दशक में दिवाली के आसपास घरेलू बाजार में सोने की कीमतों में बड़ी बढ़ोतरी हुई है.
-2016 में दिवाली के दौरान सोने की कीमत करीब 30,000 रुपये थी.
-2026 में दिवाली के दौरान यह बढ़कर करीब 1.50 लाख रुपये तक पहुंच गई.
-रिपोर्ट के ऐतिहासिक आंकड़ों के मुताबिक, दिवाली से पहले के 30 दिनों में सोने ने आम तौर पर बाद के 30 दिनों के मुकाबले बेहतर रिटर्न दिया है.
-2025 में दिवाली से पहले एक महीने में सोने की कीमत करीब 20 फीसदी और चांदी की कीमत लगभग 38 फीसदी बढ़ी थी.

हालांकि, रिपोर्ट ये भी कहती है कि त्योहारों पर सोने की खरीदारी का संबंध केवल अंतरराष्ट्रीय कीमतों से नहीं है. घरेलू बाजार में प्रीमियम, आयात और वास्तविक खरीदारी की मात्रा भी अहम भूमिका निभाती है.

महंगे सोने के बावजूद ETF में निवेश बढ़ा
सोने की कीमतें ऊंचे स्तर पर रहने के बावजूद निवेशकों की दिलचस्पी बनी हुई है. MOFSL की रिपोर्ट के मुताबिक, अगस्त और सितंबर 2026 के दौरान वैश्विक गोल्ड ETF की होल्डिंग करीब 187 टन बढ़ी.
-वैश्विक गोल्ड ETF की कुल होल्डिंग बढ़कर रिकॉर्ड 4,256 टन हो गई.
-तीसरी तिमाही में ग्लोबल गोल्ड ETF में 31 अरब डॉलर का रिकॉर्ड निवेश आया.
-भारत में सितंबर 2026 के दौरान गोल्ड ETF में निवेश महीने-दर-महीने 71 फीसदी बढ़कर 4,450 करोड़ रुपये हो गया.
-इसी दौरान सिल्वर ETF में 1,970 करोड़ रुपये का निवेश आया.

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रिपोर्ट के मुताबिक, ऊंची कीमतों और सोने के आयात को नियंत्रित करने के उपायों के बीच भारत का गोल्ड इंपोर्ट भी घटा. अगस्त में 2.3 अरब डॉलर का सोना आयात हुआ था, जो सितंबर में घटकर 1.8 अरब डॉलर रह गया.

सोने की कीमतों पर किन बातों का असर पड़ेगा?
MOFSL के रिसर्च हेड-कमोडिटीज नवनीत दामानी के मुताबिक सोना वैश्विक आर्थिक और भू-राजनीतिक अनिश्चितताओं के बीच एक डिफेंसिव एसेट बना हुआ है. हालांकि, निकट भविष्य में इसकी कीमतों पर अमेरिकी फेडरल रिजर्व की नीतियों, महंगाई, डॉलर और बॉन्ड यील्ड का असर रहेगा. रिपोर्ट में बताया गया है कि अमेरिकी फेडरल रिजर्व ने सितंबर में ब्याज दरों में 25 बेसिस पॉइंट की बढ़ोतरी की थी. इससे अमेरिकी ब्याज दरें 3.75 से 4 फीसदी के दायरे में पहुंच गईं. ऊंची ब्याज दरें और मजबूत डॉलर सोने की कीमतों पर दबाव डाल सकते हैं. दूसरी तरफ, लगातार महंगाई, सरकारी कर्ज को लेकर चिंता, भू-राजनीतिक तनाव और केंद्रीय बैंकों की सोने में खरीदारी लंबी अवधि में कीमतों को सहारा दे सकती है.

सोने के लिए क्या हैं ग्लोबल टारगेट?
MOFSL के कमोडिटीज एनालिस्ट मानव मोदी और नवनीत दामानी ने सोने के लिए खरीदारी और कीमतों के संभावित स्तर बताए हैं. अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने की कीमत 3,800 से 3,900 डॉलर प्रति औंस के दायरे में आने पर खरीदारी को अनुकूल माना गया है. वहीं, सोने का शॉर्ट-टर्म टारगेट 4,200 डॉलर प्रति औंस और मीडियम-टर्म टारगेट 4,500 से 4,700 डॉलर प्रति औंस रखा गया है. रिपोर्ट में कहा गया है कि सोने की कीमतों में गिरावट आने पर निवेशक धीरे-धीरे खरीदारी बढ़ाने की रणनीति अपना सकते हैं. हालांकि, ये ब्रोकरेज के अनुमान हैं और बाजार की परिस्थितियों के मुताबिक बदल सकते हैं.

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भारत में सोने के लिए क्या है टारगेट?
घरेलू बाजार में MOFSL ने डॉलर के मुकाबले रुपये की विनिमय दर 96 मानकर सोने के लिए अनुमान दिए हैं. रिपोर्ट के मुताबिक, 1,35,000 रुपये प्रति 10 ग्राम का स्तर खरीदारी के लिए अनुकूल जोन है. सोने का शॉर्ट-टर्म टारगेट 1,48,000 रुपये और मीडियम-टर्म टारगेट 1,60,000 से 1,68,000 रुपये प्रति 10 ग्राम रखा गया है. ये कीमतें प्रति 10 ग्राम सोने के लिए बताई गई हैं. रिपोर्ट के मुताबिक, निवेशकों को तेजी के पीछे भागने के बजाय कीमतों में गिरावट के दौरान धीरे-धीरे खरीदारी करने पर ध्यान देना चाहिए.

चांदी में ज्यादा तेजी की संभावना, लेकिन जोखिम भी बड़ा
MOFSL के कमोडिटीज एनालिस्ट मानव मोदी के मुताबिक, चांदी में सोने के मुकाबले ज्यादा तेजी की संभावना हो सकती है. लेकिन इसकी कीमतों में उतार-चढ़ाव भी ज्यादा रहता है. इसलिए चांदी में निवेश करने वालों को ज्यादा जोखिम के लिए तैयार रहना चाहिए. रिपोर्ट में निवेशकों को कीमतों की तेजी के पीछे भागने के बजाय सोच-समझकर निवेश करने और पोर्टफोलियो में सोने-चांदी की भूमिका को ध्यान में रखने की सलाह दी गई है.


सोने और चांदी की कीमतों पर अमेरिकी ब्याज दरों, डॉलर, महंगाई और वैश्विक घटनाओं का असर पड़ सकता है. MOFSL के टारगेट बाजार के अनुमान हैं, इन स्तरों पर कीमत पहुंचने की कोई गारंटी नहीं है. निवेश का फैसला करने से पहले अपनी जोखिम क्षमता, निवेश की अवधि और वित्तीय जरूरतों को ध्यान में रखना जरूरी है.

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