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मौज ही मौज! अकाउंट में आने लगे पैसे... 1 लाख सैलरी वालों को सीधे 71500 रुपये का फायदा, आप भी करें चेक

New Tax Regime: नीरज को कल तक विश्वास नहीं हो रहा था कि हकीकत में अप्रैल की सैलरी बढ़कर आएगी. लेकिन अब जब नीरज ने बैंक अकाउंट चेक किया तो पता चला कि मार्च के मुकाबले अप्रैल में  सैलरी करीब 5,958 रुपये ज्यादा आई है. 

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New Tax Regime Benefits
New Tax Regime Benefits

नीरज की तो मौज हो गई. जैसे ही कल सैलरी आई, वो गदगद हो गए, नीरज का कहना है कि सही में बिना अप्रैजल (Appraisal) सैलरी बढ़ गई. नीरज को अब एक साल के अंदर करीब 71500 रुपये का फायदा होने वाला है, जो कि सरकार के एक फैसले की वजह से संभव हुआ है. नीरज को कल तक विश्वास नहीं हो रहा था कि हकीकत में अप्रैल की सैलरी बढ़कर आएगी. लेकिन अब जब नीरज ने बैंक अकाउंट चेक किया तो पता चला कि मार्च के मुकाबले अप्रैल में  सैलरी करीब 5,958 रुपये ज्यादा आई है. 

दरअसल, नीरज की मंथली सैलरी एक लाख रुपये है, यानी सालाना आय 12 लाख रुपये है. पिछले साल इसी सैलरी पर नीरज को New Tax Regime के तहत सालाना करीब 71500 रुपये इनकम टैक्स (Income Tax) भरना पड़ रहा था, यानी नीरज हर महीने 5958 रुपये इनकम टैक्स दे रहा था. जो कि अब बच गया है, और सैलरी में बढ़कर आने लगी है.

न्यू टैक्स रिजीम के फायदे

जिनकी भी सालाना सैलरी 7.75 लाख रुपये से ज्यादा है, उन सबको न्यू टैक्स रिजीम में हुए बदलाव का फायदा होने वाला है, चाहे आपकी सैलरी 10 लाख है या 15 लाख, 20 लाख, या फिर 25 लाख रुपये का सालाना है.

न्यू टैक्स रिजीम के तहत 15 लाख की सैलरी वालों को अब 1,05,000 रुपये सालाना टैक्स देना पड़ेगा. जबकि वित्त वर्ष 2024-25 में 15 लाख रुपये की आय पर न्यू टैक्स रिजीम में करीब 1,45,600 रुपये आयकर लगता था, यानी सीधे 40600 रुपये की बचत होगाी. 20 लाख आमदनी पर अब करीब 2,05,000 इनकम टैक्स बनता है, जबकि पिछले साल 20 साल की सैलरी पर 2,96,400 रुपये टैक्स देना पड़ता था, यानी 20 लाख सालाना आय वालों को करीब 91400 रुपये बचने वाला है. वहीं जिनकी सालाना आय 25 लाख रुपये है, उन्हें अब 3,30,000 रुपये इनकम टैक्स देना होगा, जबकि पिछले वित्त वर्ष में करीब 4,52,400 रुपये इनकम टैक्स देना पड़ता था, 25 लाख सालाना आमदनी वालों को हर साल करीब 1,22,400 रुपये कम टैक्स देना होगा. 

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जानिए आपको कितना होगा फायदा?

बता दें, केंद्र सरकार ने बजट में इस साल करदाताओं को बड़ी राहत दी थी, अब 12 लाख तक की आय पर कोई इनकम टैक्स नहीं लगेगा. जबकि वित्तीय वर्ष 2024-25 तक न्यू टैक्स रिजीम के तहत 7 लाख रुपये की तक आय पर कोई इनकम टैक्स नहीं लगता था. जिसे वित्त वर्ष 2025-26 से बढ़ाकर 12 लाख रुपये तक कर दिया गया है. इसके अलावा सैलरीड क्लास को 75 हजार रुपये का स्टैंडर्ड डिडक्शन का भी लाभ मिलेगा. यानी जिनकी सैलरीड इनकम सालाना 12.75 लाख रुपये है, उन्हें कोई इनकम टैक्स नहीं देना होगा.

बता दें, बजट 2025 में केंद्र सरकार ने सेक्शन 87A के तहत टैक्स रिबेट की राशि बढ़ाकर 60,000 रुपये कर दिया है. न्यू टैक्स रिजीम (2025) के तहत 12 लाख की आय पर टैक्स स्लैब के हिसाब 52,500 रुपये टैक्स बनता है. लेकिन 87A के तहत टैक्स रिबेट भी 52,500 रुपये का मिल जाता है तो फिर कोई टैक्स नहीं बनता है. यही नहीं, 1 अप्रैल 2025 से न्यू टैक्स रिजीम लागू हो चुके हैं और अब जिन लोगों की सैलरी 12.75 लाख रुपये तक है, उन्हें इनकम टैक्स के बारे में नहीं सोचना है.  

जबकि पिछले वित्त वर्ष तक जिनकी सैलरी 7.75 लाख रुपये से अधिक थी, और अगर उन्होंने न्यू टैक्स रिजीम चुन रखा था, तो उन्हें इनकम टैक्स देना पड़ रहा था. लेकिन अब पूरी सैलरी मिलेगी, इनकम टैक्स का जो हिस्सा मार्च-2025 तक कट रहा था, वो अब बंद हो जाएगा.

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सरकार का न्यू टैक्स रिजीम पर फोकस

दरअसल, पिछले कुछ वर्षों से मोदी सरकार न्यू टैक्स रिजीम पर फोकस कर रही है, जिस वजह से अब करीब 90% से ज्यादा लोग न्यू टैक्स रिजीम को अपना चुके हैं. इस साल बजट में केंद्र सरकार ने सेक्शन-87A के तहत टैक्स रिबेट की राशि को बढ़ाकर 60,000 रुपये तक कर दिया है, जिससे अब 12 लाख तक की सालाना आय पर कोई इनकम टैक्स नहीं देना पड़ेगा.

बता दें, अधिकतर संस्थानों में सैलरी महीने के आखिरी दिन या फिर पहली तारीख को आती है. ऐसे में अप्रैल की सैलरी कुछ संस्थानों में कल आई होगी, और बाकियों में आज आएगी और उन्हें मार्च के मुकाबले सैलरी बढ़कर आएगी. क्योंकि New Tax Regime की वजह से पहले जो सैलरी इनकम टैक्स के तौर पर कट रही थी, वो अब नहीं कटेगी. सालाना 12.75 लाख रुपये तक की आय वालों ये छूट मिलने वाली है.

गौरतलब है कि 1 अप्रैल 2025 से वित्तीय वर्ष 2025-26 शुरू हो गया है, और 'न्यू टैक्स रिजीम' डिफॉल्ट ऑप्शन के तौर पर होंगे. हालांकि ओल्ड टैक्स रिजीम अभी भी मौजूद रहेगा. CBDT के मुताबिक न्यू टैक्स रिजीम में बदलाव से अब 90 से 97 फीसदी टैक्सपेयर्स इस नई कर व्यवस्था में शामिल हो सकते हैं.

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