रक्षाबंधन से लेकर दिवाली तक त्योहारों का सीजन शुरू होने वाला है. लेकिन इससे ठीक पहले सरकारी आंकड़ों ने आम जनता की चिंता बढ़ा दी है. उपभोक्ता मामले विभाग के मुताबिक पिछले 5 महीनों में खाने-पीने की लगभग हर चीज महंगी हुई है.
सावन की शुरुआत के साथ ही देश में त्योहारों का सीजन दस्तक दे चुका है. रक्षाबंधन, जन्माष्टमी, गणेशोत्सव से लेकर दिवाली तक लाइन से बड़े त्योहार आने वाले हैं. लेकिन इस फेस्टिव सीजन से ठीक पहले आम आदमी की रसोई और जेब दोनों का बजट बुरी तरह गड़बड़ा गया है. उपभोक्ता मामले विभाग (Department of Consumer Affairs) के प्राइस मॉनिटरिंग सिस्टम के आंकड़ों से खुलासा हुआ है कि बीते 5 महीनों में राशन के लगभग हर समान के रेट में इजाफा हुआ है.
16 में से 15 जरूरी सामानों के रेट बढ़े
सरकारी डेटा के मुताबिक पिछले 5 महीनों के दौरान रोजमर्रा के इस्तेमाल वाले 16 मुख्य खाद्य सामानों में से 15 की कीमतों में बढ़ोतरी दर्ज की गई है. यानी देश में राशन का 99 फीसदी सामान पहले से ज्यादा कीमत पर मिल रहा है.
दालों में सबसे बड़ा उछाल
अरहर (तुअर) दाल के रेट में करीब 6 रुपये प्रति किलो का इजाफा हुआ है और यह 123.46 रुपये के स्तर पर पहुंच गई है. वहीं चना दाल 86.66 रुपये और उड़द दाल 121.51 रुपये प्रति किलो बिक रही है.
खाद्य तेल और दूध पर असर
सरसों तेल के भाव 7.56 रुपये प्रति लीटर बढ़कर 196.44 रुपये पर पहुंच गए हैं. इसके अलावा सोया, सनफ्लावर और पाम ऑयल की कीमतों में भी 4 से 4.5 फीसदी की तेजी आई है. दूध के रेट में भी 3 रुपये प्रति लीटर की बढ़ोतरी दर्ज की गई है.
चीनी की मिठास पड़ी फीकी
फेस्टिव डिमांड और इथेनॉल प्रोडक्शन में गन्ने की खपत के चलते चीनी 2.25 रुपये महंगी होकर 49.33 रुपये प्रति किलो हो गई है.
आटे ने दी थोड़ी राहत
गेहूं के पर्याप्त सरकारी स्टॉक और बेहतर सप्लाई के असर से आटे की कीमत (37.35 रुपये/किलो) में कोई बड़ा उछाल नहीं आया है और यह स्थिर बनी हुई है.
क्यों बेकाबू हो रहे हैं खाद्य पदार्थों के दाम?
इकोनॉमिस्ट्स और मार्केट एक्सपर्ट्स के मुताबिक त्योहारों से ठीक पहले आई इस महंगाई के पीछे तीन प्रमुख ग्लोबल और डोमेस्टिक फैक्टर्स जिम्मेदार हैं जिनमे पहला है कमजोर और अनिश्चित मानसून जिससे इस साल खरीफ सीजन में दालों की बुवाई का रकबा पिछले साल के मुकाबले करीब 7 फीसदी कम रहा है. इससे आने वाले दिनों में प्रोडक्शन घटने और इंपोर्ट बढ़ाने की आशंका से बाजार में कीमतें चढ़ रही हैं.
मिडिल-ईस्ट में जियोपॉलिटिकल टेंशन
पश्चिम एशिया में जारी युद्ध और तनाव की वजह से ग्लोबल सप्लाई चेन प्रभावित हुई है. भारत बड़े पैमाने पर एडिबल ऑयल इंपोर्ट करता है, जिससे अंतर्राष्ट्रीय बाजार में क्रूड पाम और सोया तेल की लागत बढ़ गई है.
फेस्टिव सीजन की एडवांस खरीदारी
रक्षाबंधन और दिवाली को देखते हुए हलवाइयों, प्रोसेसर्स और रिटेलर्स की तरफ से एडवांस स्टॉकिंग शुरू हो गई है, जिससे मार्केट में अचानक डिमांड बढ़ गई है.
आगे क्या होगी बाजार की स्थिति?
विशेषज्ञों का मानना है कि जब तक इंटरनेशनल मार्केट में क्रूड ऑयल और इंपोर्टेड एडिबल ऑयल के दाम नीचे नहीं आते, तब तक घरेलू बाजार में राहत मिलने के आसार कम हैं. इसके अलावा अगर मानसून का दूसरा हाफ बेहतर नहीं रहता है, तो फेस्टिव सीजन के दौरान दालों और एडिबल ऑयल की कीमतों पर दबाव और बढ़ सकता है.