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गौतम अडानी की एक और कामयाबी, रियल एस्टेट में DLF के मालिक को पीछे छोड़ नंबर-1 पर पहुंचे

Hurun Real Estate Rich List: हुरुन की रिपोर्ट ये बताती है कि इस साल रियल एस्टेट सेक्टर में सुस्ती रही है. सूची में शामिल सभी 151 कंपनियों का कुल मूल्यांकन केवल 2% बढ़कर 16.5 लाख करोड़ रुपये हुआ, जो कि पिछले 9 वर्षों में सबसे धीमी बढ़ोतरी है.

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गौतम अडानी के नाम एक और कामयाबी. (Photo: ITG)
गौतम अडानी के नाम एक और कामयाबी. (Photo: ITG)

रियल एस्टेट सेक्टर में भी अब अडानी ग्रुप ने अपना झंडा गाड़ दिया है. 'ग्रोहे-हुरुन इंडिया रियल एस्टेट 150'(Grohe-Hurun India Real Estate 150) की 2026 की लिस्ट में गौतम अडानी और उनका परिवार DLF के राजीव सिंह को पीछे छोड़कर भारत के सबसे अमीर रियल एस्टेट उद्यमी बन गए हैं. 

दरअसल, अडानी प्रॉपर्टीज (Adani Properties) इस साल भारतीय रियल एस्टेट सेक्टर में सबसे बड़ी वैल्यू क्रिएटर बनकर उभरी है, जिसके कारण अडानी परिवार हुरुन की रियल एस्टेट रिच लिस्ट में पहले स्थान पर पहुंच गया है. 

अडानी प्रॉपर्टीज की भारी बढ़त
अडानी प्रॉपर्टीज के वैल्यूवेएशन में सालाना आधार पर 72.5% की भारी बढ़ोतरी दर्ज की गई है. कंपनी ने इस साल अपने वैल्यूएशन में 38,000 करोड़ रुपये जोड़े हैं, जिससे इसका कुल मूल्यांकन 90,400 करोड़ रुपये हो गया है. इसके साथ ही अडानी प्रॉपर्टीज देश की चौथी सबसे मूल्यवान रियल एस्टेट कंपनी (Real Estate Company) बन गई है और इसने भारत की सबसे मूल्यवान अनलिस्टेड रियल एस्टेट डेवलपर के रूप में अपना दबदबा बरकरार रखा है.

हुरुन के अनुसार अडानी ग्रुप द्वारा अपने रियल एस्टेट संचालन को अडानी प्रॉपर्टीज के तहत समेकित करने के फैसले के कारण यह बड़ी उछाल आई है. 

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DLF अभी भी नंबर 1 कंपनी
भले ही गौतम अडानी अमीरों की सूची में शीर्ष पर आ गए हैं. लेकिन कंपनियों के कुल मूल्यांकन के मामले में डीएलएफ अभी भी भारत की नंबर 1 रियल एस्टेट कंपनी बनी हुई है. हालांकि शेयर अपने ऑल टाइम हाई से करीब 27 फीसदी गिर चुका है. इसी गिरावट की वजह से DLF के राजीव सिंह और उनका परिवार रिच लिस्ट में 90,200 करोड़ रुपये की संपत्ति के साथ दूसरे स्थान पर खिसक गया है.

अन्य प्रमुख कंपनियां और टॉप 5 रैंकिंग
वैल्यूवेएशन के आधार पर टॉप- 5 कंपनियों के नाम DLF, लोढ़ा डेवलपर्स (Lodha Developers), इंडियन होटल्स कंपनी (Indian Hotels), अडानी प्रॉपर्टीज (Adani Properties) और प्रिज्म (OYO) हैं. 

रियल एस्टेट सेक्टर में सुस्ती के संकेत
हुरुन की रिपोर्ट ये बताती है कि इस साल रियल एस्टेट सेक्टर में सुस्ती रही है. सूची में शामिल सभी 151 कंपनियों का कुल मूल्यांकन केवल 2% बढ़कर 16.5 लाख करोड़ रुपये हुआ, जो कि पिछले 9 वर्षों में सबसे धीमी बढ़ोतरी है. पिछले साल यह बढ़ोतरी 14% थी. भू-राजनीतिक अनिश्चितताओं और शेयर बाजार में बीएसई रियल्टी इंडेक्स में 20% की गिरावट के कारण निवेशकों की धारणा कमजोर हुई है. पूरी सूची में केवल 31 कंपनियों के मूल्य में बढ़ोतरी हुई, जबकि 74 कंपनियों के मूल्यांकन में गिरावट देखी गई.

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