एक भारतीय परिवार में मां की भूमिका हमेशा से बेहद खास रही है, मां परिवार को भावनात्मक सहयोग और स्थिरता देती है. लेकिन आज के दौर में मां की भूमिका फॉर्मल फाइनेंशियल मामलों में भी अधिक महत्वपूर्ण हो चुकी हैं. आज मां होम लोन में को-एप्लिकेंट बनकर सिर्फ इमोशनल नहीं बल्कि फाइनेंशियल बैकबोन की भूमिका भी निभा रही है.
प्रॉपर्टी की कीमतें आसमान छू रही हैं, इंटरेस्ट रेट के साइकल भी लगातार बदलते रहते हैं. ऐसे में होम लोन लेने वाले परिवार अक्सर इसी बात पर विचार करते हैं कि होम लोन को अफॉर्डेबल कैसे बनाएं. ऐसा ही एक तरीका है कि जॉइंट होम लोन, किसी को-एप्लिकेंट के साथ मिलकर होम लोन लेने से आपको लोन सस्ता पड़ता है.
इसी को ध्यान में रखते हुए आजकल लोग प्रॉपर्टी खरीदते समय अपनी मां को शामिल करना पसंद कर रहे हैं. क्योंकि महिलाओं को इंटरेस्ट रेट में मिलने वाली 0.05-0.10 फीसदी तक की छूट से भी बड़ा फायदा हो सकता है. उदाहरण के लिए अगर आप 20 साल के लिए 75 लाख रुपये का लोन लेते हैं तो आप 1 लाख रुपये से अधिक बचा सकते हैं.
एक्सपर्ट से जानिए फायदे
बेसिक होम लोन के सीईओ और सह-संस्थापक अतुल मोंगा ने बताया कि अगर कोई अपनी मां के साथ मिलकर होम लोन के लिए आवेदन करते हैं तो लोन एलिजिबिलिटी बढ़ जाती है, प्रॉपर्टी चुनने के लिए ज्यादा विकल्प मिल जाते हैं. साथ ही महिलाओं को बेहतर ब्याज दर पर लोन मिल सकता है, ऐसे में आपको लोन सस्ता भी पड़ता है.
इतना ही नहीं, आपको टैक्स में भी फायदे मिलते हैं. उदाहरण के लिए महिलाओं को प्रॉपर्टी रजिस्ट्रेशन पर कम स्टाम्प ड्यूटी देनी पड़ती है, यानी सीधी बचत का फायदा मिलता है. इसके अलावा सेक्शन- 80C और सेक्शन 24B के तहत दोनों को-एप्लिकेंट्स टैक्स में छूट का लाभ उठा सकते हैं.
इसके अलावा सरकारी योजनाओं जैसे प्रधानमंत्री आवास योजना का लाभ भी उठा सकते हैं, जिसमें महिला आवेदकों को ज्यादा फायदे मिलते हैं. महिलाएं प्रधानमंत्री आवास योजना 2.0 के तहत ब्याज में 1.80 लाख रुपये तक की सब्सिडी पा सकती हैं.
एक साथ मिलकर फाइनेंशियल प्लानिंग
उन्होंने बताया कि मौजूदा समय में होम लोन और प्रॉपर्टी महिलाओं के नाम पर लेने का प्रचलन बढ़ रहा है. यह बदलाव लोगों के व्यवहार में आ रहा है. आज भारतीय परिवार योजना बनाकर व्यवस्थित रूप से प्रॉपर्टी खरीदते हैं. क्योंकि घर खरीदना किसी एक व्यक्ति की उपलब्धि नहीं, बल्कि पूरे परिवार के लिए निवेश बन चुका है. होम लोन में मां को को-एप्लिकेंट के रूप में शामिल करने से ओनरशिप और प्रॉपर्टी बनाने के मायने बदल गए हैं.
यही नहीं, को-एप्लिकेंट्स एक साथ मिलकर क्रेडिट प्रोफाइल को अधिक मजबूत बना सकते हैं. लोन के नजरिए से देखा जाए तो अगर आप एक अभिभावक के साथ मिलकर होम लोन के लिए आवेदन करते हैं, तो आपका क्रेडिट प्रोफाइल ज्यादा मजबूत हो जाता है, क्योंकि आप दोनों की इनकम एक साथ मिलकर ज्यादा स्टेबल होती है और आपकी क्रेडिट हिस्ट्री ज्यादा मजबूत हो जाती है. लोन देने वाले बैंकों के अनुसार भी महिलाएं लोन चुकाने में ज्यादा अनुशासन बरतती हैं. ऐसे में आपको बेहतर शर्तों पर आसानी से लोन के लिए अप्रूवल मिल जाता है.
कई बार हो सकती हैं गड़बड़ियां
अक्सर आप यह मानकर चलते हैं कि आप को-एप्लिकेंट हैं, इसलिए प्रॉपर्टी आपकी है. असल में ओनरशिप, रीपेमेंट और कानूनी दस्तावेजों को लेकर स्पष्टता होनी चाहिए. क्रेडिट प्रोफाइल में तालमेल न होने, कोई एक्जिट प्लान न होने की वजह से बाद में दिक्कतें पैदा हो सकती हैं. अच्छा होगा कि जॉइंट होम लोन को फॉर्मल एग्रीमेंट माना जाए, ना किस आसान समाधान.
महिलाओं को को-एप्लिकेंट या को-ओनर बनाने से वित्तीय समावेशन को बढ़ावा मिलता है. आसानी से ऋण मिलना, फॉर्मल ओनरशिप जैसे पहलु आर्थिक आजादी को बढ़ावा देते हैं.