लंबी दूरी की ट्रेन में सफर करने वाले यात्रियों के लिए सफाई और जरूरी सुविधाओं को लेकर रेलवे ने निगरानी बढ़ाने का फैसला किया है. रेलवे बोर्ड ने 40 घंटे से ज्यादा चलने वाली 11 ट्रेनों में पूरी यात्रा के दौरान साफ-सफाई, टॉयलेट, कचरा निपटान और छोटे-मोटे रखरखाव के काम पर कड़ी नजर रखने के निर्देश दिए हैं.
बोर्ड ने साफ किया है कि ट्रेनों की सफाई सिर्फ शुरुआती स्टेशन तक सीमित नहीं रहनी चाहिए, बल्कि मंजिल तक यात्रियों को बेहतर सुविधाएं मिलनी चाहिए. रेलवे बोर्ड ने सभी जोन के महाप्रबंधकों को इस संबंध में लिखित निर्देश भेजे हैं. बोर्ड के मुताबिक, लंबी यात्रा के दौरान हाउसकीपिंग, टॉयलेट और कचरा निपटान से जुड़ी समस्याएं बढ़ सकती हैं. अगर इन्हें समय रहते दूर नहीं किया गया तो यात्रियों को पूरी यात्रा के दौरान परेशानी उठानी पड़ सकती है.
इन 11 ट्रेनों पर खास नजर
रेलवे ने जिन ट्रेनों को इस निगरानी के दायरे में रखा है, उनमें विवेक एक्सप्रेस, अवध असम एक्सप्रेस और रानी कमलापति-अगरतला वीकली एक्सप्रेस शामिल हैं. इसके अलावा अहमदाबाद-सहरसा एक्सप्रेस, दानापुर-एसएमवीटी बेंगलुरु एक्सप्रेस, पुणे-सुपौल एक्सप्रेस और अम्रपाली एक्सप्रेस भी सूची में हैं. झेलम एक्सप्रेस, राजगीर-मुंबई लोकमान्य तिलक टर्मिनस जनता एक्सप्रेस, हावड़ा-इस्लामपुर एक्सप्रेस और अमृतसर-सहरसा गरीब रथ एक्सप्रेस को भी इसमें शामिल किया गया है.
रास्ते में भी होगी साफ-सफाई
संबंधित रेलवे जोन को इन ट्रेनों में ऑन-बोर्ड हाउसकीपिंग स्टाफ की निगरानी मजबूत करने को कहा गया है. यात्रा के दौरान तय जगहों पर सफाई करानी होगी. इसके साथ ही कचरा इकट्ठा करने और उसे सही तरीके से हटाने की व्यवस्था पर भी ध्यान देना होगा. रेलवे ने छोटे-मोटे रिपेयर और यात्रियों से जुड़ी दूसरी सुविधाओं की स्थिति पर भी नजर रखने को कहा है. यानी ट्रेन चलने के बाद भी उसकी साफ-सफाई और रखरखाव की निगरानी जारी रहेगी.
बायो-टॉयलेट की भी होगी जांच
लंबी दूरी की इन ट्रेनों में बायो-टॉयलेट के ठीक से काम करने पर भी खास जोर दिया गया है. रेलवे बोर्ड ने इनके नियमित निरीक्षण और रखरखाव के निर्देश दिए हैं. बोर्ड के मुताबिक, बायो-टॉयलेट की जांच ओरिजिनेटिंग या बेस डिपो के अलावा रास्ते में चिन्हित जगहों पर भी की जानी चाहिए. इसका मकसद यह है कि टॉयलेट से जुड़ी कोई खराबी आने पर उसे लंबे समय तक यात्रियों को न झेलना पड़े.
शिकायतों की हर हफ्ते होगी समीक्षा
रेलवे जोन को इन ट्रेनों की सफाई व्यवस्था की साप्ताहिक समीक्षा करनी होगी. यात्रियों की ओर से मिलने वाली शिकायतों और उनके निपटारे पर भी हर हफ्ते नजर रखी जाएगी. अगर किसी ट्रेन में एक ही तरह की शिकायत बार-बार सामने आती है तो उसके मूल कारण की जांच करनी होगी. रेलवे बोर्ड ने संबंधित अधिकारियों को बिना देरी जरूरी सुधारात्मक कदम उठाने के निर्देश दिए हैं.
CTS प्वाइंट पर भी बढ़ेगी निगरानी
ट्रेनों के रूट में चिन्हित क्लीन ट्रेन स्टेशन (Clean Train Station) प्वाइंट पर भी सफाई व्यवस्था पर खास ध्यान देने को कहा गया है. संबंधित डिवीजन को इन जगहों पर पर्याप्त कर्मचारी, जरूरी सामान और उपकरण उपलब्ध कराने होंगे. CTS टीमों की ओर से किए जा रहे काम की निगरानी और उसकी असरदारी की जांच की जिम्मेदारी भी संबंधित डिवीजन की होगी. यानी सिर्फ सफाई के लिए कर्मचारी तैनात करना ही पर्याप्त नहीं होगा, बल्कि यह भी देखा जाएगा कि काम सही तरीके से हो रहा है या नहीं.
डीआरएम की भी तय हुई जिम्मेदारी
रेलवे ने लंबी दूरी की इन ट्रेनों के प्रदर्शन की जिम्मेदारी संबंधित डिवीजन के मंडल रेल प्रबंधक (DRM) को भी दी है. डीआरएम को यह सुनिश्चित करना होगा कि यात्रियों को पूरी यात्रा के दौरान जरूरी सुविधाएं मिलती रहें. रेलवे बोर्ड ने साफ किया है कि मकसद सिर्फ शुरुआती स्टेशन पर ट्रेन को साफ करके रवाना करना नहीं है. ट्रेन की साफ-सफाई और काम करने की स्थिति पूरी यात्रा के दौरान मंजिल तक बनी रहनी चाहिए.