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यूटिलिटी

टिकट कैंसिलेशन से कितनी कमाई? रेल मंत्री बोले- वंदे भारत और अमृत भारत के लिए अलग नियम

कमाई को लेकर सवाल
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रेलवे टिकट अक्सर लोग कैंसिल कराते रहते हैं, टिकट कैंसिल कराने पर यात्री को पूरा रिफंड नहीं मिलता है. हमेशा लोगों के मन में यह सवाल उठता है कि आखिर टिकट कैंसिल होने से रेलवे हर साल कितने पैसे कमाता है? संसद में सरकार से ये सवाल पूछा गया. जिसपर रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव का जवाब आया है. 

ज़ोन के हिसाब से नहीं रखा जाता कमाई का हिसाब
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ज़ोन के हिसाब से नहीं रखा जाता कमाई का हिसाब
अश्विनी वैष्णव ने बताया कि रेल टिकट कैंसिल कराने और ऑनलाइन वेटिंग टिकट अपने आप कैंसिल होने से आय का जोन-वाइज अलग से कोई रिकॉर्ड नहीं रखा जाता है. यानी उत्तर रेलवे, पूर्व रेलवे या पश्चिम रेलवे जैसे अलग-अलग जोन के हिसाब से यह आंकड़ा अलग-अलग दर्ज नहीं किया जाता है. इसलिए सरकार के पास यह जानकारी उपलब्ध नहीं है कि किस जोन ने टिकट कैंसिलेशन से कितना राजस्व कमाया है. (Photo: ITG)

टिकट कैंसिलेशन को लेकर नियम
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हालांकि रेल मंत्री ने साफ किया कि अलग-अलग जोन की ऐसी अलग सूची नहीं रखी जाती है. लेकिन उन्होंने सामान्य और प्रीमियम ट्रेनों के टिकट कैंसिल कराने के सभी नियम सदन के सामने रखे. 
 

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सामान्य ट्रेनों में टिकट रद्द करने के नियम
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सामान्य ट्रेनों में टिकट रद्द करने के नियम
सामान्य ट्रेनों में कन्फर्म टिकट कैंसिल कराने पर समय के हिसाब से पैसे कटते हैं. अगर ट्रेन छूटने से 48 घंटे पहले टिकट कैंसिल कराते हैं, तो एक तय फीस कटती है, फर्स्ट एसी/एग्जीक्यूटिव क्लास के लिए 240 रुपये, सेकंड एसी के लिए 200 रुपये, थर्ड एसी/चेयर कार के लिए 180 रुपये, स्लीपर क्लास के लिए 120 रुपये और सेकंड क्लास के लिए 60 रुपये. (Photo: Getty)

रेल टिकट कैंसिलेशन को लेकर अलग-अलग नियम
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वहीं ट्रेन छूटने से 48 से 12 घंटे पहले टिकट कैंसिल करने पर कुल किराये का 25% कट जाता है. ट्रेन छूटने से 12 से 4 घंटे पहले टिकट रद्द कराने पर 50% किराया काट लिया जाता है. ट्रेन छूटने में 4 घंटे से कम समय रहने पर कंफर्म टिकट रद्द कराने पर कोई रिफंड नहीं मिलता है. 
 

वेटिंग और आरएसी (RAC) टिकटों का नियम
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वेटिंग और आरएसी (RAC) टिकटों का नियम
अगर आपका टिकट वेटिंग लिस्ट में है या RAC है, तो उसके नियम थोड़े राहत देने वाले हैं. आप ट्रेन छूटने के 30 मिनट पहले तक अपना टिकट कैंसिल करा सकते हैं. इसके लिए रेलवे प्रति यात्री सिर्फ 60 रुपये काटती है और बाकी पूरा पैसा वापस कर देती है. (Photo: Getty)
 

वेटिंग टिकट के लिए ये नियम
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अगर ऑनलाइन वेटिंग टिकट चार्ट बनने के बाद भी कंफर्म नहीं होता है, तो वह अपने आप रद्द हो जाता है और 60 रुपये कटकर बाकी पैसे आपके बैंक खाते में लौट आते हैं. 

वंदे भारत स्लीपर और अमृत भारत एक्सप्रेस का नया नियम
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वंदे भारत स्लीपर और अमृत भारत एक्सप्रेस का नया नियम
इसके अलावा रेल मंत्री ने बताया कि 'वंदे भारत स्लीपर एक्सप्रेस' और 'अमृत भारत एक्सप्रेस' जैसी नई और आधुनिक ट्रेनों के लिए रिफंड के नियम सामान्य ट्रेनों से अलग हैं. इन ट्रेनों के रवाना होने से कम से कम 72 घंटे पहले टिकट कैंसिल कराने पर 25% किराया कटता है. ट्रेन छूटने के 72 से 8 घंटे पहले टिकट रद्द करने पर 50% किराया जब्त होता है. अगर ट्रेन रवाना होने में 8 घंटे से कम समय बचा है, तो टिकट रद्द कराने पर एक भी रुपया रिफंड नहीं मिलेगा.

नियमों में बदलाव की मुख्य वजह
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नियमों में बदलाव की मुख्य वजह
प्रीमियम और नई ट्रेनों के लिए इतने कड़े नियम क्यों बनाए गए हैं? रेल मंत्री का कहना है कि इसका मुख्य मकसद टिकटों की कालाबाजारी, दलाली और फर्जी बुकिंग को रोकना है. कई बार दलाल एक साथ भारी संख्या में टिकट बुक कर लेते हैं और बाद में उन्हें कैंसिल कर देते हैं. कड़े रिफंड नियमों के कारण ऐसे लोगों को आर्थिक नुकसान होगा, जिससे आम और वास्तविक यात्रियों को आसानी से कंफर्म सीट मिल सकेगी. 

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आम यात्रियों के लिए काम की सीख
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आम यात्रियों के लिए काम की सीख
रेलवे के इन नियमों से हर यात्री को यह सीख मिलती है कि जब भी आपकी यात्रा का प्लान बदले, तो बिना देर किए तुरंत टिकट कैंसिल करा लें. आप जितनी जल्दी टिकट रद्द करेंगे, कैंसिलेशन चार्ज उतना ही कम कटेगा. इसके अलावा अगर आप वंदे भारत स्लीपर या अमृत भारत एक्सप्रेस जैसी ट्रेनों में सफर कर रहे हैं, तो समय-सीमा का खास ध्यान रखें ताकि आपके गाढ़े पसीने की कमाई का नुकसान न हो. 

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