अक्सर आपने सुना होगा कि बैंक आपको सर्विस देने के बदले SMS चार्ज, नेट बैंकिंग चार्ज, चेकबुक और एटीएम चार्ज लेता है, लेकिन क्या आप जानते हैं कि बैंक आपको हर्जाना दे सकता है? जवाब है हां... कई स्थितियों में बैंक कस्टमर्स को हर्जाना देते हैं.
अगर आप अपने बैंक में क्रेडिट कार्ड बंद करने के लिए आवेदन करते हैं और तय समय सीमा से अधिक समय लगता है, तो बैंक को आपको हर दिन की देरी के लिए मुआवजा देना होगा. यह सिर्फ कार्ड बंद करने तक ही सीमित नहीं है, क्रेडिट रिपोर्ट में सुधार, फेल डिजिटल भुगतान और अन्य कई मामलों में देरी के लिए भी बैंकों पर जुर्माना लगाया जाता है.
अगर आपके अनुरोध को तय समय सीमा के भीतर प्रोसेस करने में देरी होती है, तो आपका बैंक आपको प्रति दिन 100 रुपये से 5000 रुपये तक का विलंब शुल्क (टैक्स के साथ) देगा. यह नियम केंद्रीय बैंक RBI की ओर से लगाया गया है. आइए जानते हैं वो 5 शर्त, जिसके तहत बैंक आपको हर्जाना देते हैं.
फेल डिजिटल ट्रांजेक्शन
RBI के नियमों के अनुसार, ATM, कार्ड या डिजिटल लेनदेन जैसे ट्रांजेक्शन फेल होने पर कस्टमर्स मुआवजे के हकदार होते हैं. अगर आपकी यूपीआई से पेमेंट फेल या एटीएम से निकासी असफल रही, लेकिन आपके पैसे कट गए और बैंक ने तय समय तक इसे सही नहीं किया तो आपको 100 रुपये प्रति दिन के हिसाब से जुर्माना दिया जाएगा.
क्रेडिट कार्ड बंद करना
RBI के नियम के अनुसार, बैंकों, कार्ड जारीकर्ताओं को क्रेडिट कार्ड बंद करने के अनुरोध को 7 दिन के भीतर करना अनिवार्य है. विलंब होने की स्थिति में, खाता बंद होने तक उन्हें कार्डधारक को हर दिन के लिए 500 रुपये का भुगतान करना होगा.
लोन संबंधी डॉक्यूमेंट
अगर आपने लोन लिया है और अब उसका पूरा पेमेंट कर दिया है, तो आपके बैंक या कर्जदाता के पास आपके बेसिक संपत्ति दस्तावेजों को वापस करने के लिए 30 दिन का समय है. अगर दसतावेज वापस करने में बैंक देरी करता है तो 5000 रुपये का मुआवजा हर दिन के हिसाब से देना होगा.
क्रेडिट रिपोर्ट में सुधार
RBI के अनुसार, किसी की क्रेडिट रिपोर्ट से संबंधित किसी भी विवाद को 30 दिनों के भीतर सॉल्व करना जरूरी है. अगर बैंक फेल हो जाता है, तो शिकायत का समाधान न होने पर यूजर्स को प्रतिदिन 100 रुपये का मुआवजा पाने का अधिकार है.
बैंक लॉकर का नुकसान
RBI नियमों के तहत, लापरवाही, आग, चोरी या धोखाधड़ी के कारण लॉकर के नुकसान की स्थिति में बैंक सलाना किराए के 100 गुना तक सीमित है. अगर आपके लॉकर का सालाना किराया 3000 रुपये है, तो RBI के इंफ्रा के तहत आपको मिलने वाला अधिकतम मुआवजा 3 लाख रुपये होगा.