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AI का गुब्बारा फूटा! $1.3 ट्रिलियन हुआ स्वाहा... अमेरिकी बाजार में मंदी से भारत को होगा मुनाफा?

अमेरिका की सेमीकंडक्टर और एआई से जुड़ी कंपनियों को एक दिन में करीब 1.3 ट्रिलियन डॉलर का नुकसान हुआ है. एनवीडिया, एएमडी, इंटेल और अन्य बड़ी कंपनियों के शेयरों में तेज गिरावट दर्ज की गई. इसके बाद यह बहस तेज हो गई है कि एआई सेक्टर में बना निवेश का बुलबुला फूट रहा है या नहीं.

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NVIDIA, AMD, Intel, Micron जैसी बड़ी-बड़ी कंपनियों के शेयर एक ही दिन में 6 फीसदी से 17 फीसदी तक गिर गए (Photo: AI Generated)
NVIDIA, AMD, Intel, Micron जैसी बड़ी-बड़ी कंपनियों के शेयर एक ही दिन में 6 फीसदी से 17 फीसदी तक गिर गए (Photo: AI Generated)

क्रिकेट में एक टर्म होता है, 'ओवरपिच'. जब गेंदबाज जरूरत से ज्यादा लंबी गेंद फेंक दे, और बल्लेबाज उसे उड़ा दे. कुछ ऐसा ही हुआ है AI की दुनिया में. पिछले तीन साल से दुनिया के सबसे बड़े निवेशक AI में अंधाधुंध पैसा लगाते रहे. लेकिन अब एक ही दिन में इतना पैसा गायब हो जाए जितना कई देशों की पूरी साल की कमाई नहीं होती. यही हुआ अमेरिका की सेमीकंडक्टर कंपनियों के साथ. एक दिन में $1.3 ट्रिलियन की मार्केट वैल्यू खत्म हो गई. NVIDIA, AMD, Intel, Micron जैसी बड़ी-बड़ी कंपनियों के शेयर एक ही दिन में 6 फीसदी से 17 फीसदी तक गिर गए.

और अब यह सवाल उठ रहा है कि क्या एआई का जो बड़ा बुलबुला बना हुआ था, वो फटने वाला है? और अगर फटा, तो भारत के लिए क्या होगा? नुकसान या फायदा? भारत के शेयर मार्केट को इससे क्या लाभ मिलेगा?

पिछले तीन साल से दुनिया के सबसे बड़े निवेशक AI में अंधाधुंध पैसा लगाते रहे. NVIDIA का शेयर जो कि महज कुछ डॉलर का हुआ करता था वो $200 से पार हो गया. कंपनी की कुल कीमत $5 ट्रिलियन पार कर गई. लेकिन फिर एक दिन ऐसा आया कि सिर्फ 24 घंटों में $1.3 ट्रिलियन हवा हो गए.

तो आखिर हुआ क्या? और भारत को इससे नुकसान होगा या फायदा? क्यों इतना बड़ा है सेमीकंडक्टर का खेल?

जैसे खाना बनाने के लिए गैस चाहिए, वैसे हर डिजिटल चीज चलाने के लिए चिप चाहिए. स्मार्टफोन हो, डेटा सेंटर हो, या AI सिस्टम, सब में सेमीकंडक्टर चिप लगती है. और जब से 2023 में AI का धमाका हुआ, इन चिप्स की मांग आसमान छूने लगी. 

AI चलाने के लिए बहुत ज्यादा कंप्यूटिंग ताकत चाहिए, और वो ताकत आती है NVIDIA, AMD, Intel जैसी कंपनियों की चिप्स से.

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नतीजा? इन कंपनियों के शेयर रॉकेट की तरह ऊपर गए. एक इंडेक्स होता है, फिलाडेल्फिया सेमीकंडक्टर इंडेक्स, जो दुनिया की टॉप 30 चिप कंपनियों को मापता है. 2022-23 में इसकी वैल्यू 2500 के आसपास थी. उसके बाद 60-70 फीसदी बढ़ोतरी हुई. पैसा आता रहा, शेयर चढ़ते रहे, और सब खुश थे.

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फिर अचानक धड़ाम क्यों?

मान लीजिए एक नई आइसक्रीम शॉप खुली. अफवाह फैली कि यहां दुनिया की सबसे बेहतरीन आइसक्रीम मिलती है. लोगों ने लंबी लाइनें लगाईं, शेयर खरीदे, दुकान की कीमत आसमान पर पहुंच गई. फिर जब कोई उस आइसक्रीम को खाकर आया तो बोला, 'यार, ठीक-ठाक है, कुछ खास नहीं.' बस, लाइन टूट गई और दुकान की कीमत गिर गई.

यही हुआ AI के साथ. निवेशकों को उम्मीद थी कि AI कंपनियों के नतीजे जादुई होंगे. लेकिन जब असली नतीजे आए तो वो उम्मीद से कम थे. घबराहट फैली और एक दिन में NVIDIA का शेयर छह फीसदी गिरा, एक दिन में $300 बिलियन की मार्केट वैल्यू खत्म हो गई. AMD करीब 10-11% गिरा. Intel करीब 11% गिरा. Micron टेक्नोलॉजी 13% गिरा. Marvell टेक्नोलॉजी 17% गिरा. NASDAQ इंडेक्स, जो टेक कंपनियों को दिखाता है, वो एक दिन में 4% से ज्यादा गिरा. और फिलाडेल्फिया सेमीकंडक्टर इंडेक्स में एक दिन में 10% से ज्यादा की गिरावट आई.

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ये "बबल" है क्या बला?

बबल का मतलब झूठी टेक्नोलॉजी नहीं होता. बबल बनता है जब असली और बड़ी चीज के आसपास जरूरत से ज्यादा उम्मीदें और पैसा जमा हो जाए.

इतिहास गवाह है. जब पहली बार ट्रेन चली, लोगों ने रेलवे कंपनियों में अंधाधुंध पैसा लगाया. फिर बबल फटा. लेकिन क्या ट्रेन बंद हो गई? नहीं. और 1995 से 2000 के बीच जो Dot-com बबल आया, उसमें yahoo.com जैसा नाम रखो और करोड़पति बन जाओ" वाला माहौल था. हर इंटरनेट कंपनी में पैसा आ रहा था. फिर 2000 में क्रैश आया. रातोंरात कंपनियां गायब हुईं. लेकिन Amazon और Google बचे और उन्होंने दुनिया बदल दी.

AI के साथ भी ऐसा ही होगा. बबल फटेगा. कुछ कंपनियां डूबेंगी. लेकिन AI रहेगा और लंबे समय में इंसानी जिंदगी बदलेगा.

पर असल मुद्दा यह है कि पैसा सच में वसूल हो रहा है?

यह सोचने वाली बात है. दुनियाभर में डेटा सेंटरों में सैकड़ों अरब डॉलर लग रहे हैं. चिप्स खरीदी जा रही हैं. बिजली की खपत रिकॉर्ड स्तर पर है. माइक्रोसॉफ्ट, गूगल, मेटा, अमेजन, सब AI इंफ्रास्ट्रक्चर में ताबड़तोड़ निवेश कर रहे हैं.

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लेकिन निवेशक का सवाल वही है जो एक दुकानदार का होता है. 'मैंने दुकान सजाने में इतना खर्चा किया, लेकिन ग्राहक कितने आए?' और जो जवाब आ रहा है वो उम्मीद से कम है. NVIDIA की कमाई असली है, लेकिन जिस कीमत पर उसे खरीदा गया, उसके हिसाब से कमाई अभी भी कम पड़ रही है. यानी ओवरवैल्यूड.

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भारत इसमें कहां आया और कहां गया?

पिछले डेढ़ साल से भारत की शेयर मार्केट परेशान है. कारण है कि विदेशी निवेशक भारत से पैसा निकालकर अमेरिका, ताइवान और साउथ कोरिया की AI कंपनियों में लगा रहे.

भारत कम आकर्षक क्यों लगा? 

क्योंकि भारत की IT ताकत हमेशा से आउटसोर्सिंग में थी. TCS, Infosys, Wipro ये कंपनियां विदेशी बैंकों और कंपनियों के लिए सॉफ्टवेयर बनाती थीं, टेस्ट करती थीं, सपोर्ट देती थीं. यह काम इंसानों पर टिका था.

AI ने खेल बदला. पहले एक बैंक कहता था "हमें 400 इंजीनियर चाहिए." अब वही बैंक AI टूल्स से 100 में काम चला लेता है. सीधा मतलब, भारत की IT कंपनियों को मिलने वाले प्रोजेक्ट कम हुए. इसीलिए TCS की वैल्यू अपने सबसे ऊंचे स्तर से 50-60% गिरी और Infosys 40-50% गिरी.

तो अब बबल फटने से भारत को फायदा मिलेगा?

यहां एक दिलचस्प बात है. दो तरह के देश हैं. पहले वो जो AI पर टिके हैं, जैसे अमेरिका का टेक सेक्टर, ताइवान, साउथ कोरिया. जब तक AI में पैसा आता है, ये चमकते हैं. लेकिन जैसे ही निराशा आती है, इनके शेयर गिरते हैं.

दूसरे वो जो AI पर सीधे निर्भर नहीं, और भारत यहां आता है. भारत में 140 करोड़ लोगों को घर चाहिए, गाड़ी चाहिए, दवाइयां चाहिए, स्कूल चाहिए. यह मांग AI के शेयर गिरने से नहीं रुकती. सरकार सड़क, रेलवे, हाईवे में पैसा लगाती रहेगी. UPI और डिजिटल बैंकिंग की तरक्की AI वैल्यूएशन पर निर्भर नहीं. PLI स्कीम के तहत मैन्युफैक्चरिंग बढ़ रही है, वो भी इस उठापटक से अलग है.

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तो जब AI का बबल फटेगा और अमेरिका-ताइवान के शेयर गिरेंगे, निवेशक ऐसी जगह देखेंगे जो इस तूफान से सुरक्षित हो. भारत वही जगह बन सकता है. और अगर ऐसा हुआ तो वो पैसा जो पिछले डेढ़ साल से भारत से बाहर जा रहा था, वापस लौट सकता है.

एक बात जरूर याद रखें. यह नहीं कह रहे कि भारत में AI नहीं है या नहीं होगा. हर सेक्टर में AI का इस्तेमाल हो रहा है और होगा. लेकिन भारतीय कंपनियों की कीमत AI के शेयरों पर टिकी नहीं है. यही फर्क है और यही भारत का फायदा है.

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आगे क्या?

AI खत्म नहीं होगा. जैसे इंटरनेट क्रैश के बाद Amazon और Google निकले, वैसे ही AI क्रैश के बाद कुछ बड़ी कंपनियां निकलेंगी. NVIDIA उनमें हो सकती है. लेकिन जो सिर्फ AI की लहर पर सवार होकर बढ़ी थीं बिना असली कमाई के, वो डूब सकती हैं.

और भारत के लिए?

यह वक्त सावधान रहने का भी है और मौका देखने का भी. दुनिया जब AI के बुलबुले से निकलेगी, तो असली और टिकाऊ अर्थव्यवस्थाओं की तरफ देखेगी. भारत की कहानी वही है जो हमेशा से थी. खपत, इंफ्रास्ट्रक्चर, युवा आबादी और बढ़ता बाजार. यह कहानी किसी एक टेक्नोलॉजी के उठने-गिरने से नहीं बदलती.

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