वाराणसी में शहरी परिवहन व्यवस्था को बेहतर बनाने की दिशा में अर्बन ट्रांसपोर्ट रोपवे परियोजना तेजी से आगे बढ़ रही है. काशी में इस परियोजना के दूसरे चरण का ट्रायल रन जारी है. इसे दुनिया की तीसरी और भारत की पहली शहरी परिवहन रोपवे परियोजना बताया जा रहा है. इसके शुरू होने से शहर में आने-जाने का एक नया विकल्प मिलेगा और लोगों को रोजाना लगने वाले जाम से राहत मिलने की उम्मीद है.
वाराणसी एक प्रमुख धार्मिक और पर्यटन केंद्र है, यहां काशी विश्वनाथ मंदिर, गंगा घाटों और अन्य धार्मिक स्थलों पर दर्शन के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालु और पर्यटक पहुंचते हैं. संकरी सड़कों और बढ़ते यातायात के कारण शहर के कई इलाकों में आवागमन चुनौतीपूर्ण हो जाता है, ऐसे में रोपवे परियोजना को शहरी परिवहन के एक वैकल्पिक साधन के रूप में देखा जा रहा है.
कैंट से गोदौलिया तक जुड़ेंगे पांच स्टेशन
करीब 3.85 किलोमीटर लंबी इस रोपवे परियोजना में पांच स्टेशन बनाए गए हैं, इनमें वाराणसी कैंट रेलवे स्टेशन, काशी विद्यापीठ, रथयात्रा, गिरजाघर और गोदौलिया शामिल हैं. परियोजना का उद्देश्य शहर के प्रमुख परिवहन केंद्रों को धार्मिक और व्यावसायिक क्षेत्रों से जोड़ना है.
रोपवे शुरू होने के बाद कैंट रेलवे स्टेशन से गोदौलिया तक का सफर करीब 16 मिनट में पूरा होने की उम्मीद है. फिलहाल सड़क मार्ग से इस दूरी को तय करने में 45 मिनट या उससे अधिक समय लग सकता है. इससे श्रद्धालुओं, स्थानीय लोगों और पर्यटकों को आने-जाने में सुविधा मिलने की संभावना है.
परियोजना के साथ शहर की सांस्कृतिक पहचान को भी खास तरीके से पेश करने की तैयारी है. वाराणसी नगर निगम रोपवे कॉरिडोर के आसपास चुनिंदा इमारतों की छतों पर चित्रकारी करा रहा है. इस पहल के तहत गंगा घाटों, बनारसी पान, कचौड़ी, स्थानीय खानपान, हस्तशिल्प और काशी की सांस्कृतिक विरासत से जुड़े चित्र बनाए जा रहे हैं. इसका उद्देश्य रोपवे से सफर करने वाले यात्रियों को शहर की परंपरा और पहचान से रूबरू कराना है.