scorecardresearch
 

तरक्की के बड़े दावे, बारिश में सब ढेर, मानसून में क्यों 'हांफने' लगता है नोएडा

पिछले कई सालों से नोएडा की यह एक तय कहानी बन चुकी है. बारिश का मौसम आते ही यहां के लोगों के लिए राहत कम और आफत ज्यादा हो जाती है. एक तरफ शहर की गगनचुंबी इमारतों, चमचमाती एक्सप्रेस-वे और 'स्मार्ट सिटी' जैसी तरक्की के तमाम दावे किए जाते हैं, लेकिन दूसरी तरफ बारिश की चंद बौछारें झेल पाना भी इस हाइटेक शहर के बस की बात नहीं लगती.

Advertisement
X
बारिश से पस्त हुआ नोएडा (Photo-ITG)
बारिश से पस्त हुआ नोएडा (Photo-ITG)

नोएडा दिल्ली-एनसीआर का सबसे आधुनिक, सुव्यवस्थित और 'हाईटेक' शहर कहा माना जाता है, लेकिन मॉनसून की पहली बारिश के साथ ही घुटनों पर आ जाता है. हर साल दावों और वादों की बड़ी-बड़ी झड़ियां लगती हैं, लेकिन महज दो दिन की भारी बारिश नोएडा प्राधिकरण के ड्रेनेज सिस्टम और तैयारियों की पोल खोलने के लिए काफी है.

बारिश के बाद शहर का जो मंजर सामने आया है, उसने करोड़ों के फ्लैटों में रहने वाले लोगों से लेकर सड़कों पर चलने वाले आम नागरिकों तक, सबको पानी-पानी दिया है. आखिर क्या वजह है कि हर साल करोड़ों रुपये खर्च करने के बाद भी यह हाइटेक शहर पानी में डूब जाता है.

इस साल की बारिश ने नोएडा के अलग-अलग सेक्टरों की हकीकत बयां कर दी है. बारिश में दफ्तर के लिए निकले लोग घंटों तक सड़क पर ट्रैफिक जाम में फंसे रहे, कहीं गाड़ियां पानी के अंदर से जाती हुई दिखीं तो पैदल चलने वाले लोग भी घुटनों तक लगे पानी को पार करते नजर आए. पूरे शहर का नजारा ऐसा था कि बस नाव की कमी थी, आलम ये था कि अगर एक दिन और बारिश हो जाती तो लोगों को घर जाने के लिए बोट का ही सहारा लेना पड़ता.

Advertisement

यह भी पढ़ें: नोएडा अथॉरिटी के दावों की खुली पोल, 24 घंटे की बारिश से सड़कें बनीं तालाब

नोएडा के सेक्टर 62, 63, 75, 82, 105, 122 और एक्सप्रेसवे के सर्विस लेन जैसी प्रमुख जगहों पर पानी इस कदर भर गया कि गाड़ियां आधी डूब गईं. शहर के कई अंडर पास भी तालाब बन गए जिससे लोगों को वहां से निकले में काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ा.  

हाईराइज सोसायटियों का बुरा हाल

ग्रेटर नोएडा वेस्ट की कई नामी सोसायटियों के बेसमेंट में कई फीट तक पानी भर गया. इससे न सिर्फ लाखों की गाड़ियों के खराब होने खतरा बढ़ा, बल्कि लिफ्ट और बिजली की अंडरग्राउंड वायरिंग में शॉर्ट सर्किट का खतरा भी पैदा हो गया. बच्चों के खेलने वाले पार्क तालाबों में तब्दील गए. पॉश इलाकों के बाहर भी घुटनों तक पानी जमा होना आम बात हो गई है.

आखिर क्यों पहली बारिश में ही पस्त हो जाता है नोएडा?

नोएडा की इस बदहाली के पीछे कोई दैवीय आपदा नहीं, बल्कि पूरी तरह से प्रशासनिक लापरवाही और लचर प्लानिंग जिम्मेदार है. नालों की सफाई में भारी लापरवाही सबसे बड़ी वजह नजर आती है. कागजों पर नोएडा प्राधिकरण मॉनसून से पहले सभी छोटे-बड़े नालों की सिल्ट सफाई का दावा करता है, लेकिन जमीन पर स्थिति इसके उलट होती है. नालों से निकाली गई मिट्टी को अक्सर नाले के किनारे ही छोड़ दिया जाता है, जो पहली ही बारिश के पानी के साथ बहकर वापस नाले में चली जाती है और ड्रेनेज को चोक कर देती है.

Advertisement

यह भी पढ़ें: कुछ घंटों की बारिश और दिल्ली-गुरुग्राम 'बंधक', कुदरत का कहर या प्लानिंग गलत!

वहीं नोएडा में अंधाधुंध कंस्ट्रक्शन हो रहा है, मिट्टी वाली जगहें, जो पानी सोखने का काम करती थीं, उन्हें सीमेंटेड कर दिया गया है. इसके अलावा, शहर के कई प्राकृतिक तालाबों और जलस्रोतों को पाटकर उन पर इमारतें खड़ी कर दी गईं, जब पानी को जमीन के नीचे जाने का रास्ता नहीं मिलेगा, तो वह सड़कों और बेसमेंट में ही जमा होगा.

पुराना और कम क्षमता का ड्रेनेज सिस्टम

नोएडा को बसे कई दशक हो चुके हैं, जिस आबादी को ध्यान में रखकर यहां का ड्रेनेज नेटवर्क डिजाइन किया गया था, आज आबादी उससे कई गुना ज्यादा हो चुकी है. हाईराइज सोसायटियों के आने से सीवरेज और ड्रेनेज पर दबाव बढ़ा है, लेकिन इंफ्रास्ट्रक्चर को उस अनुपात में अपग्रेड नहीं किया गया. नोएडा के नालों में औद्योगिक और घरेलू कचरा, विशेषकर सिंगल-यूज़ प्लास्टिक, भारी मात्रा में बहता है. यह प्लास्टिक नालों के मुहानों को ब्लॉक कर देता है, जिससे पानी आगे नहीं बढ़ पाता.

नोएडा की बारिश अब राहत कम और आफत ज्यादा लेकर आती है. जब तक नोएडा प्राधिकरण अपनी कागजी तैयारियों को छोड़कर जमीन पर ठोस और दूरदर्शी कदम नहीं उठाएगा, तब तक करोड़ों रुपये के आलीशान फ्लैटों वाले इस हाइटेक शहर की किस्मत हर मानसून में 'टापुओं' जैसी ही बनी रहेगी.

Advertisement

यह भी पढ़ें: अहमदाबाद से सस्ता, बंपर मुनाफा, क्या धोलेरा अगला रियल एस्टेट हॉटस्पॉट है

---- समाप्त ----
Live TV

Advertisement
Latest News in Hindi »
Advertisement