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अमेरिका पीछे, चीन से टक्कर, ग्लोबल कंस्ट्रक्शन में भारत की बादशाहत

देश में बुनियादी ढांचे के तेज विकास और शहरीकरण के कारण भारत का यह दबदबा कायम हुआ है. साल 2030 तक दुनिया भर में होने वाले कुल निर्माण कार्य की बढ़ोतरी में अकेले भारत और चीन मिलकर लगभग 40% का योगदान देंगे.

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ग्लोबल कंस्ट्रक्शन में बजा भारत का डंका (Photo-ITG)
ग्लोबल कंस्ट्रक्शन में बजा भारत का डंका (Photo-ITG)

भारत अब दुनिया में कंस्ट्रक्शन के मामले में दूसरा सबसे तेजी से बढ़ने वाला देश बन गया है, जिसने अमेरिका को भी पीछे छोड़ दिया है और अब सिर्फ चीन से पीछे है. ऐसा इसलिए हो रहा है क्योंकि हमारे देश में सड़कों-इमारतों जैसे बुनियादी ढांचे का विकास, शहरों का विस्तार और उद्योगों की तरक्की बहुत तेजी से हो रही है.
 
'फाउंडामेंटल' नाम की एक वैश्विक संस्था की 2026 की रिपोर्ट के मुताबिक, साल 2020 से 2030 के बीच पूरी दुनिया में होने वाले कुल निर्माण कार्य की बढ़ोतरी में अकेले भारत की हिस्सेदारी 14.1% होगी, जबकि अमेरिका की 11.1% और चीन की 26.1% रहेगी. बड़ी बात यह है कि इस पूरे दशक में दुनिया भर के निर्माण विकास का लगभग 40% हिस्सा अकेले भारत और चीन मिलकर पूरा करेंगे. 

रिपोर्ट का अनुमान है कि 2024 में दुनिया भर में निर्माण कार्य पर खर्च $15.97 ट्रिलियन तक पहुंच गया और 2028 तक इसके बढ़कर $19.86 ट्रिलियन होने का अनुमान है, जिसका अर्थ है 5.6% की चक्रवृद्धि वार्षिक वृद्धि दर (CAGR).  भौतिक और डिजिटल बुनियादी ढांचे में निवेश तेज हो रहा है, इसलिए कैपिटल एक्सपेंडिचर कुछ चुनिंदा देशों के बीच केंद्रित हो रहा है.

इंफ्रास्ट्रक्चर पर ध्यान

वैश्विक स्तर पर निर्माण क्षेत्र के भीतर बुनियादी ढांचा सबसे तेजी से बढ़ने वाला खंड है, जो 2020 और 2025 के बीच 5.1% की चक्रवृद्धि वार्षिक वृद्धि दर (CAGR) से बढ़ रहा है. रिपोर्ट के अनुसार, भारत का बुनियादी ढांचा बाजार इस दशक के दौरान और भी तेजी से, लगभग 8% वार्षिक दर से बढ़ने की उम्मीद है. सड़कों, रेलवे, हवाई अड्डों, लॉजिस्टिक्स नेटवर्क, मेट्रो सिस्टम और शहरी विकास परियोजनाओं में बड़े पैमाने पर किए जा रहे निवेश देश के इस उत्थान को बढ़ावा देने में मदद कर रहे हैं. तेजी से होता शहरीकरण और मैन्युफैक्चरिंग को दिया जा रहा बढ़ावा भी निर्माण गतिविधियों में वृद्धि में योगदान दे रहे हैं.

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'फाउंडामेंटल' के सह-संस्थापक और जनरल पार्टनर शुभंकर भट्टाचार्य ने कहा, "2020 और 2030 के बीच वैश्विक निर्माण विकास की मात्रा में भारत की हिस्सेदारी 14.1% के साथ दूसरी सबसे बड़ी है, जो केवल चीन से पीछे और संयुक्त राज्य अमेरिका से आगे है."

एआई  और डेटा सेंटर

रिपोर्ट परियोजना अर्थव्यवस्था के अगले चरण को गति देने वाली पांच स्ट्रक्चरल फोर्सेस की पहचान करती है. पुन: औद्योगिकीकरण, डेटा सेंटर निर्माण, ऊर्जा बुनियादी ढांचा, नागरिक बुनियादी ढांचा और रक्षा बुनियादी ढांचा. इनमें से, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और क्लाउड कंप्यूटिंग के उभार से एक नया निर्माण चक्र शुरू होने की उम्मीद है.
 
फाउंडामेंटल का अनुमान है कि 2018 के स्तर की तुलना में 2030 तक वैश्विक डेटा सेंटर का निर्माण दोगुना हो सकता है, जिससे कुल निर्माण बाजार में 10% से 15% की बढ़ोतरी होगी. 

लॉन्ग-टर्म विकास

हालांकि निर्माण का काम बहुत तेजी से बढ़ रहा है, लेकिन रिपोर्ट बताती है कि साल 2000 के बाद से काम करने की रफ्तार और तरीके में हर साल सिर्फ 0.4% का ही मामूली सुधार हुआ है. इसका मतलब यह है कि हमें अब ऐसी नई तकनीकों की सख्त जरूरत है जो काम को ज्यादा तेजी, कुशलता और बेहतर ढंग से पूरा कर सकें.

'फाउंडामेंटल' कंपनी का मानना है कि भारत आने वाले लंबे समय तक चलने वाले कई बदलावों का फायदा उठाने के लिए सबसे सही स्थिति में है. इन बदलावों में देश में सड़कों-इमारतों का बड़ा नेटवर्क बनना, नए उद्योगों की शुरुआत होना, डिजिटल तकनीक का अपनाना और पर्यावरण के अनुकूल ऊर्जा की तरफ बढ़ना शामिल है. यही वजह है कि भारत साल 2030 और उसके बाद भी दुनिया भर में होने वाले निर्माण कार्यों को आगे बढ़ाने में सबसे महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा.

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