सरकारी आंकड़ों में देश के शीर्ष 2 प्रतिशत सबसे ज्यादा कमाने वाले लोगों में शामिल होना भी क्या एक आरामदायक जिंदगी की गारंटी है. हैदराबाद के एक सॉफ्टवेयर इंजीनियर के हालिया बयान ने इस पर बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है. इस शख्स का दावा है कि अपनी भारी-भरकम सैलरी के बावजूद वे हैदराबाद की किसी गेटेड सोसायटी में 2BHK फ्लैट तक नहीं खरीद सकते.
उन्होंने आरोप लगाया है कि देश में फल-फूल रही 'काले धन की समानांतर अर्थव्यवस्था' के कारण सरकारी आंकड़े जमीनी हकीकत से कोसों दूर हैं, जिससे आम टैक्सपेयर के लिए घर खरीदना और महंगे खर्च उठाना अब पहुंच से बाहर होता जा रहा है.
हर्षवर्धन नाम के इस टेक प्रोफेशनल के एक सोशल मीडिया पोस्ट ने देश में आय के स्तर, टैक्स प्रणाली और घरों की बढ़ती कीमतों पर एक नई बहस छेड़ दी है.
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सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर शेयर की गई अपनी पोस्ट में हर्षवर्धन ने लिखा कि आधिकारिक आंकड़ों के हिसाब से वे देश के टॉप 2% कमांडरों में आते हैं, लेकिन जमीनी हकीकत कुछ और ही बयां करती है. अपनी कथित तौर पर ऊंची सैलरी के बावजूद, वे हैदराबाद की किसी अच्छी गेटेड सोसाइटी में 2BHK फ्लैट तक नहीं खरीद सकते, इतना ही नहीं, उनकी कमाई इतनी भी नहीं है कि वे लंबे समय तक किसी प्रीमियम होटल में ठहर सकें.
हर्षवर्धन ने पोस्ट किया- "मैं भारत के टॉप 2% सबसे ज्यादा कमाने वाले लोगों में शामिल हूं, इसके बावजूद, मैं हैदराबाद की किसी गेटेड कम्युनिटी में 2BHK फ्लैट नहीं खरीद सकता और न ही लंबे समय तक प्रीमियम होटलों में रुक सकता हूं."
हर्षवर्धन का मानना है कि सरकारी आय के आंकड़े अधूरा सच दिखाते हैं, क्योंकि वे देश में मौजूद काले धन को शामिल नहीं करते यानी वो कमाई जो टैक्स अधिकारियों से छिपाई जाती है, उन्होंने लिखा, "भारत में एक समानांतर ब्लैक इकोनॉमी चल रही है, जहां बहुत से लोग मुझसे कहीं ज्यादा कमाते हैं और कभी टैक्स नहीं देते."
अपनी बात को साबित करने के लिए उन्होंने उदाहरण दिया कि उनकी सोसायटी में एक 2BHK फ्लैट की कीमत ₹2 करोड़ है. उन्होंने सवाल उठाया- "क्या कोई व्यक्ति ईमानदारी की सैलरी पर इतने महंगे दाम का फ्लैट खरीद सकता है? आप खुद हिसाब लगा लीजिए कि इसके लिए टैक्स चुकाने के बाद की कमाई के कितने साल लग जाएंगे."
सोशल मीडिया पर छिड़ी तीखी बहस
इस पोस्ट के सामने आने के बाद भारत के टैक्स नियमों और लगातार बढ़ती महंगाई को लेकर एक बड़ी चर्चा शुरू हो गई. टैक्स विभाग पर सवाल- एक यूजर ने लिखा, "समस्या यह है कि इनकम टैक्स विभाग सिर्फ मौजूदा टैक्सपेयर्स पर ध्यान दे रहा है, टैक्स चोरों के पीछे नहीं जा रहा. भारत के लगभग 80% कारोबारी टैक्स की चोरी करते हैं, लेकिन शायद ही कभी खबर आती है कि सरकार उन्हें टैक्स के दायरे में लाने के लिए कुछ कर रही है."
एक अन्य यूजर का कहना था, "अगर भारत में वाकई इतनी समृद्धि होती, तो हम एक साल में सिर्फ 50,000 लग्जरी कारें नहीं बेच रहे होते. काले धन पर लगाम लगनी चाहिए, लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि हमारा देश रातों-रात अमीर बन गया है."
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