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घर खरीदने से पहले न करें ये गलतियां, वर्ना डूब जाएगा आपका पैसा

नया घर या फ्लैट खरीदना बड़ा फैसला है, लेकिन एक छोटी सी चूक आपकी जमा-पूंजी फंसा सकती है. डील करने से पहले जान लें वे बड़ी गलतियां, जो अक्सर लोग प्रॉपर्टी खरीदते समय कर बैठते हैं.

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बिल्डिंग की मजबूती और कंस्ट्रक्शन क्वालिटी की जांच के लिए एक्सपर्ट की सलाह लें (Photo: Pexels)
बिल्डिंग की मजबूती और कंस्ट्रक्शन क्वालिटी की जांच के लिए एक्सपर्ट की सलाह लें (Photo: Pexels)

अपना खुद का घर या फ्लैट लेना हर किसी का एक बड़ा सपना होता है. इसके लिए लोग अपनी जिंदगी भर की जमा-पूंजी लगा देते हैं और कई सालों तक बैंक की किश्तें भी भरते हैं. लेकिन देखा जाए तो रियल एस्टेट की दुनिया में थोड़ी सी लापरवाही आपको बहुत बड़ी मुसीबत में डाल सकती है.

कई बार हमें लगता है कि हमने सब कुछ चेक कर लिया है, पर छिपे हुए खर्चे और कागजी हेरफेर बाद में सिरदर्द बन जाते हैं. यही वजह है कि किसी भी प्रॉपर्टी के कागजों पर साइन करने से पहले आपको कुछ जरूरी बातें जरूर जान लेनी चाहिए.

मालिकाना हक की जांच है सबसे जरूरी

घर खरीदने से पहले सबसे पहला काम ये करें कि आप ये पक्का कर लें कि जो इंसान घर बेच रहा है, क्या वही उसका असली मालिक है. इसके अलावा, ये भी चेक करें कि उस प्रॉपर्टी को बेचने का अधिकार उसके पास है भी या नहीं. इतना ही नहीं, आपको तहसील या रजिस्ट्री दफ्तर से 'भार मुक्त प्रमाण पत्र' (Encumbrance Certificate) जरूर मांगना चाहिए. इससे ये पता चल जाता है कि उस घर पर कोई पुराना लोन या बैंक का कर्ज तो नहीं है. अगर मामला कोर्ट में फंसा है, तो ऐसी प्रॉपर्टी से दूर रहने में ही भलाई है.

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कागजात और सरकारी मंजूरी का पूरा गणित

अगर आप नया फ्लैट या अंडर-कंस्ट्रक्शन बिल्डिंग में घर ले रहे हैं, तो सबसे पहले ये देखें कि वो प्रोजेक्ट रेरा (RERA) में रजिस्टर्ड है या नहीं. यही नहीं, बिल्डर से ऑक्यूपेंसी सर्टिफिकेट (OC) और कंप्लीशन सर्टिफिकेट (CC) की मांग जरूर करें. देखा जाए तो बिना OC के घर में रहना कानूनी रूप से गलत माना जाता है. साथ ही, बिल्डर से ये भी पूछें कि प्रोजेक्ट कब तक पूरा होगा और उसका नक्शा सरकारी दफ्तर से पास है या नहीं.

सिर्फ घर मत देखिए, आस-पड़ोस भी परखिए

किसी भी प्रॉपर्टी की कीमत उसके लोकेशन पर टिकी होती है. यही वजह है कि घर फाइनल करने से पहले ये देखें कि वहां से ऑफिस, स्कूल, अस्पताल और बस या मेट्रो स्टेशन कितनी दूर है. इसके साथ ही, ये भी पता करें कि उस इलाके में भविष्य में क्या-क्या विकास होने वाला है. बात यहीं खत्म नहीं होती, प्रॉपर्टी की कीमत हमेशा सरकारी रेट यानी सर्किल रेट के हिसाब से ही तय करें, ताकि बाद में रजिस्ट्री के वक्त कोई दिक्कत न आए.

खर्चे सिर्फ घर की कीमत तक नहीं होते

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ज्यादातर लोग सिर्फ घर की बताई गई कीमत को ही अपना बजट मान लेते हैं, लेकिन सच तो ये है कि असली खर्चे इसके बाद शुरू होते हैं. घर की कीमत के ऊपर आपको स्टैंप ड्यूटी, रजिस्ट्री चार्ज और जीएसटी (GST) जैसे कई टैक्स देने पड़ते हैं. इतना ही नहीं, होम लोन की प्रोसेसिंग फीस और वकीलों की फीस भी आपके बजट का हिस्सा होनी चाहिए. अगर आपने इन छिपे हुए खर्चों का हिसाब नहीं लगाया, तो आखिरी वक्त पर आपकी जेब ढीली हो सकती है.

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खरीदने से पहले खुद जाकर करें जांच

चाहे घर नया हो या पुराना, उसे बाहर से देखकर ही हां न कहें. खुद मौके पर जाकर देखें कि घर में धूप और हवा आती है या नहीं. यही नहीं, पानी की सप्लाई, बिजली का कनेक्शन और सीवर सिस्टम कैसा है, इसकी पूरी पड़ताल करें. इसके अलावा, अगर बिल्डिंग बन रही है, तो वहां इस्तेमाल होने वाले सामान की क्वालिटी जरूर चेक करें. देखा जाए तो बेहतर यही होगा कि आप किसी इंजीनियर या जानकार को साथ ले जाएं ताकि वो दीवार और छत की मजबूती की सही पहचान कर सके.

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