लग्जरी विला और गोल्फ-कोर्स अपार्टमेंट्स के बाद, अब गुरुग्राम का रियल एस्टेट मार्केट 'सीनियर लिविंग और वेलनेस होम्स' के रूप में अपनी अगली बड़ी छलांग लगा रहा है. वैश्विक स्तर पर देखें तो अमेरिका, जापान और ऑस्ट्रेलिया जैसे देशों में यह सेक्टर एक भरोसेमंद 'एसेट क्लास' बन चुका है. वहां बढ़ती उम्र और बेहतर स्वास्थ्य सुविधाओं ने इसे निवेश से ज्यादा एक अनिवार्य जरूरत बना दिया है. यही वजह है कि वहां इन घरों में कभी मांग कम नहीं होती. अब भारत भी इसी बदलाव की दहलीज पर है, जहां गुरुग्राम इस नए ट्रेंड को लीड करने के लिए पूरी तरह तैयार खड़ा है.
सीनियर लिविंग का जो ट्रेंड कभी दक्षिण भारत तक सीमित था, वह अब गुरुग्राम में भी देखा जा सकता है. गुरुग्राम का आधुनिक ढांचा और सामाजिक परिवेश वरिष्ठ नागरिकों को अपनी ओर खींच रहा है. अगर बात सेंट्रल गुरुग्राम की करें, तो यहां रहना बुजुर्गों के लिए किसी वरदान से कम नहीं है.
अस्पताल से लेकर रोजमर्रा की जरूरतों तक, सब कुछ इतना करीब है कि उन्हें किसी पर निर्भर नहीं रहना पड़ता. यहां की नागरिक सुविधाएं उन्हें सुरक्षा का वो एहसास देती हैं, जिसकी तलाश हर बुजुर्ग को होती है.
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क्या कहते हैं एक्सपर्ट?
पायनियर अर्बन लैंड एंड इंफ्रास्ट्रक्चर लिमिटेड के सीनियर वाइस प्रेसिडेंट ऋषभ पेरिवाल के कहते हैं- “सीनियर लिविंग अब केवल एक छोटी सी जरूरत नहीं, बल्कि रियल एस्टेट का एक ताकतवर निवेश क्षेत्र बन चुका है. आज का फोकस सिर्फ देखभाल तक सीमित नहीं है, बल्कि बुजुर्गों को एक ऐसा माहौल देने पर है जहां वे सम्मान और आजादी के साथ लंबी उम्र का आनंद ले सकें. गुरुग्राम जैसे बड़े शहरों में, उन प्रीमियम कम्युनिटीज की सबसे ज्यादा डिमांड है, जहां मेडिकल सुविधाएं परिसर के भीतर ही मौजूद हैं. जैसे-जैसे लोग जागरूक हो रहे हैं, सीनियर लिविंग अब रेजिडेंशियल मार्केट का सबसे भरोसेमंद और तेजी से बढ़ने वाला हिस्सा बनता जा रहा है."
जे एस्टेट्स के फाउंडर और मैनेजिंग डायरेक्टर अनिल गोदारा कहते हैं- 'बदलते वक्त के साथ भारत के वरिष्ठ नागरिकों की सोच भी बदली है वे अब अपनों से दूर नहीं, बल्कि अपनी शर्तों पर एक सुरक्षित जीवन जीना चाहते हैं. यही वजह है कि सीनियर लिविंग सेक्टर में अब बड़ा उछाल आ रहा है. गुरुग्राम इस बदलाव का केंद्र बन चुका है, जहां आधुनिक सुविधाएं और बेहतर मेडिकल इंफ्रास्ट्रक्चर एक साथ मौजूद हैं. आज मार्केट में इस तरह के घरों की भारी मांग है, लेकिन सप्लाई कम है. सीनियर लिविंग का मतलब अब केवल 'बुढ़ापे का ठिकाना' नहीं, बल्कि आजादी और गरिमा के साथ जीना है. ऐसे प्रोजेक्ट्स न केवल निवेशकों के लिए फायदेमंद हैं, बल्कि ये आधुनिक भारत की एक बड़ी आवासीय कमी को भी दूर कर रहे हैं.'
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सीनियर लिविंग में चुनौतियां?
हालांकि मांग तेजी से बढ़ रही है, लेकिन इस राह में चुनौतियां भी कम नहीं हैं. सबसे बड़ी समस्या 'किफायती विकल्पों' की है. गुरुग्राम में फिलहाल जो सीनियर लिविंग प्रोजेक्ट्स आ रहे हैं, वे ज्यादातर प्रीमियम या लग्जरी श्रेणी के हैं, जो मध्यम वर्ग की पहुंच से बाहर हो सकते हैं.
इसके अलावा, सीनियर लिविंग का मतलब सिर्फ एक बिल्डिंग खड़ा करना नहीं है. इसके लिए विशेष रूप से प्रशिक्षित स्टाफ और निरंतर मेडिकल सपोर्ट की जरूरत होती है. किसी भी डेवलपर के लिए घर बनाने के साथ-साथ एक 'सर्विस प्रोवाइडर' की भूमिका निभाना एक बड़ी जिम्मेदारी है. आज के जागरूक खरीदार केवल ऊंची इमारतों को नहीं, बल्कि उस भरोसे और सर्विस क्वालिटी को देख रहे हैं जो उनके अपनों को एक सुरक्षित बुढ़ापा दे सके.